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Election: जुबां पर नारे... कर गए वारे न्यारे, हरियाणा की राजनीति में नारों का खास महत्व; ये नारा पड़ा था भारी
Tue, 09 Apr 2024 11:43 AM IST
शाहरुख खान
गुलाब सैनी, अमर उजाला, चंडीगढ़
गुलाब सैनी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 09 Apr 2024 11:43 AM IST
सार
हरियाणा की राजनीति में नारों का खास महत्व है। 1966 में हरियाणा बनने से लेकर अब तक कई नारे लोगों की जुबां पर छा गए। आइए जानते हैं...
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Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चुनाव में पार्टियां और नेता अपने प्रचार और प्रतिद्वंद्वियों पर प्रहार करने के लिए तरह-तरह के नारों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर जनता ने भी ऐसे नारे दिए, जो पार्टियों के वारे-न्यारे कर गए।
हरियाणा की राजनीति में भी नारों व जुमलों की खास भूमिका रही है। 1966 में हरियाणा बनने से लेकर अब तक कई नारे लोगों की जुबां पर छा गए। 1967 में विशाल हरियाणा पार्टी के बैनर तले यहां पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी और राव बिरेंद्र सिंह 21 मार्च से 2 नवंबर 1967 तक सीएम रहे।
उनके राज में फसलों के बेहतर दाम मिले तो राव आया, भाव लाया का नारा खूब चला। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासन में निर्यात के चलते चावल के अच्छे दाम मिले तो समर्थकों ने नारा दिया- हुड्डा तेरे राज में, जीरी गई जहाज में। इससे पहले कांग्रेस समर्थकों ने ओमप्रकाश चौटाला के राज में रही व्यवस्था के खिलाफ नारा दिया कि चौटाला तेरे राज में, जीरी गई ब्याज में और पराली गई लिहाज में।
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सड़कां के मोड़, अर मास्टरां की मरोड़ छोडूं कोणी
चौधरी बंसीलाल जब 1985 में दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने तो शिक्षकों ने कई बार आंदोलन किए। सीएम के पास शिक्षकों की शिकायतें भी पहुंचतीं। इस पर बंसीलाल ने तंग आकर शिक्षकों के घर से कम से कम 20 किलोमीटर दूर तबादले कर दिए।
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हरियाणा की राजनीति में भी नारों व जुमलों की खास भूमिका रही है। 1966 में हरियाणा बनने से लेकर अब तक कई नारे लोगों की जुबां पर छा गए। 1967 में विशाल हरियाणा पार्टी के बैनर तले यहां पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी और राव बिरेंद्र सिंह 21 मार्च से 2 नवंबर 1967 तक सीएम रहे।
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उनके राज में फसलों के बेहतर दाम मिले तो राव आया, भाव लाया का नारा खूब चला। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासन में निर्यात के चलते चावल के अच्छे दाम मिले तो समर्थकों ने नारा दिया- हुड्डा तेरे राज में, जीरी गई जहाज में। इससे पहले कांग्रेस समर्थकों ने ओमप्रकाश चौटाला के राज में रही व्यवस्था के खिलाफ नारा दिया कि चौटाला तेरे राज में, जीरी गई ब्याज में और पराली गई लिहाज में।
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सड़कां के मोड़, अर मास्टरां की मरोड़ छोडूं कोणी
चौधरी बंसीलाल जब 1985 में दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने तो शिक्षकों ने कई बार आंदोलन किए। सीएम के पास शिक्षकों की शिकायतें भी पहुंचतीं। इस पर बंसीलाल ने तंग आकर शिक्षकों के घर से कम से कम 20 किलोमीटर दूर तबादले कर दिए।
इसकी जानकारी कांग्रेस हाईकमान तक पहुंची, लेकिन बंसी लाल अपने फैसले पर अड़े रहे। बाद में उन्होंने कहा कि सड़कां के मोड़, अर मास्टरां की मरोड़ छोडूं कोणी। इसके बाद चुनाव में विपक्ष ने इसे जुमले की तौर पर सरकार के खिलाफ इस्तेमाल किया।
...आया राम-गया राम
1967 में हसनपुर से विधायक गया लाल ने एक दिन में तीन बार दलों की अदला-बदली की। पहले कांग्रेस से यूनाइटेड फ्रंट में गए, फिर कांग्रेस में लौटे और फिर नौ घंटे के अंदर यूनाइटेड फ्रंट में शामिल हो गए। तब राव बिरेंद्र ने चंडीगढ़ में कहा था ‘गया राम, अब आया राम है।’ हालांकि, गया लाल के बेटे और वर्तमान में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष उदयभान इसे नकारते रहे हैं।
1967 में हसनपुर से विधायक गया लाल ने एक दिन में तीन बार दलों की अदला-बदली की। पहले कांग्रेस से यूनाइटेड फ्रंट में गए, फिर कांग्रेस में लौटे और फिर नौ घंटे के अंदर यूनाइटेड फ्रंट में शामिल हो गए। तब राव बिरेंद्र ने चंडीगढ़ में कहा था ‘गया राम, अब आया राम है।’ हालांकि, गया लाल के बेटे और वर्तमान में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष उदयभान इसे नकारते रहे हैं।
इंदिरा हटाओ नारे पर गरीबी हटाओ का नारा भारी पड़ा
70 के दशक में कांग्रेस दो फाड़ हो गई। इंदिरा गांधी ने 1971 में मध्यावधि चुनाव कराने का निर्णय लिया था। कांग्रेस से अलग हुए गुट ने इंदिरा हटाओ का नारा दिया। इसके विपरीत इंदिरा गांधी ने तब गरीबी हटाओ का नारा दिया। इंदिरा हटाओ नारे पर गरीबी हटाओ का नारा भारी पड़ा और देश में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी।
70 के दशक में कांग्रेस दो फाड़ हो गई। इंदिरा गांधी ने 1971 में मध्यावधि चुनाव कराने का निर्णय लिया था। कांग्रेस से अलग हुए गुट ने इंदिरा हटाओ का नारा दिया। इसके विपरीत इंदिरा गांधी ने तब गरीबी हटाओ का नारा दिया। इंदिरा हटाओ नारे पर गरीबी हटाओ का नारा भारी पड़ा और देश में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए चुनाव में जब तक सूरज-चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा... का नारा सबकी जुबां पर था। 1989 में हुए चुनावों में बोफोर्स तोप की दलाली का मुद्दा खूब उछला था। तब विपक्ष ने कांग्रेस के खिलाफ नारा दिया था गालों पर जो लाली है, तोपों की दलाली है।