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'हथियार नहीं, सिखों का धार्मिक प्रतीक है किरपाण'
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 13 Aug 2015 12:26 AM IST
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अंबाला जिला अदालत में किरपाण लेकर पहुंचे अमृतधारी सिख दिलावर सिंह को गवाही देने से रोकने के मामले में हरियाणा सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किरपाण हथियार नहीं, बल्कि यह सिखों का धार्मिक प्रतीक है और उन्हें इसे धारण करने का पूर्ण अधिकार है।
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यह भी स्पष्ट किया गया है कि अदालत में किरपाण ले जाने पर कोई मनाही नहीं है। इस तथ्य के साथ सरकार ने बेंच से आग्रह किया है कि हाईकोर्ट ही इस मामले में कोई फैसला ले। हाईकोर्ट ने किरपाण पर और गहराई से विचार करने की बात कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है। दिलावर सिंह से संबंधित जिला अदालत की प्रक्रिया पर रोक जारी रखी गई है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
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दिलावर सिंह 18 अप्रैल को कत्ल के एक मामले में बतौर मुख्य गवाह बयान दर्ज कराने कोर्ट पहुंचा था, लेकिन अदालत ने कहा था कि जब तक वह किरपाण उतारकर नहीं आएगा, उसके बयान दर्ज नहीं किए जाएंगे। आखिरकार कोर्ट के इस रुख के खिलाफ दिलावर सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
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दिलावर सिंह ने कहा था कि उसे संविधान ने अपने धर्म के मुताबिक किरपाण लेकर चलने का अधिकार दिया है लिहाजा जिला अदालत का आदेश रद्द किया जाना चाहिए। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया था। साथ ही मामले में अगली प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
सरकार की ओर से गृह सचिव सुभाष गोयल ने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 1952 में रेक्स बनाम ध्यान सिंह के केस में यह अधिकार सुरक्षित रखा था।
इसके अलावा कनाडा, अमेरिका व यूके की अदालतों ने भी सिखों को किरपाण धारण करने का अधिकार दिया है। इसे हथियार नहीं, धार्मिक प्रतीक माना गया है। लिहाजा अब इस मामले में हाईकोर्ट ही फैसला कर सकता है।