फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Langar Baba, the messiah who fed the poor, is no more

गरीबों का पेट भरने वाले मसीहा लंगर बाबा नहीं रहे

Tue, 30 Nov 2021 02:24 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 30 Nov 2021 02:24 AM IST
विज्ञापन
Langar Baba, the messiah who fed the poor, is no more
लंगर बाबा के नाम से मशहूर पद्मश्री जगदीश लाल आहूजा के अंतिम संस्कार के दौरान उनके पार्थिव शरीर को - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। पीजीआई के बाहर लंगर लगाकर गरीबों का पेट भरने वाले मसीहा पद्मश्री जगदीश लाल आहूजा लंगर बाबा (85) नहीं रहे। वह काफी समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। सोमवार सुबह पीजीआई में उन्होंने अंतिम सांस ली। अपराह्न साढ़े तीन बजे सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे गिरीश आहूजा ने मुखाग्नि दी।
विज्ञापन

लंगर बाबा ने लोगों का पेट भरने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। 40 वर्षों से लगातार पीजीआई के सामने वह लंगर लगा रहे थे। यही नहीं जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 के सामने भी वह लंगर सेवा करते थे। इस दौरान उन्होंने अपनी करोड़ों की संपत्ति लोगों का पेट भरने के लिए लगा दी। उनकी इस सेवा को देखते हुए वर्ष 2020 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।
विज्ञापन

सेक्टर-23 निवासी लंगर बाबा कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। रविवार रात लगभग दो बजे उन्हें तकलीफ हुई तो परिजन पीजीआई लेकर पहुुंचे। डॉक्टरों ने दवा देने के बाद सबकुछ ठीक बताया। इसके बाद परिजन उन्हें घर ले आए। सोमवार सुबह लगभग सात बजे फिर तबीयत बिगड़ गई। परिजन फिर उन्हें पीजीआई लेकर पहुंचे। इस बार डॉक्टरों ने परिजनों को जवाब दे दिया। अपराह्न साढ़े तीन बजे सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में उनका दाह संस्कार किया गया। लंगर बाबा की दो बेटियां भी हैं। दोनों की शादी हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सोमवार को भी चला लंगर, केले के बड़े व्यवसायी थे लंगर बाबा
तबीयत खराब होने पर लंगर बाबा की आढ़त पर काम करने वालों ने उनके लंगर को संभाल लिया था। सोमवार को उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद लंगर जारी रहा। बता दें कि जगदीश लाल आहूजा लंगर बाबा ने पटियाला में गुड़ और फल बेचकर अपना जीवनयापन शुरू किया। 1956 में लगभग 21 साल की उम्र में वह चंडीगढ़ आ गए। उस समय चंडीगढ़ को देश का पहला योजनाबद्ध शहर बनाने की योजना बनाई जा रही थी। यहां आकर उन्होंने एक फल की रेहड़ी किराए पर लेकर केले बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे वह यहां स्थापित हो गए और सेक्टर-26 मंडी में उनका फलों का अच्छा-खासा कारोबार चल पड़ा। वह केले के बड़े व्यवसायी भी थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed