सोलन हादसाः चार माह बाद रिटायर होने थे 30 साथी, सूबेदार बलविंदर की भी गई जान, बेटे ने दी मुखाग्नि
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रामबीर कॉलोनी निवासी असम राइफल में तैनात सूबेदार बलविंदर सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर दो बजे उनके घर पहुंचा। बलविंदर सिंह सोलन स्थित एक बिल्डिंग के गिर जाने से उसके मलबे में दब गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
यहां स्वर्ग आश्रम में उनका अंतिम संस्कार सेना के जवानों ने सलामी देकर करवाया। जिला प्रशासन की तरफ से तहसीलदार कर्ण सिंह पहुंचे और शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। बलविंदर सिंह को उनके नौ वर्षीय बेटे जतिन ने मुखाग्नि दी। बलविंदर सिंह की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
बता दें कि रामबीर कॉलोनी निवासी 48 वर्षीय बलविंदर सिंह असम राइफल में सूबेदार के पद पर तैनात थे। इस समय वह हेडक्लर्क का काम देख रहे थे। रविवार शाम को वह सोलन के एक रेस्टोरेंट में अपने अन्य साथियों के साथ बैठकर चाय पी रहे थे। इसी दौरान बिल्डिंग गिर गई। सभी जवान नीचे दब गए। इनमें से 13 जवानों की मौत हो गई।
मरने वालों में बलविंदर सिंह भी शामिल थे। मंगलवार दोपहर बाद लगभग दो बजे उनका शव तिरंगे में लिपटा उनके घर पहुंचा। यहां सैकड़ों लोगों ने बलविंदर सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कॉलोनी के शमशानघाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हिसार से सेना के नायक सूबेदार डिंपल कुमार ने उनकी पत्नी मोनिका को तिरंगा सौंपा किया।
बलविंदर सिंह अपने पीछे पत्नी मोनिका, बड़ी बेटी रोहिणी, छोटी बेटी कुसुम तथा एक बेटे जतिन को छोड़ गए हैं। रोहिणी 12वीं कक्षा में और कुसुम 8वीं कक्षा में तथा जतिन पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। सोलन से उनका शव असम राइफल में तैनात हवलदार रामभज लेकर पहुंचे थे।
रामभज ने बताया कि बलविंदर सिंह बहुत ही बहादुर अधिकारी थे। चार महीने बाद ही रिटायर होने वाले थे। बलविंदर तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई परविंदर लुधियाना में दुकान चलाते हैं, जबकि छोटे भाई मुकेश मजदूरी का काम करते हैं।
छुट्टी में बच्चों को लेकर गए थे साथ
जून में जब बच्चों की छुट्टियां हुई तो बलविंदर सिंह अपने छोटे भाई परविंदर से कहकर पत्नी और बच्चों को अपने पास शिमला बुलाया था। यहां उन्होंने अपने परिवार को कई दिन रखा और पूरे शिमला व सोलन की सैर करवाई। इसके बाद 15 दिन पहले बलविंदर अपने परिवार को लेकर घर पहुंचे थे। घर पर वह छह दिन रहे। इसके बाद अपनी ड्यूटी पर लौट गए।
बेटे को भी सेना में भेजने का था सपना
बलविंदर के भाई परविंदर ने बताया कि वह मूलरूप से बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं। चार साल पहले ही बलविंदर ने जींद में मकान खरीदा था और यहां रहने लगे थे। वह अपनी बड़ी बेटी रोहिणी की दो-तीन वर्ष में शादी करने की बात कहते थे। बलविंदर का सपना था कि बेटे जतिन को भी सेना में भेजें। वह बेटे को सेना की कोचिंग के लिए कहीं बाहर भेजने वाले थे।
पुराने साथियों के साथ मना रहे थे पिकनिक
बलविंदर का शव लेकर जींद पहुंचे असम राइफल के हवलदार रामभज ने बताया कि साहब अपने पुराने साथियों के साथ पिकनिक मना रहे थे। उनकी बटालियन के लगभग 30 लोग ऐसे थे जो एक साथ सेना में भर्ती हुए थे और चार-पांच महीने बाद ही रिटायर होने वाले थे। सभी साथियों ने सोचा कि वह कई वर्षों बाद एक साथ इकट्ठे हुए हैं, इसलिए आज के दिन पिकनिक मनाएंगे।
इसलिए वह रेस्टोरेंट में गए थे। सभी ने चाय का ऑर्डर किया था लेकिन साहब चाय नहीं पीते थे, इसलिए वह अपने साथियों के साथ बैठे थे। साहब 28 वर्ष पहले असम राइफल में भर्ती हुए थे। इस समय वह सूबेदार के पद पर तैनात थे और हेड क्लर्क का काम देख रहे थे।