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Chandigarh News: तीन दशक बाद मिला इंसाफ, बिना जांच वेतन वृद्धि रोकना अवैध करार
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-पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के कर्मचारी की याचिका हाईकोर्ट ने की मंजूर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। तीन दशक से अधिक समय बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के एक कर्मचारी के खिलाफ बिना नियमित जांच के कार्रवाई को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश मुख्य दंड है और इसे बिना विस्तृत विभागीय जांच के नहीं दिया जा सकता।
इंदरजीत सिंह ने 1994 में याचिका दाखिल करते हुएए बताया था कि वह पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में लोअर डिवीजन क्लर्क था। उन्हें 14 अगस्त 1989 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। परंतु विभाग ने न तो चार्जशीट दी और न ही कोई नियमित जांच की, सीधे उनकी दो वेतन वृद्धि रोकने का 31 मई 1990 को आदेश जारी कर दिया। इसके बाद पंजाब सरकार के इस फैसले को याची ने चुनौती दी लेकिन फैसला उसके पक्ष में नहीं आया। ऐसे में याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के निर्णयों को गलत ठहराते हुए कहा कि दो वार्षिक वेतन वृद्धि को भविष्य प्रभाव से रोकना एक मुख्य दंड है और ऐसे मामलों में पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड नियम 1971 में निर्धारित विस्तृत प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। चूंकि इस मामले में कोई जांच नहीं हुई, इसलिए आदेश अवैध, शून्य और निरस्त किया जाता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। तीन दशक से अधिक समय बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के एक कर्मचारी के खिलाफ बिना नियमित जांच के कार्रवाई को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश मुख्य दंड है और इसे बिना विस्तृत विभागीय जांच के नहीं दिया जा सकता।
इंदरजीत सिंह ने 1994 में याचिका दाखिल करते हुएए बताया था कि वह पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में लोअर डिवीजन क्लर्क था। उन्हें 14 अगस्त 1989 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। परंतु विभाग ने न तो चार्जशीट दी और न ही कोई नियमित जांच की, सीधे उनकी दो वेतन वृद्धि रोकने का 31 मई 1990 को आदेश जारी कर दिया। इसके बाद पंजाब सरकार के इस फैसले को याची ने चुनौती दी लेकिन फैसला उसके पक्ष में नहीं आया। ऐसे में याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के निर्णयों को गलत ठहराते हुए कहा कि दो वार्षिक वेतन वृद्धि को भविष्य प्रभाव से रोकना एक मुख्य दंड है और ऐसे मामलों में पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड नियम 1971 में निर्धारित विस्तृत प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। चूंकि इस मामले में कोई जांच नहीं हुई, इसलिए आदेश अवैध, शून्य और निरस्त किया जाता है।
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