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शराब घोटाले की जांच कर रही एसईटी दायरे की बेड़ियों में जकड़ी, सरकार को लिखा गया पत्र
Fri, 26 Jun 2020 11:56 AM IST
खुशबू गोयल
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 26 Jun 2020 11:56 AM IST
सार
- एसईटी प्रमुख ने कागजात के लिए एक बार फिर लिखा सरकार को पत्र
- अनिल विज बोले, दस्तावेज नहीं उपलब्ध करवा रहा आबकारी विभाग
- दुष्यंत पहले ही कह चुके हैं दायरे से बाहर आकर कागज मांग रही एसईटी
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गृह मंत्री अनिल विज
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विस्तार
हरियाणा के चर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही एसईटी खुद ही दायरे में उलझ कर रह गई है। जांच के लिए एसईटी को दस्तावेजों की दरकार है। एसईटी प्रमुख टीसी गुप्ता ने एक बार फिर से सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि एसईटी को जांच के लिए आबकारी विभाग से कागजात चाहिए। यह जानकारी देते हुए हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बताया कि अभी तक एक भी कागज एसईटी के पास नहीं आया है। उधर घोटाले के किंगपिन भूपेंद्र गुजरात पुलिस भी पूछताछ कर चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक बिहार पुलिस को भी कुछ मामलो में भूपेंद्र की तलाश है। एसईटी का गठन 10 मई को हुआ था। एसईटी के गठन हुए 45 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक नतीजा नहीं निकला है। पहले गृह मंत्री ने एसईटी के गठन के समय उसमें आईएएस अशोक खेमका सहित तीन आईएएस अधिकारियों के नाम की सिफारिश की थी। खेमका विज की पहली पसंद थे, लेकिन एसईटी खेमका की बजाए टीसी गुप्ता की अध्यक्षता में गठित हुई। बाद में विज ने सरकार को यह पत्र लिखा कि एसईटी की शक्ति बढ़ाई जाए। यह फाइल भी कानूनी पचड़े में उलझ कर रह गई।
जिसके बाद एसईटी प्रमुख टीसी गुप्ता ने सरकार ने एसईटी का कार्यकाल बढ़ाने की सिफारिश की। इसमें कहा गया कि एसईटी को आवश्यक कागजात चाहिए। जिसके बाद अनिल विज का यह बयान आया कि आबकारी महकमा एसईटी को कागजात नहीं दे रहा, जिसके चक्कर में एसईटी जांच नहीं कर पा रही है। वहीं घोटाले में पुलिस ने आरोपी इंस्पेक्टर जसबीर को गिरफ्तार तो कर लिया है, लेकिन गिरफ्तारी में लंबा समय लग गया। वह भी तब जब उसका परिवार हरियाणा में ही रहता रहा है। सूत्रों का कहना है कि जसबीर की गिरफ्तारी में विलंब होने में के पीछे भी बड़े कारण है।
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सूत्रों के मुताबिक बिहार पुलिस को भी कुछ मामलो में भूपेंद्र की तलाश है। एसईटी का गठन 10 मई को हुआ था। एसईटी के गठन हुए 45 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक नतीजा नहीं निकला है। पहले गृह मंत्री ने एसईटी के गठन के समय उसमें आईएएस अशोक खेमका सहित तीन आईएएस अधिकारियों के नाम की सिफारिश की थी। खेमका विज की पहली पसंद थे, लेकिन एसईटी खेमका की बजाए टीसी गुप्ता की अध्यक्षता में गठित हुई। बाद में विज ने सरकार को यह पत्र लिखा कि एसईटी की शक्ति बढ़ाई जाए। यह फाइल भी कानूनी पचड़े में उलझ कर रह गई।
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जिसके बाद एसईटी प्रमुख टीसी गुप्ता ने सरकार ने एसईटी का कार्यकाल बढ़ाने की सिफारिश की। इसमें कहा गया कि एसईटी को आवश्यक कागजात चाहिए। जिसके बाद अनिल विज का यह बयान आया कि आबकारी महकमा एसईटी को कागजात नहीं दे रहा, जिसके चक्कर में एसईटी जांच नहीं कर पा रही है। वहीं घोटाले में पुलिस ने आरोपी इंस्पेक्टर जसबीर को गिरफ्तार तो कर लिया है, लेकिन गिरफ्तारी में लंबा समय लग गया। वह भी तब जब उसका परिवार हरियाणा में ही रहता रहा है। सूत्रों का कहना है कि जसबीर की गिरफ्तारी में विलंब होने में के पीछे भी बड़े कारण है।
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गेट पास के मामले पर दुष्यंत चौटाला पहले ही स्थिति कर चुके हैं साफ
सरकार में आबकारी महकमा इस समय उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास है। इस मामले में दुष्यंत चौटाला यह साफ कर चुके हैं कि एसईटी ने जो कागजात मांगे थे वे उन्हें मुहैया करवा दिए गए हैं। एसईटी जांच के दायरे से बाहर जाकर कागजात मांग रही है, जिन्हें उपलब्ध करवा सकना तय समय सीमा के अंदर संभव नहीं है। एक साल के गेट पास के लिए एसईटी ने मांग की है।
अभी तक एसईटी को आबकारी महकमे से एक भी कागज नहीं दिया गया है। इस मामले में टीसी गुप्ता ने दोबारा सरकार को चिट्ठी लिखी है। मैं इस पूरे प्रकरण में एसईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा हूं।
- अनिल विज गृह मंत्री, हरियाणा
अभी तक एसईटी को आबकारी महकमे से एक भी कागज नहीं दिया गया है। इस मामले में टीसी गुप्ता ने दोबारा सरकार को चिट्ठी लिखी है। मैं इस पूरे प्रकरण में एसईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा हूं।
- अनिल विज गृह मंत्री, हरियाणा