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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब की विपक्षी सियासत में मची उथलपुथल, कांग्रेस को दिख रहा फायदा
Tue, 08 Jan 2019 01:11 PM IST
खुशबू गोयल
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 08 Jan 2019 01:11 PM IST
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- फोटो : File Photo
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पंजाब की विपक्षी सियासत में जारी उथलपुथल से प्रदेश कांग्रेस काफी राहत में है। ऐसे में पार्टी लोकसभा चुनाव में किला फतेह करने के सपने देख रही है। बेअदबी और बहिबलकलां गोलीकांड मामलों में शिअद की बुरी तरह गिरी साख और पार्टी के दोफाड़ हो जाने के बाद अब मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी का किला भी कमजोर होने लगा है। इस पार्टी में भी इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है।
इन हालात को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस ने भी आलाकमान को राय दे दी है कि पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए आप से गठजोड़ करने का कोई फायदा नहीं होगा और पार्टी अपने दम पर ही सभी 13 सीटें जीत सकती है। बीते एक साल के दौरान पंचायतों समेत सभी स्थानीय चुनावों में मिली शानदार जीत से उत्साहित प्रदेश कांग्रेस ने यह मान लिया है कि आगामी लोकसभा चुनाव में उसका रास्ता साफ है और प्रदेश में विपक्ष उसे चुनौती देने की स्थिति में नहीं है।
दरअसल, अकाली दल के दोफाड़ होने और नया अकाली दल टकसाली वजूद में आने के बाद अकाली दल का सारा जोर पार्टी को ओर अधिक टूट से बचाने में लगा है। उधर, आप की हालत यह है कि उसे दो विधायकों के इस्तीफे के बाद पहली चिंता तो विधानसभा में विपक्ष का नेता पद बचाने की है। इस बीच अगर कुछ और विधायक इस्तीफा देकर विरोधी खेमे के साथ चले गए तो प्रदेश में पार्टी की स्थिति काफी कमजोर हो सकती है। इसके बावजूद, आप से अलग हुए नेता अगर अपनी नई पार्टी का गठन भी कर लेते हैं तो सुखपाल खैरा को छोड़ अन्य किसी नेता का कोई राजनीतिक आधार नहीं है।
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अकाली दल टकसाली के अध्यक्ष रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा एक ओर जहां एचएस फूलका को साथ लाना चाह रहे हैं वहीं उन्होंने लोक इंसाफ पार्टी के बैंस बंधुओं से कई दौर की बातचीत कर ली है। सत्ता पर काबिज कांग्रेस जो अपने चुनावी वादे पूरे नहीं करने को लेकर विपक्ष के निशाने पर है, को लोकसभा चुनाव के दौरान किसानों और सरकारी मुलाजिमों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। यह नाराज वोट विपक्ष की झोली में जा सकता था लेकिन विपक्ष के बेअसर हो जाने से कांग्रेस सभी 13 सीटें जीत लेने का दावा कर रही है।
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इन हालात को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस ने भी आलाकमान को राय दे दी है कि पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए आप से गठजोड़ करने का कोई फायदा नहीं होगा और पार्टी अपने दम पर ही सभी 13 सीटें जीत सकती है। बीते एक साल के दौरान पंचायतों समेत सभी स्थानीय चुनावों में मिली शानदार जीत से उत्साहित प्रदेश कांग्रेस ने यह मान लिया है कि आगामी लोकसभा चुनाव में उसका रास्ता साफ है और प्रदेश में विपक्ष उसे चुनौती देने की स्थिति में नहीं है।
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दरअसल, अकाली दल के दोफाड़ होने और नया अकाली दल टकसाली वजूद में आने के बाद अकाली दल का सारा जोर पार्टी को ओर अधिक टूट से बचाने में लगा है। उधर, आप की हालत यह है कि उसे दो विधायकों के इस्तीफे के बाद पहली चिंता तो विधानसभा में विपक्ष का नेता पद बचाने की है। इस बीच अगर कुछ और विधायक इस्तीफा देकर विरोधी खेमे के साथ चले गए तो प्रदेश में पार्टी की स्थिति काफी कमजोर हो सकती है। इसके बावजूद, आप से अलग हुए नेता अगर अपनी नई पार्टी का गठन भी कर लेते हैं तो सुखपाल खैरा को छोड़ अन्य किसी नेता का कोई राजनीतिक आधार नहीं है।
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अकाली दल टकसाली के अध्यक्ष रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा एक ओर जहां एचएस फूलका को साथ लाना चाह रहे हैं वहीं उन्होंने लोक इंसाफ पार्टी के बैंस बंधुओं से कई दौर की बातचीत कर ली है। सत्ता पर काबिज कांग्रेस जो अपने चुनावी वादे पूरे नहीं करने को लेकर विपक्ष के निशाने पर है, को लोकसभा चुनाव के दौरान किसानों और सरकारी मुलाजिमों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। यह नाराज वोट विपक्ष की झोली में जा सकता था लेकिन विपक्ष के बेअसर हो जाने से कांग्रेस सभी 13 सीटें जीत लेने का दावा कर रही है।