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लद्दाक और चंबे की कढ़ाई वाली शॉल कड़ाके की ठंड में भी करा रही गर्मी का एहसास

Thu, 23 Dec 2021 02:57 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 23 Dec 2021 02:57 AM IST
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Ladakh and Chamba embroidered shawls are feeling the heat even in the cold winter
चंडीगढ़। कड़ाके की ठंड में गर्मी का एहसास लेने के लिए लोग लद्दाख के याक के बालों से तैयार शॉल की खरीदारी कर रहे हैं। सेक्टर-15 स्थित लाला लाजपत भवन में लगाए कुल्लू फेस्ट में पशमीना लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।
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लोगों का कहना है कि इस शॉल से हाड़ कंपाती ठंड में भी राहत मिल रही है। इसके साथ ही चंबे की रेशमी कढ़ाई वाली शॉल की भी काफी मांग है। वहीं खरगोश के बालों (अंगोरा) से बनाए स्टॉल और मोजे भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि एक बार खरीदारी करने वाले लोग दोबारा भी फेस्ट में आ रहे हैं।
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कुछ दिनों पहले यहां से लद्दाख की शॉल खरीद चुकी सेक्टर-15 की ही संगीता सेन बुधवार को दूसरी बार फेस्ट में आई थीं। उनका कहना है कि शॉल बहुत आरामदायक है, अब अपनी बेटी के लिए अंगोरा के मोजे और स्टॉल लेने आई हूं, क्योंकि उसे सुबह-सुबह ही कॉलेज जाना पड़ता है। ऐसे में इनसे उसे काफी राहत मिलेगी। लद्दाख की शॉल की कीमत दो से पांच हजार रुपये है। वहीं चंबे की कढ़ाई वाली शॉल 4 से 10 हजार रुपये की रेंज में उपलब्ध है।
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शॉलों के रखरखाव का झंझट नहीं
फेस्ट के संचालक राजकुमार ने बताया कि पशमीना शॉल के रख-रखाव को लेकर थोड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है, लेकिन लद्दाख की शॉल उपयोग करने में जितनी आरामदायक है, रखरखाव में भी उतनी ही आसान है। इसे घर पर ही धोया जा सकता है। वहीं चंबे की कढ़ाई वाली डिजाइनर शॉल में धुलाई के दौरान इस बात का ध्यान रखना होता है कि इसे हल्के हाथों से ही साफ करें, अन्यथा उसके रेशमी धागे उधड़ सकते हैं। धोने के बाद किसी भी शॉल का निचोड़े नहीं। ड्रायर में सुखाने के बाद तत्काल प्रेस करें, इससे उसकी चमक बरकरार रहती है। ठंड के बाद उसे रखते वक्त पेपर में तह करें। बरसात में एक बार धूप जरूर दिखाएं। फिनायल की गोली सीधे तौर पर न डालें।
बॉक्स
आकर्षण अभी और भी हैं
फेस्ट में शॉल के अलावा वूलेन सूट, शर्ट, पैंट, जैकेट की भी ढ़ेरों वैरायटी है। इसके लिए कपड़े के साथ ही रेडीमेट आइटम भी एक हजार से 4 हजार की रेंज में उपलब्ध हैं। वहीं कश्मीरी सूट, फाइन जैकेट, कश्मीरी फेरन, वूलेन चादर, भेड़, लैंप और खरगोश के बाल से बनाये गये मोजे की भी खास मांग है। जिसकी कीमत 200 रुपये से 600 रुपये तक है। ये सभी आइटम बच्चों के लिए भी अलग-अलग रंग और डिजाइन में पेश किये गये हैं।

कोट- ग्राहकों की पसंद के साथ ही उनके आराम को भी ध्यान में रखकर शॉल या अन्य उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। कुल्लू की पशमीना के साथ ही चंबे की कढ़ाई वाली और लद्दाक की याक के बालों से बनाई गई शॉल सबसे ज्यादा पसंद की जा रही है।
राजकुमार, संचालक कुल्लू फेस्ट
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