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कोहेनूर हीरा: SC में केंद्र की दलील से महाराजा दलीप सिंह ट्रस्ट नाराज
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 19 Apr 2016 07:28 PM IST
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कोहिनूर हीरे को लेकर महाराजा रंजीत सिंह ट्रस्ट का बयान
- फोटो : फाइल फोटो
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कोहेनूर हीरे को लेकर केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर बयान को महाराजा दलीप सिंह मेमोरियल ट्रस्ट ने गैर जिम्मेदाराना करार दिया है। ट्रस्ट के प्रधान रंजीत सिंह तलवंडी, चेयरमैन प्रो गुरभजन सिंह गिल, एवं सचिव परमिंदर सिंह जट्टपुरी ने इस मुददे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया है।
इनका तर्क है कि लूटा नहीं बल्कि उपहार में दिया गया था। केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से देश की सर्वोच्च अदालत में दी गई दलील में कोई दम नहीं है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का दावा है कि कोहेनूर हीरा पंजाबियों के अंतिम महाराजा दलीप सिंह के पिता एवं शेरे पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की विरासती निशानी है, जोकि आगे उपहार के तौर पर नहीं दी गई थी। बल्कि महाराजा दलीप सिंह जोकि उस वक्त खुद बाल अवस्था में थे, अंग्रेसी साम्राज्य ने उनको बहला फु सला कर कोहेनूर को हासिल किया था।
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इनका तर्क है कि लूटा नहीं बल्कि उपहार में दिया गया था। केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से देश की सर्वोच्च अदालत में दी गई दलील में कोई दम नहीं है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का दावा है कि कोहेनूर हीरा पंजाबियों के अंतिम महाराजा दलीप सिंह के पिता एवं शेरे पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की विरासती निशानी है, जोकि आगे उपहार के तौर पर नहीं दी गई थी। बल्कि महाराजा दलीप सिंह जोकि उस वक्त खुद बाल अवस्था में थे, अंग्रेसी साम्राज्य ने उनको बहला फु सला कर कोहेनूर को हासिल किया था।
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पंजाबियों की विरासती दस्तार की शान भी था कोहिनूर हीरा
कोहिनूर हीरे को लेकर महाराजा रंजीत सिंह ट्रस्ट का बयान
- फोटो : फाइल फोटो
ट्रस्ट का कहना है कि कोहेनूर हीरा सिर्फ कीमती ही नहीं, बल्कि पंजाबियों की विरासती दस्तार की शान भी था। इसे वापस लाना हमारी शारीरिक या आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि आत्मिक जरूरत है। ट्रस्ट के नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसी दलीलें नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोहेनूर सामान नहीं सम्मान है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोहेनूर हीरा धोखे से ले जाने एवं फिर नाटकीय ढंग से लार्ड डलहौजी द्वारा महारानी विक्टोरिया को गिफ्ट कराने एवं कुछ वक्त बाद कोहेनूर गुम होने से पीड़ित महाराजा दलीप सिंह ने उस वक्त अंग्रेजों को पत्र लिख कर नाराजगी जताई थी, ऐसे सबूतों को आधार बनाने की जरूरत है।
पदाधिकारियों ने क नाडा सरकार की ओर से पंजाबियों के सम्मान की उदाहरण देकर समझाया कि विदेशों में बस रहे पंजाबियों ने अपना दबाव बना कर कामागाटामारू जैसी दुखांतक घटना की माफी मांगने को मजबूर कर दिया। इससे चाहे कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ, लेकिन सांस्कृतिक स्वाभिमान अवश्य हासिल हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोहेनूर हीरा धोखे से ले जाने एवं फिर नाटकीय ढंग से लार्ड डलहौजी द्वारा महारानी विक्टोरिया को गिफ्ट कराने एवं कुछ वक्त बाद कोहेनूर गुम होने से पीड़ित महाराजा दलीप सिंह ने उस वक्त अंग्रेजों को पत्र लिख कर नाराजगी जताई थी, ऐसे सबूतों को आधार बनाने की जरूरत है।
पदाधिकारियों ने क नाडा सरकार की ओर से पंजाबियों के सम्मान की उदाहरण देकर समझाया कि विदेशों में बस रहे पंजाबियों ने अपना दबाव बना कर कामागाटामारू जैसी दुखांतक घटना की माफी मांगने को मजबूर कर दिया। इससे चाहे कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ, लेकिन सांस्कृतिक स्वाभिमान अवश्य हासिल हुआ है।