Kargil Vijay Diwas 2020: वादा कर कारगिल शहीद को भूलीं सरकारें, अब अपने पैसों से स्कूल में पत्नी लगवाएगी मूर्ति
सैनिक की शहादत के बाद उसे केवल एक ही बार सम्मान दिया जाता है। उसके बाद सरकार, प्रशासन, लोग सभी भूल जाते हैं। जनप्रतिनिधि यहां तक भूल जाते हैं कि उनके पड़ोस में एक परिवार ऐसा भी जिसके घर के एक व्यक्ति ने देश पर अपनी जान कुर्बान कर दी। एक बार थोड़ी सी आर्थिक सहायता दी जाती है। उसके बाद परिवार की कोई सुध नहीं लेता।
कारगिल युद्ध को 21 वर्ष बीत चुके हैं। इन सालों में केवल एक बार ही सरकार की ओर से मदद की है। यह दर्द है 22 मई 1999 में कारगिल में दुश्मनों से लड़ते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले हरियाणा के यमुनानगर के मॉडल टाउन कॉलोनी निवासी शहीद नवीन कुमार मेहता की पत्नी डोली मेहता का। डोली मेहता ने बताया कि जब उनके पति शहीद हुए तो उनकी बेटी छह साल और बेटा तीन साल का था।
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वह मात्र 32 साल की थी जब उन्होंने पति को खो दिया। उनकी शहादत पर सरकार की ओर से दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता का एलान किया गया। उन्हें लगा कि सरकार व प्रशासन उनकी व बच्चों की देखरेख करेगा। लेकिन उस दिन के बाद से आज तक कभी किसी ने उनका हाल तक नहीं पूछा।
आंखों में आंसू लिए डोली मेहता ने कहा कि उनके घर से कुछ दूरी पर ही भाजपा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा का घर है। लेकिन वे कभी उनके घर तक नहीं आए, जबकि सैकड़ों बार वे उनके घर के पास से गुजरे हैं। डोली मेहता का कहना है कि सरकार और प्रशासन द्वारा कम से कम शहीदों की कुर्बानी को नहीं भुलाया जाना चाहिए। हर साल विजय दिवस के मौके पर जिलास्तर पर कार्यक्रम कर उन्हें श्रद्धांजलि देनी चाहिए।
स्कूल में स्वयं लगवा रहीं हैं मूर्ति
सरकार भले ही शहीदों के सम्मान का दम भरे लेकिन जिले में इसकी जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। मॉडल टाउन नजदीक सरनी चौक स्थित राजकीय स्कूल का नाम कारगिल शहीद हवलदार नवीन कुमार मेहता की स्मृति में रखा गया है। लेकिन स्कूल में उन्हें कोई जानता नहीं है। बोर्ड पर नाम लिखकर यह औपचारिकता पूरी कर दी गई। ऐसे में डोली मेहता ने बताया कि वे अपनी पति की स्मृति में स्कूल प्रांगण में शहीद हवलदार नवीन मेहता की मूर्ति लगवाएंगी। ताकि 21वीं सदी की नई पीढ़ी को उनके बारे में पता चल सके।