मनजिंदर सिंह सिरसा का ट्वीट- सिखों के मामले में दखल न दे बीजेपी, कहीं टूट न जाए गठबंधन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिरोमणि अकाली दल के महासचिव व पार्टी सुप्रीमो सुखबीर बादल का दाहिना हाथ माने जाने वाले दिल्ली से विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि सिखों के धार्मिक स्थानों में दखलंदाजी बंद की जाए, वरना भाजपा शिअद गठबंधन टूट सकता है। सिरसा ने टवीट् कर एक वीडियो अपलोड भी की और कहा कि हमें कुर्सियों का लालच नहीं है, अगर हमारे गुरुद्वारों पर सरकार ने दखलंदाजी जारी रखी तो हम सब कुछ छोड़ देंगे।
सिरसा दिल्ली से भाजपा की टिकट पर ही 2017 में उपचुनाव में विधायक बने थे और भाजपा अकाली दल की सरकार के दौरान पंजाब में सुखबीर बादल के ओएसडी भी रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले शिरोमणि अकाली दल के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा के इस हमले से साफ हो गया है कि शिअद व भाजपा में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।
सिरसा ने ट्वीट करते हुए कहा कि गुरुद्वारों पर सरकार की दखलंदाजी से सिखों में गुस्सा है। सिखों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। चाहे वह श्री पटना साहिब हो या श्री हजूर साहिब। सिरसा ने कहा कि मैं अमित शाह से अपील करता हूं कि इस मुद्दे पर ध्यान दें, नहीं तो यह मुद्दा अकाली दल और भाजपा के बीच दरार पैदा कर सकता है। दोनों का गठबंधन टूट सकता है।
टवीट् के साथ एक वीडियो अपलोड कर सिरसा ने कहा कि यह बोलना हमारी मजबूरी है कि तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में सरकार ने दखलंदाजी करनी शुरू की। श्री पटना साहिब में एनडीए की तरफ से तीन मेंबर बनाकर वहां कब्जे की कोशिश की गई। अब श्री हजूर साहिब में सरकार अपना प्रधान बनाना चाहती है। हमारे लिए गठबंधन मायने नहीं रखता। गुरुद्वारे का प्रधान कौन बनेगा, यह हक सिखों का है, सरकार का नहीं।
किसी भी सूरत में सरकार हमारे गुरुद्वारों में दखल नहीं दे सकती। हमें गठबंधन नहीं, न ही कुर्सियां चाहिए, हम गुरुद्वारों पर सरकार की दखलंदाजी नहीं चाहते। हमारे लिए धार्मिक स्थान की अहमियत है। सरकार सिखों के गुरुद्वारे के लिए बने एक्ट को खुद ही संशोधन कर अपनी मनमर्जी के प्रधान लगाने जा रही है, जिसका डटकर विरोध किया जाएगा।
पिछले एक सप्ताह में अकाली दल व भाजपा के बीच काफी खटास पैदा होती दिख रही है। केंद्र सरकार की ओर से राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा को पद्मश्री से नवाजा गया, जबकि उसी दिन ढींढसा ने कहा कि अकाली दल तभी खड़ा हो सकता है, अगर इसकी लीडरशिप सुखबीर के स्थान पर किसी अन्य के हाथ में दी जाए।
इतना ही नहीं, एसजीपीसी को बादल परिवार के चंगुल से छुड़ाने का एलान करने वाले सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट एचएस फूलका को भी पद्मश्री से नवाजा गया। चौंकाने वाली बात रही कि सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल ने अपनी पार्टी के सीनियर नेता सुखदेव सिंह ढींढसा को पद्मश्री से नवाजे जाने पर सार्वजनिक तौर पर बधाई तक नहीं दी।