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पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ के सभी केमिस्टों के लाइसेंस की होगी जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 03 May 2017 09:45 AM IST
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- फोटो : File Photo
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पंजाब में करोड़ों के नशे के कारोबार को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान मंगलवार को हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी केमिस्टों के लाइसेंस चेक करने के आदेश जारी किए। हाईकोर्ट ने यह आदेश सुनवाई के दौरान उस समय जारी किया जब इस केस में अदालत का सहयोग कर रहे एडवोकेट नवकिरण सिंह ने कोर्ट में बताया कि अधिकतर केमिस्ट अपने लाइसेंस अन्य लोगों को किराए पर दे देते हैं या बेच देते हैं। इस तरह लाइसेंस किराए पर लेकर या खरीदकर कई लोग केमिस्ट की दुकानें चला रहे हैं, जबकि ऐसे लोगों को दवाओं की पूरी जानकारी भी नहीं होती। इसलिए इनकी जांच करना जरूरी हो गया है।
एडवोकेट नवकिरण ने चंडीगढ़ के एक केमिस्ट के बारे में जानकारी देते हुए कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी करे कि केवल लाइसेंसधारी ही दवा की दुकान चला सकता है। लाइसेंस पर धारक की फोटो होनी चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केमिस्टों को लाइसेंस जांचने के आदेश जारी कर दिए।
इससे पहले, इस केस में सीबीआई ने मंगलवार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद रूप में हाईकोर्ट को सौंप दी। सीबीआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विदेश में रह रहे दो तस्करों के बारे में पंजाब सरकार जानकारी नहीं दे रही है।
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इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने ड्रग्स पर लगाम लगाने के लिए टास्क फोर्स बनाई है तो क्यों इन तस्करों की जानकारी नहीं दी जा रही है? महज टास्क फोर्स बनाकर अपने पंख इतने भी मत फैलाओ कि मुख्य मुद्दे पर भी ध्यान न दिया जा सके। सीबीआई को इन तस्करों की जानकारी दी जाए ताकि इन तस्करों को प्रत्यर्पण के जरिये वापस लाया जा सके।
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एडवोकेट नवकिरण ने चंडीगढ़ के एक केमिस्ट के बारे में जानकारी देते हुए कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी करे कि केवल लाइसेंसधारी ही दवा की दुकान चला सकता है। लाइसेंस पर धारक की फोटो होनी चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केमिस्टों को लाइसेंस जांचने के आदेश जारी कर दिए।
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इससे पहले, इस केस में सीबीआई ने मंगलवार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद रूप में हाईकोर्ट को सौंप दी। सीबीआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विदेश में रह रहे दो तस्करों के बारे में पंजाब सरकार जानकारी नहीं दे रही है।
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इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने ड्रग्स पर लगाम लगाने के लिए टास्क फोर्स बनाई है तो क्यों इन तस्करों की जानकारी नहीं दी जा रही है? महज टास्क फोर्स बनाकर अपने पंख इतने भी मत फैलाओ कि मुख्य मुद्दे पर भी ध्यान न दिया जा सके। सीबीआई को इन तस्करों की जानकारी दी जाए ताकि इन तस्करों को प्रत्यर्पण के जरिये वापस लाया जा सके।
'पंजाब सरकार नहीं दे रही तस्करों का पता'
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि अभी उनके पास इन तस्करों की पूरी जानकारी नहीं है। जैसे ही उन्हें उनके बारे में जानकारी मिलेगी, वह तुरंत सीबीआई को सौंप दी जाएगी। इधर, सीबीआई ने सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट सौंपते हुए यह भी कहा कि जब तक कनाडा सरकार को इन तस्करों की पूरी जानकारी नहीं दी जाती, तब तक प्रत्यर्पण संभव नहीं है। तब, हाईकोर्ट ने इस मामले में सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता सहित अन्य को भी निर्देश दिए कि यह जरूरी नहीं कि जिनके बारे में सरकार के पास जानकारी है, वही तस्कर हैं। इनके अलावा भी अन्य स्त्रोतों से ऐसे लोगों की जानकारी जुटाई जानी बेहद जरूरी है, जिनके इस कारोबार में शामिल होने की आशंका है।
पंजाब ने बताया, डी-एडिक्शन केंद्रों पर बनाई विस्तृत नीति
पंजाब सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट को बताया कि राज्य में डी-एडिक्शन और पुनर्वास केंद्रों के लिए एक विस्तृत नीति बनाई गई है। जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। हालांकि इसके साथ ही सरकार ने नीति की पूरी जानकारी हाईकोर्ट को देने के लिए कुछ समय देने की मांग की। हाईकोर्ट ने सरकार को समय देने के साथ ही निर्देश दिए कि सरकार कोशिश करे कि सरकारी नशा छुड़ाओ केंद्रों को तय प्रावधानों के तहत ही चलाया जाए और इसके लिए सरकार रेडक्रॉस सोसाइटी और अन्य अर्द्ध सरकारी संस्थानों की मदद भी ले सकती है। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि प्रदेश के कई जिलों में चल रहे निजी डी-एडिक्शन केंद्रों में नशा पीड़ितों का सही तरीके से इलाज हो रहा है जबकि सरकारी केंद्रों के हालात अच्छे नहीं हैं।
हरियाणा ने नोडल अफसर किया नियुक्त, पंजाब व चंडीगढ़ ने मांगा समय
हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। वहीं, पंजाब और चंडीगढ़ ने नोडल अधिकारी को नियुक्त करने के लिए अदालत से समय दिए जाने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों को अंतिम मौका देते हुए कहा कि अगली सुनवाई से पहले पंजाब-चंडीगढ़ हर हाल में नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर दें।
पंजाब ने बताया, डी-एडिक्शन केंद्रों पर बनाई विस्तृत नीति
पंजाब सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट को बताया कि राज्य में डी-एडिक्शन और पुनर्वास केंद्रों के लिए एक विस्तृत नीति बनाई गई है। जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। हालांकि इसके साथ ही सरकार ने नीति की पूरी जानकारी हाईकोर्ट को देने के लिए कुछ समय देने की मांग की। हाईकोर्ट ने सरकार को समय देने के साथ ही निर्देश दिए कि सरकार कोशिश करे कि सरकारी नशा छुड़ाओ केंद्रों को तय प्रावधानों के तहत ही चलाया जाए और इसके लिए सरकार रेडक्रॉस सोसाइटी और अन्य अर्द्ध सरकारी संस्थानों की मदद भी ले सकती है। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि प्रदेश के कई जिलों में चल रहे निजी डी-एडिक्शन केंद्रों में नशा पीड़ितों का सही तरीके से इलाज हो रहा है जबकि सरकारी केंद्रों के हालात अच्छे नहीं हैं।
हरियाणा ने नोडल अफसर किया नियुक्त, पंजाब व चंडीगढ़ ने मांगा समय
हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। वहीं, पंजाब और चंडीगढ़ ने नोडल अधिकारी को नियुक्त करने के लिए अदालत से समय दिए जाने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों को अंतिम मौका देते हुए कहा कि अगली सुनवाई से पहले पंजाब-चंडीगढ़ हर हाल में नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर दें।