Chandigarh: चंडीगढ़ का नहीं कोई सानी, यहां की हरियाली, वास्तुकला और सुखना लेक की दुनिया दीवानी
चंडीगढ़ का ग्रीन कवर बढ़कर 50.05 फीसदी हो गया है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2021 में ग्रीन कवर 3.80 फीसदी बढ़ गया है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट में ग्रीन कवर 46.25 फीसदी थी, जो 2021 में बढ़कर 50.05 फीसदी हो गया।
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शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसा चंडीगढ़ देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सपनों का शहर है। यह शहर आजादी के बाद से भारत का पहला योजनाबद्ध शहर होने के कारण लोकप्रिय है। गुजरते वर्षों के साथ शहर और जवां होता जा रहा है। हरियाली बढ़ रही है। लोग साइकिल अपना रहे हैं। शहर के वास्तुकला के देखने के लिए विदेश से लोग आ रहे हैं।
फ्रांस में जन्मे स्विस वास्तुकार ली कार्बूजिए की ओर से यह शहर डिजाइन किया गया है। शहर के कैपिटल कांप्लेक्स को यूनेस्को ने हेरिटेज इमारत का दर्जा भी दिया है। कमाल की बात है कि इस शहर में कोई स्टैच्यू नहीं है। योजनाबद्ध तरीके से पूरे देश में सबसे चौड़ी सड़कें हैं। ट्रैफिक को धीमा रखने और डाइवर्ट करने के लिए हर एक से डेढ़ किमी पर चौक बनाए गए हैं।
सड़कों के दोनों तरफ पेड़ लगे हैं। हर सेक्टर की अपनी मार्केट, स्कूल, अस्पताल है। यह शहर मॉडर्न विलेज का एक उदाहरण है। छोटे से शहर में 200 से ज्यादा स्कूल हैं, जिसमें 120 के करीब सरकारी स्कूल हैं। हर स्कूल का अपना ग्राउंड है। डिस्पेंसरी, सिविल अस्पताल, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 के अलावा पीजीआई है। बिजली-पानी व अन्य छोटे कार्यों के लिए हर सेक्टर में संपर्क केंद्र हैं। शादी विवाह समारोह के लिए सरकारी कम्युनिटी सेंटर बने हुए हैं। पार्क और ग्रीन बेल्ट की तो शहर में भरमार है। इसलिए इस शहर की कोई रीस नहीं है।
ऑनलाइन होती व्यवस्थाओं ने हल्का किया लोगों का बोझ
पिछले कुछ साल से प्रशासन के कई विभागों ने डिजिटलीकरण पर जोर दिया है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, एस्टेट ऑफिस, आरएलए, नगर निगम समेत कई विभागों ने अपनी सुविधाओं को ऑनलाइन किया है। इससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने से आजादी मिली है। सीएचबी ने लगभग अपनी सभी सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है। फाइलों को भी ऑनलाइन ही चलाया जा रहा है। एस्टेट ऑफिस में भी नए आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जा रहे हैं। इससे विभागों के कार्यों में पारदर्शिता आई है।
साइकिल ट्रैक से शहर की बनी अलग पहचान
प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने करीब 210 किलोमीटर साइकिल ट्रैक का निर्माण किया है। इस पर करीब 22 करोड़ का कुल खर्च आया है। साइकिल ट्रैक बनाने का काम अभी भी जारी है। साइकिल ट्रैक के इस जाल से चंडीगढ़ की अलग पहचान बनी है। कई लोगों ने गाड़ियों को त्याग कर साइकिल को अपनाया है। दफ्तर आने जाने के लिए कई लोग अब साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा सुबह और शाम के समय कई लोग साइकिल चलाने हुए देखे जा सकते हैं।
सिटी ब्यूटीफुल के साथ ग्रीन सिटी भी चंडीगढ़
चंडीगढ़ का ग्रीन कवर बढ़कर 50.05 फीसदी हो गया है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2021 में ग्रीन कवर 3.80 फीसदी बढ़ गया है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट में ग्रीन कवर 46.25 फीसदी थी, जो 2021 में बढ़कर 50.05 फीसदी हो गया। चंडीगढ़ के लिए यह अच्छा संकेत है। इस रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ का फॉरेस्ट कवर 85 हेक्टेयर बढ़ा है। ओपन फॉरेस्ट एरिया 158 हेक्टेयर बढ़ा है। इसका मतलब यह है कि फॉरेस्ट के अलावा भी शहर में हरियाली बढ़ी है।
इन चुनौतियां से पाना होगा पार
- डंपिंग ग्राउंड: डड्डूमाजरा समेत शहर के लोगों के लिए डंपिंग ग्राउंड किसी नासूर से कम नहीं है।
- यातायात की समस्या: सुबह और शाम को कुछ प्रमुख चौराहों पर जाम की बात आम हो चुकी है। इसमें फंसकर लोगों का रोजाना बुरा हाल होता है।
- अतिक्रमण: अतिक्रमण के मामले में नगर निगम और प्रशासन पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। मार्केट में दुकानदारों ने गलियारों पर कब्जा कर रखा है। हाईकोर्ट भी इस मामले में फटकार लगा चुका है।
- सफाई व्यवस्था: स्वच्छता सर्वेक्षण में चंडीगढ़ के नंबर वन बनाने के दावे सिर्फ पोस्टर-बैनर तक ही सीमित हैं। सेक्टरों की स्थिति ठीक है लेकिन कालोनी और गांव में हालात बेहद खराब है। कई जगह छोटे-छोटे डंपिंग ग्राउंड बन गए हैं।
- लटकते तार, जी का जंजाल: चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी का तमगा मिला हुआ है लेकिन इंडस्ट्रियल एरिया समेत शहर के प्रमुख बाजारों और कॉलोनियों में लटकते तार इस बात की गवाही दे रहे हैं कि स्मार्ट सिटी में सब कुछ व्यवस्थित नहीं है। ये सुंदरता पर धब्बा लगा रहे हैं।