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अब लिडार से पूरे चंडीगढ़ की होगी लेजर स्कैनिंग, ये होंगे फायदे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 14 Feb 2017 01:28 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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प्रशासन ने पूरे शहर की लिडार टेेक्नोलॉजी से रियल टाइम फोटोग्रॉफी कराने की तैयारी कर ली है। इसके लिए जारी टेंडर को सोमवार खोला गया, लेकिन एक ही एजेंसी ने इसके लिए आवेदन किया है। जिस कारण इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट फिर से इसका टेंडर जारी करेगा।
देश के चुनिंदा शहरों ने ही लिडार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। इस टेेक्नोलॉजी में पूरे शहर की रियल टाइम फोटोग्रॉफी की जाएगी। जो ज्योग्रॉफिक इंफोर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) की मैपिंग में भी काम आएगी। सोमवार को एडवाइजर परिमल राय ने अधिकारियों की मीटिंग बुलाकर लिडार तकनीक पर चर्चा भी की।
क्या है लिडार तकनीक
एयरबोर्न और टेरेस्टेरियल लिडार के दो प्रकार होते हैं। एयरबोर्न में प्लेन से लेजर स्कैनिंग की मदद से 3डी इमेज ली जाती है। इसमें बिल्डिंग, सड़क और अन्य चीजों की रियल टाइम इमेज ली जा सकती है। डिजिटल मूल्यांकन में एयरबोर्न को विस्तृत और सटीक मैथड माना जाता है। वहीं टेरेस्टेरियल लिडार में जमीन पर किसी बस के माध्यम से लेजर स्कैनिंग से रिफ्लेक्शन कर फोटो ली जाती हैं।
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देश के चुनिंदा शहरों ने ही लिडार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। इस टेेक्नोलॉजी में पूरे शहर की रियल टाइम फोटोग्रॉफी की जाएगी। जो ज्योग्रॉफिक इंफोर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) की मैपिंग में भी काम आएगी। सोमवार को एडवाइजर परिमल राय ने अधिकारियों की मीटिंग बुलाकर लिडार तकनीक पर चर्चा भी की।
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क्या है लिडार तकनीक
एयरबोर्न और टेरेस्टेरियल लिडार के दो प्रकार होते हैं। एयरबोर्न में प्लेन से लेजर स्कैनिंग की मदद से 3डी इमेज ली जाती है। इसमें बिल्डिंग, सड़क और अन्य चीजों की रियल टाइम इमेज ली जा सकती है। डिजिटल मूल्यांकन में एयरबोर्न को विस्तृत और सटीक मैथड माना जाता है। वहीं टेरेस्टेरियल लिडार में जमीन पर किसी बस के माध्यम से लेजर स्कैनिंग से रिफ्लेक्शन कर फोटो ली जाती हैं।
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पहले एरियल व्यू पर खर्चे सात करोड़
चंडीगढ़ मौसम
- फोटो : amar ujala
लिडार के फायदे
लिडार से रियल टाइम पिक्चर का डाटा एकत्र होगा। जिससे जीआईएस मैप तैयार होगा। इससे चंडीगढ़ की वर्तमान वास्तविक स्थिति पता चल जाएगी। ऐसे में कहीं भी कोई अतिक्रमण होता है तो उसका पता चल जाएगा। इसके अलावा शहर में किसी भी बदलाव की प्रशासन को तुरंत सूचना मिल जाएगी।
पहले एरियल व्यू पर खर्चे सात करोड़
इससे पहले प्रशासन ने एरियल व्यू यानी ड्रोन के माध्यम से डिजिटल डाटा जुटाया है। ड्रोन से सेक्टर-7 और करीब 7 गांव की फोटो ली गई है। अभी दूसरी जगहों पर एरियल व्यू का काम चल रहा है। ड्रोन खरीदने में प्रशासन ने लगभग 7 करोड़ रुपये खर्चे हैं। अब लिडार टेक्नोलॉजी को भी अपनाने की तैयारी है। टैंडर फाइनल होने के बाद ही इसके चंडीगढ़ में खर्च का पता चलेगा।
लिडार से रियल टाइम पिक्चर का डाटा एकत्र होगा। जिससे जीआईएस मैप तैयार होगा। इससे चंडीगढ़ की वर्तमान वास्तविक स्थिति पता चल जाएगी। ऐसे में कहीं भी कोई अतिक्रमण होता है तो उसका पता चल जाएगा। इसके अलावा शहर में किसी भी बदलाव की प्रशासन को तुरंत सूचना मिल जाएगी।
पहले एरियल व्यू पर खर्चे सात करोड़
इससे पहले प्रशासन ने एरियल व्यू यानी ड्रोन के माध्यम से डिजिटल डाटा जुटाया है। ड्रोन से सेक्टर-7 और करीब 7 गांव की फोटो ली गई है। अभी दूसरी जगहों पर एरियल व्यू का काम चल रहा है। ड्रोन खरीदने में प्रशासन ने लगभग 7 करोड़ रुपये खर्चे हैं। अब लिडार टेक्नोलॉजी को भी अपनाने की तैयारी है। टैंडर फाइनल होने के बाद ही इसके चंडीगढ़ में खर्च का पता चलेगा।