यह है चिराग योजना: जिसमें प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं गरीब बच्चे, सरकार भरती है फीस, जानें- एडमिशन की शर्त
चिराग योजना के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में उन विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। अभिभावकों की आय एक लाख 80 हजार रुपये या इससे कम होनी चाहिए।
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हरियाणा सरकार की चिराग योजना का अध्यापक संगठन विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सरकारी स्कूलों को खत्म कर दिया जाएगा। अध्यापकों का कहना है कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को सरकार 500 से 1100 सौ रुपये तक फीस देगी। यह सरकारी संस्थाओं को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। आइए जानते हैं कि हरियाणा सरकार की चिराग योजना क्या है और क्यों चर्चा में है...
यह है चिराग योजना
हरियाणा में 381 निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला स्कूल शिक्षा विभाग चिराग योजना के तहत कर रहा है। इससे पहले यह दाखिले नियम- 134ए के तहत होते थे। अगर हरियाणा सरकार ने नियम- 134 ए खत्म कर चिराग योजना की शुरुआत की है। योजना के तहत कक्षा दूसरी से 5वीं तक प्रति छात्र 700 रुपये, कक्षा छठी से आठवीं तक प्रति छात्र 900 रुपये और कक्षा नौवीं से 12वीं तक प्रति छात्र 1100 रुपये प्रति माह फीस सरकार निजी स्कूलों को देती है।
एक लाख 80 हजार रुपये से कम हो आमदनी
इस योजना के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में उन विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। अभिभावकों की आय एक लाख 80 हजार रुपये या इससे कम हो। आय, परिवार पहचान पत्र की वार्षिक सत्यापित आय से मान्य होगी। यह योजना सिर्फ राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को दाखिला देने के लिए है।
खंड के स्कूल में ही करना होगा आवेदन
चिराग स्कीम के तहत छात्र दाखिले हेतु केवल उसके वर्तमान खंड, जिसमें वह पढ़ रहा है। उसी खंड के मान्यता प्राप्त निजी स्कूल में उपलब्ध सीटों पर दाखिले के लिए पात्र होंगे। खंड में वह एक से अधिक विद्यालयों में भी दाखिले के लिए आवेदन कर सकता है। दाखिले के लिए निजी स्कूलों की कक्षानुसार घोषित सीटों का विवरण विभागीय वेबसाइट पर दर्शाया जाता है। जिस मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय को अभिभावक, छात्र द्वारा दाखिले के लिए आवेदन पत्र दिया जाएगा वह विद्यालय अभिभावक व छात्र को रसीद अवश्य देगा। जिन विद्यालयों में सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं तो ऐसी स्थिति में अभिभावकों की उपस्थिति में ड्रॉ निकाला जाता है।
चिराग स्कीम से जुड़े जरूरी निर्देश