चंडीगढ़ में शराब के दाम 20 फीसद बढ़े, 1 अप्रैल से लागू होगी नई आबकारी नीति
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चंडीगढ़ में शराब के दाम में 20 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया है। नई एक्साइज पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू हो रही है। इस फैसले से प्रशासन के खजाने में हर साल शराब बिक्री से आने वाला राजस्व बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष में 510 करोड़ से अधिक का राजस्व आने की उम्मीद है।
इसके बावजूद शराब के रेट बढ़ा दिए। अब चर्चा है कि जब रेवेन्यू अच्छा-खासा आ रहा है तो शराब के दाम बढ़ाने की क्या जरूरत थी। यह जगजाहिर है कि पंजाब में शराब के दाम काफी ऊंचे हैं। हरियाणा भी पीछे नहीं है।
चंडीगढ़ में शराब सस्ती होने के कारण पंजाब की लिकर लॉबी को घाटा सहना पड़ रहा था। इससे शंका जाहिर की जा रही है कि चंडीगढ़ में दाम बढ़ने के पीछे कहीं पंजाब की लिकर लॉबी तो नहीं। हालांकि इस मुद्दे पर अधिकारियों ने बातचीत करने के लिए मना कर दिया है। लेकिन शराब के खिलाफ लड़ रहे लड़ाई के नायक तो यही मानते हैं।
एराइव सेव संस्था के संस्थापक हरमन सिद्धू का कहना है कि सरकार और प्रशासन एक्साइज पॉलिसी ट्रेडर्स से राय शुमारी के बाद ही तय करती है। पंजाब में शराब से जुड़े कई व्यापारियों का व्यवसाय चंडीगढ़ में भी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है।
20 से 25 प्रतिशत तक की हो जाएगी बढ़ोतरी
भारत में बनी विदेशी शराब और देशी शराब के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। प्रशासन ने पॉलिसी में देशी शराब पर एक्साइज ड्यूटी 17 प्रतिशत और भारत में निर्मित विदेशी शराब पर 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। इस बार प्रशासन ने ठेकों की संख्या भी बढ़ाकर 93 से 98 कर दी है। पहली बार ठेकों की अलॉटमेंट में पारदर्शिता लाने के लिए ई-टेंडरिंग के जरिए इनकी अलॉटमेंट करने का फैसला लिया है। नई एक्साइज पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू होगी। ठेकों की अलॉटमेंट के बाद ही सही रेट्स निर्धारित होंगे।
हाई लेवल मीटिंग में नई आबकारी नीति को दी मंजूरी
शुक्रवार को प्रशासक वीपी सिंह की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग में नई आबकारी नीति को मंजूरी दी गई। सूत्रों की माने तो पंजाब में शराब के रेट अधिक हैं। यहां के शराब माफियाओं के दबाव के चलते चंडीगढ़ प्रशासन ने यहां भी रेट बढ़ा दिए हैं। बताते चलें कि बीते साल तत्कालीन डीसी अजीत बाला जोशी से पंजाब की लिकर लॉबी पर नकेल कसने के चलते एक्साइज डिपार्टमेंट छीन लिया गया था। इसको लेकर हरियाणा द्वारा आपत्ति भी जताई गई थी।
600 करोड़ का रखा लक्ष्य
प्रशासन ने 2019-20 वित्तीय वर्ष में शराब से 600 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। वहीं 31 मार्च को खत्म हो रहे मौजूदा वित्तीय वर्ष में शराब की बिक्री से सरकार के खजाने में 510 करोड़ से अधिक का राजस्व आने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक 510 करोड़ रुपये का राजस्व बीते साल आए राजस्व से करीब 12 फीसदी अधिक है, जिससे उत्साहित होकर सरकार ने 18 फीसदी की बढ़ोतरी प्रस्तावित कर नए वित्त वर्ष में छह सौ करोड़ रुपये शराब की बिक्री से कमाने का लक्ष्य रखा है।
मीटिंग में देसी व अंग्रेजी शराब की बिक्री का कोटा बढ़ाने के साथ ही इसे महंगा भी किया गया है। चुनावी वर्ष में सरकार को शराब की खपत अधिक होने की उम्मीद है। इसके चलते शहर में शराब के ठेकों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। ठेकों की संख्या 93 से बढ़ाकर 98 कर दी गई है।