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Punjab: दिवाली पर पंजाब की मंडियों में पहुंची 4.7 लाख मीट्रिक टन धान, जाली बुकिंग का अंदेशा, होगी जांच

Tue, 14 Nov 2023 11:15 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 Nov 2023 11:15 AM IST
सार

पंजाब और हरियाणा में धान की फसल पर एमएसपी मिलती है, जबकि अन्य राज्यों में ऐसा नहीं है। ऐसे में इस कारोबार से जुड़े लोग मोटा मुनाफा कमाने के लिए बाहरी राज्यों से धान खरीद कर ले आते हैं। साथ ही उन्हें फर्जी बुकिंग के माध्यम से बेचकर मोटा मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं।

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Large number of paddy crops reaching grain markets of Punjab, fake booking Suspicion
पंजाब की मंडियों में पहुंच रही अधिक धान - फोटो : File

विस्तार

पंजाब की अनाज मंडियों में पिछले कुछ दिन से काफी संख्या में धान की फसल पहुंच रही है। रविवार को दिवाली की छुट्टी वाले दिन भी सूबे की मंडियों में 4.7 लाख मीट्रिक टन धान पहुंची है। अंदेशा जताया जा रहा है कि ऐसा जाली बुकिंग की वजह से हो रहा है।

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लुधियाना के डीसी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी एसडीएम और आरओ को पत्र लिखकर हिदायत दी है कि वह निजी तौर पर मंडियों में जाएं। वीडियोग्राफी के माध्यम से सेंटरों और मंडियों में पड़ी धान की 11 से 13 नवंबर तक तीन दिन में हुई बुकिंग से मिलान करें ताकि इस मामले की हकीकत को सामने लाया जा सके।
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पंजाब-हरियाणा में धान पर मिलती है एमएसपी
जानकारी के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में धान की फसल पर एमएसपी मिलती है, जबकि अन्य राज्यों में ऐसा नहीं है। ऐसे में इस कारोबार से जुड़े लोग मोटा मुनाफा कमाने के लिए बाहरी राज्यों से धान खरीद कर ले आते हैं। साथ ही उन्हें फर्जी बुकिंग के माध्यम से बेचकर मोटा मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं। यह मामला कई बार किसान जत्थेबंदियां भी सरकार व मंडी बोर्ड के सामने उठा चुकी हैं। दिवाली वाले दिन राज्य की मंडियों में 4.7 लाख मीट्रिक टन धान पहुंची है, जबकि इस दिन छुट्टी होती है। इस समय गेहूं की बिजाई का समय शुरू हो चुका है। 15 दिन से गेहूं की बिजाई की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सरकार ने इस मामले को गंभीरता लिया है। साथ ही सारे मामले की पड़ताल करने का फैसला लिया है।


किसानों के हितों की रक्षा होगीः रणबीर सिंह
भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल नेता रणबीर सिंह का कहना है कि अगर सरकार अब चेकिंग करवाने जा रही है तो एक अच्छा कदम है। इससे किसानों के हितों की रक्षा होगी। इस कारोबार में जुड़े लोग कई स्तर पर खेल करते हैं।

ऐसे होता है खेल
किसान नेताओं की माने तो जाली बुकिंग कई तरह से होती है। इस कारोबार में कुछ आढ़ती व शेलर मालिक खेल करते हैं। वह बाहरी राज्यों से कम दामों पर धान की खरीद कर ले आते हैं। किसानों का रिकॉर्ड उनके पास रहता है। फिर वह फर्जी आईडी बनाकर यह खेल करते हैं। प्रत्येक एकड़ के लिए फसल का उत्पादन तय है। अगर किसान का उससे कम है, तो वहां फायदा उठाते हैं। इसके अलावा जिस जमीन पर बिजाई नहीं की जाती है। वह उस का रिकॉर्ड तक दिखाकर खेल करते हैं। इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

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