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Loksabha Election: पंजाब में सियासत की विरासत बचाने की जंग में उलझे कई धुरंधर, दांव पर भगवंत मान की भी साख
Fri, 17 May 2024 02:09 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 17 May 2024 02:09 PM IST
सार
सूबे की सियासत पर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों प्रकाश सिंह बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह का दशकों तक दबदबा रहा है। बादल व कैप्टन परिवारों की सियासी विरासत के आगे बढ़ने पर पहली बार सवालिया निशान लग रहा है।
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हरसिमरत कौर बादल और परनीत कौर।
- फोटो : फाइल
विस्तार
पंजाब के लोकसभा चुनाव में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों प्रकाश सिंह बादल व कैप्टन अमरिंदर सिंह के परिवारों की विरासत और वर्तमान मुख्यमंत्री भगवंत मान की साख दांव पर है।
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सीएम मान पिछले दो आम लोकसभा चुनाव में मैदान में थे, लेकिन इस बार मान पार्टी के खेवनहार की भूमिका हैं और विरोधियों की कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं । सीएम मान के सामने अपनी सियासत को नई धार देकर आगे बढ़ाने की चुनौती है।
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आप की सियासी राजधानी संगरूर के अलावा उनके करीबी दोस्त कर्मजीत अनमोल की फरीदकोट सीट के अलावा बठिंडा, जालंधर सीधे उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई हैं। सीएम मान की नजर लुधियाना, फतेहगढ साहिब, होशियारपुर पर भी है। लोकसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करके सीएम मान, पार्टी के भीतर व सियासत में अपना कद ऊंचा करना चाहते हैं। हालांकि बहुकोणीय मुकाबले नई तस्वीर का खाका खींच सकते हैं।
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बादल और कैप्टन परिवार की महिलाएं मैदान में
बादल और कैप्टन परिवारों से नारी शक्ति (जो वर्तमान में सांसद हैं) चुनाव मैदान में हैं और यह चुनाव केवल उनकी हार जीत का फैसला नहीं करेगा बल्कि सियासी बिसात पर बादल व कैप्टन परिवार की विरासत के कायम रहने या नहीं रहने का निर्णय भी करेगा। कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर पटियाला सीट से पहली बार भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं और हरसिमरत कौर बादल बठिंडा सीट पर पहली बार भाजपा से गठबंधन के बगैर चुनाव मैदान में डटीं हैं ।
परनीत पर दारोमदार
कैप्टन परिवार से अकेली परनीत कौर, सांसद हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह, पटियाला से 2022 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। कैप्टन परिवार से उनकी माता मोहिंदर कौर, राज्यसभा सदस्य रहने के अलावा पटियाला से सांसद रही हैं। कैप्टन भी सांसद रहे और विधानसभा के चुनाव जीतते रहे हैं। उनकी पत्नी परनीत कौर लगातार सांसद रही हैं। बेटी जयइंदर कौर भाजपा में सक्रिय हैं। पटियाला के शाही परिवार की सियासी विरासत को कायम रखने का पूरा दारोमदार परनीत कौर पर है। उनकी बेटी पूरी तरह से सक्रिय हैं, लेकिन खुद कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनाव में दिखाई नहीं दे रहे हैं। कांग्रेस के डाॅ. धर्मवीर गांधी और किसान संगठनों का विरोध शाही परिवार की विरासत के आगे बढ़ने में रुकावट बनता प्रतीत हो रहा है।
हरसिमरत चौथी बार मैदान में
बादल परिवार के पांच सदस्य लंबे समय से लोकसभा व विधानसभा में प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। खुद पूर्व मुख्यमंत्री महरूम प्रकाश सिंह बादल, उनके भाई महरूम गुरदास सिंह बादल, बेटे सुखबीर सिंह बादल, भतीजे मनप्रीत सिंह बादल और पुत्रवधू हरसिमरत कौर बादल, पिछले कई दशकों से लोस व विस में नुमाइंदगी करते आ रहे हैं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बादल, मनप्रीत सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल पिछला विधानसभा 2022 चुनाव हार गए थे। सुखबीर बादल, वर्तमान सांसद जरूर हैं, लेकिन इस बार चुनाव मैदान में नहीं हैं।
बादल परिवार से एकमात्र चेहरा सांसद हरसिमरत कौर बादल ही चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में बादल परिवार के लिए अपनी विरासत को कायम रखने के लिए हरसिमरत कौर बादल की जीत से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा। सुखबीर बादल के समक्ष अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के जरिए ही बादल परिवार की विरासत को कायम रखने का अवसर है। लिहाजा अपनी पत्नी की जीत सुनिश्चित करने के लिए सुखबीर बादल बठिंडा पर खास तवज्जो दे रहे हैं और छोटे से छोटे फैक्टर को अकाली दल के पक्ष में करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। भाजपा का अलग से चुनाव लड़ने और लेकिन मलूका परिवार के भाजपा में जाने से पैदा हुए सियासी हालात से बादल परिवार को कड़ी चुनौती मिल रही है।