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मजदूरों के लिए फरिश्ता बनकर आया किशन का परिवार
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चंडीगढ़। लॉक डाउन के बाद चंडीगढ़ के कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही है।
इन लोगों की मदद के लिए चंडीगढ़ प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं आगे आ रही हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो न तो प्रशासन से जुड़े हैं और न ही किसी सामाजिक संस्था से। वे इंसानियत के लिए अपने घर से निकल पड़े हैं और जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं।
ऐसे ही एक शख्स धनास के रहने वाले किशन प्रसाद हैं, जो पिछले दो दिन से दोपहर और रात के वक्त 400 लोगों को खाना खिला रहे हैं। हरियाणा डीपीआर में जॉब करने वाले किशन प्रसाद ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि चंडीगढ़ में भी कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें गुजारा करना मुश्किल हो रहा है तो उन्होंने घर पर खाना बनवाया और अपनी गाड़ी में लेकर निकल पड़े।
उन्होंने बताया कि दिन में वे पूड़ी सब्जी बांटते हैं, जबकि रात के वक्त दाल चावल। दिन में 200 और रात में भी 200 लोगों को खाना खिलाते हैं। पहले दिन वे सेक्टर 19 मंदिर पहुंचे तो वहां से पता चला कि सेक्टर-7 के शोरूम में दिहाड़ीदार मजदूर रहते हैं। वहां पहुंचे तो पता चला कि सेक्टर-9 में कई लोग हैं। उन्होंने बताया कि इस काम में उनके बेटे, बहु, पत्नी और बेटी लगी हुई है। उनकी पत्नी ने बताया कि जब तक उनके पास सामान है, तब तक वे जरूरतमंदों को खाना बांटते रहेंगे। मजदूरों ने बताया कि उनके पास जो राशन था, वह खत्म हो चुका है। उन्हें कभी लंगर वाले खाना दे जाते हैं तो कभी कोई।
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इन लोगों की मदद के लिए चंडीगढ़ प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं आगे आ रही हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो न तो प्रशासन से जुड़े हैं और न ही किसी सामाजिक संस्था से। वे इंसानियत के लिए अपने घर से निकल पड़े हैं और जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं।
ऐसे ही एक शख्स धनास के रहने वाले किशन प्रसाद हैं, जो पिछले दो दिन से दोपहर और रात के वक्त 400 लोगों को खाना खिला रहे हैं। हरियाणा डीपीआर में जॉब करने वाले किशन प्रसाद ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि चंडीगढ़ में भी कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें गुजारा करना मुश्किल हो रहा है तो उन्होंने घर पर खाना बनवाया और अपनी गाड़ी में लेकर निकल पड़े।
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उन्होंने बताया कि दिन में वे पूड़ी सब्जी बांटते हैं, जबकि रात के वक्त दाल चावल। दिन में 200 और रात में भी 200 लोगों को खाना खिलाते हैं। पहले दिन वे सेक्टर 19 मंदिर पहुंचे तो वहां से पता चला कि सेक्टर-7 के शोरूम में दिहाड़ीदार मजदूर रहते हैं। वहां पहुंचे तो पता चला कि सेक्टर-9 में कई लोग हैं। उन्होंने बताया कि इस काम में उनके बेटे, बहु, पत्नी और बेटी लगी हुई है। उनकी पत्नी ने बताया कि जब तक उनके पास सामान है, तब तक वे जरूरतमंदों को खाना बांटते रहेंगे। मजदूरों ने बताया कि उनके पास जो राशन था, वह खत्म हो चुका है। उन्हें कभी लंगर वाले खाना दे जाते हैं तो कभी कोई।
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