{"_id":"5ec238758ebc3e907664b5af","slug":"lockdown-coronavirus-migrant-workers-stopped-on-up-border","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा से गए मजदूर यूपी बॉर्डर पर रोके गए, हाथ जोड़ बोले- घर जाने दीजिए, खाने को कुछ नहीं है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा से गए मजदूर यूपी बॉर्डर पर रोके गए, हाथ जोड़ बोले- घर जाने दीजिए, खाने को कुछ नहीं है
Mon, 18 May 2020 01:03 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 18 May 2020 01:03 PM IST
विज्ञापन
प्रवासी मजदूर
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काफी संख्या में इकट्ठे होकर प्रवासी मजदूर अपने घर जाने के लिए हरियाणा से निकले, लेकिन उन्हें यूपी से लगते बॉर्डर पर रोक लिया गया। वे सोनीपत जिले से गांव बांकीपुर होते हुए हरदोई के लिए निकले थे। लेकिन बॉर्डर से आगे जाने नहीं दिया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि हमें अपने घर जाना है। हमें बॉर्डर पार करने की अनुमति दी जाए। हमारे पास खाने को कुछ नहीं है। न पैसे हैं और न ही छत, काफी मशक्कत के बाद परिवार को लेकर यहां तक पहुंचे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Haryana: Some migrant labourers are making an attempt to return to their native places in UP, via Bhaira Bankipur village in Sonipat dist. They say "We've to go to Hardoi. We're stopped on all borders,irrespective of the route we take. Allow us to walk home,we have no food"(17.5) pic.twitter.com/DUTpLl5O7tविज्ञापन— ANI (@ANI) May 18, 2020
विज्ञापन
सहारनपुर में लाठीचार्ज
नदी-नाले पार करके अपने गांव जाने के लिए बेचैन श्रमिकों को पुलिस की लाठियों का शिकार होना पड़ रहा है। राज्यों में आपसी तालमेल की कमी के चलते मजदूर कच्चे रास्तों को पकड़ हाईवे की तलाश कर रहे हैं। केंद्र सरकार की नजर हाईवे की दिल दहला देने वाली तस्वीर पर पड़ी तो राज्य सरकारों को श्रमिकों को रोकने के लिए कहा गया, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया।
अब हालात ये हैं कि पंजाब में हालात खराब होते देख यह श्रमिक हरियाणा के कच्चे रास्तों के माध्यम से जाना चाह रहे हैं, लेकिन दोनों राज्यों की पुलिस की लाठियां इन पर भारी पड़ रही हैं। हरियाणा के डीजीपी लगातार पंजाब के डीजीपी से इस बाबत संपर्क में है। प्रयास यही है कि स्थितियां सामान्य हो जाएं।
ऐेसे में ताजा घटनाक्रम यह है कि सहारनपुर बार्डर के रास्ते उत्तर प्रदेश भेजे जाने वाले इन कामगारों को लेकर जाने वाली बसों की संख्या घट जाएगी। रोजाना जहां 50 बसें जाती थीं, सोमवार से यह कोटा कम हो जाएगा। सहारनपुर के रास्ते जाने वाले इन 1500 श्रमिकों को वहां लाठीचार्ज होने के कारण वापस भेज दिया गया है। अब इन्हें शिविर में रोकने की व्यवस्था की जा रही है।
यमुनानगर में लाठीचार्ज की अकेली घटना नहीं है, जिससे इन श्रमिकों का हौसला टूटा है, बल्कि कुछ दिन पहले पंजाब के रास्ते अंबाला पहुंचे श्रमिकों को भी पुलिस की धमकी का शिकार होना पड़ा। पंजाब पुलिस ने इन श्रमिकों को धमका कर बॉर्डर पार करवा दिया और हरियाणा पुलिस ने वापस भेजा तो लेने से इनकार कर दिया। बाद में इन्हें अंबाला में रखा गया। रविवार को भी शंभू बार्डर पर हाईवे पर श्रमिकों ने जाम लगाया।
अब हालात ये हैं कि पंजाब में हालात खराब होते देख यह श्रमिक हरियाणा के कच्चे रास्तों के माध्यम से जाना चाह रहे हैं, लेकिन दोनों राज्यों की पुलिस की लाठियां इन पर भारी पड़ रही हैं। हरियाणा के डीजीपी लगातार पंजाब के डीजीपी से इस बाबत संपर्क में है। प्रयास यही है कि स्थितियां सामान्य हो जाएं।
ऐेसे में ताजा घटनाक्रम यह है कि सहारनपुर बार्डर के रास्ते उत्तर प्रदेश भेजे जाने वाले इन कामगारों को लेकर जाने वाली बसों की संख्या घट जाएगी। रोजाना जहां 50 बसें जाती थीं, सोमवार से यह कोटा कम हो जाएगा। सहारनपुर के रास्ते जाने वाले इन 1500 श्रमिकों को वहां लाठीचार्ज होने के कारण वापस भेज दिया गया है। अब इन्हें शिविर में रोकने की व्यवस्था की जा रही है।
यमुनानगर में लाठीचार्ज की अकेली घटना नहीं है, जिससे इन श्रमिकों का हौसला टूटा है, बल्कि कुछ दिन पहले पंजाब के रास्ते अंबाला पहुंचे श्रमिकों को भी पुलिस की धमकी का शिकार होना पड़ा। पंजाब पुलिस ने इन श्रमिकों को धमका कर बॉर्डर पार करवा दिया और हरियाणा पुलिस ने वापस भेजा तो लेने से इनकार कर दिया। बाद में इन्हें अंबाला में रखा गया। रविवार को भी शंभू बार्डर पर हाईवे पर श्रमिकों ने जाम लगाया।