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आंदोलनकारी बातचीत को तैयार, समय और जगह बताए सरकार: मलिक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Wed, 08 Feb 2017 08:10 PM IST
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यशपाल मलिक
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जाट आरक्षण आंदोलन पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच चल रहा गतिरोध टूटने की उम्मीद जगी है। सरकार की ओर से बातचीत के लिए गठित अधिकारियों की कमेटी से आंदोलनकारी बातचीत को तैयार हैं।
बुधवार को जसिया पहुंचे यशपाल मलिक ने मंच से कहा कि मीडिया के माध्यम से सूचना मिली है कि सरकार ने बातचीत के लिए अधिकारियों की एक कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा कि सरकार समय और जगह बताए आंदोलनकारी बातचीत के लिए तैयार हैं। सरकार की कमेटी पहले खापों और दूसरे संगठनों से बातचीत कर ले। इसके बाद आंदोलन कर रहे जाट समाज के लोगों की ओर से गठित कमेटी बातचीत करेगी।
यशपाल मलिक ने कहा कि हमारी कमेटी यह पूछने जाएगी कि सरकार सात मांगों का कैसे समाधान करेगी। केंद्र में किस तरह आरक्षण दिलवाया जाएगा। आरक्षण पर क्या नीति है। जेलों में बंद युवाओं को कैसे छोड़ा जाएगा। मृतकों को पक्की नौकरी कैसी देगी और घायलों की सहायता के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। राजकुमार सैनी व रोशन लाल आर्य के खिलाफ पार्टी स्तर पर क्या कार्रवाई होगी।
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इसके बाद जाट आरक्षण संघर्ष कमेटी की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा। बाद में धरनों पर आकर समाज के लोगों के सामने बातचीत का ब्योरा रखेंगे। इसके बाद किस मुद्दे पर किससे बातचीत की जाए, यह तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमेटी या नेता मांग पूरी करने में सक्षम हैं या नहीं। इसके बाद किससे फाइनल मीटिंग की जाए, क्योंकि सरकार की ओर से गठित कमेटी अधिकारियों की है, जबकि इस तरह के निर्णय मुख्यमंत्री या मंत्री लेते हैं।
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बुधवार को जसिया पहुंचे यशपाल मलिक ने मंच से कहा कि मीडिया के माध्यम से सूचना मिली है कि सरकार ने बातचीत के लिए अधिकारियों की एक कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा कि सरकार समय और जगह बताए आंदोलनकारी बातचीत के लिए तैयार हैं। सरकार की कमेटी पहले खापों और दूसरे संगठनों से बातचीत कर ले। इसके बाद आंदोलन कर रहे जाट समाज के लोगों की ओर से गठित कमेटी बातचीत करेगी।
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यशपाल मलिक ने कहा कि हमारी कमेटी यह पूछने जाएगी कि सरकार सात मांगों का कैसे समाधान करेगी। केंद्र में किस तरह आरक्षण दिलवाया जाएगा। आरक्षण पर क्या नीति है। जेलों में बंद युवाओं को कैसे छोड़ा जाएगा। मृतकों को पक्की नौकरी कैसी देगी और घायलों की सहायता के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। राजकुमार सैनी व रोशन लाल आर्य के खिलाफ पार्टी स्तर पर क्या कार्रवाई होगी।
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इसके बाद जाट आरक्षण संघर्ष कमेटी की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा। बाद में धरनों पर आकर समाज के लोगों के सामने बातचीत का ब्योरा रखेंगे। इसके बाद किस मुद्दे पर किससे बातचीत की जाए, यह तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमेटी या नेता मांग पूरी करने में सक्षम हैं या नहीं। इसके बाद किससे फाइनल मीटिंग की जाए, क्योंकि सरकार की ओर से गठित कमेटी अधिकारियों की है, जबकि इस तरह के निर्णय मुख्यमंत्री या मंत्री लेते हैं।
दिल्ली या चंडीगढ़ में नहीं होगी बात
Jat reservation
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली या चंडीगढ़ में नहीं होगी बात
मलिक ने साफ किया कि बातचीत के लिए गठित होने वाली कमेटी में हर धरने से चार-पांच लोग लिए जाएंगे। साथ ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सात या आठ व प्रदेश कार्यकारिणी के 10 प्रमुख पदाधिकार भी होंगे। सरकार की ओर से गठित कमेटी रोहतक या आसपास 40 किलोमीटर के दायरे में किसी भी जिले में आ जाए। दिल्ली या चंडीगढ़ में बातचीत नहीं होगी।
यूपी में चुनाव से एक दिन पहले तक चलेंगे धरने
मलिक ने मंच से कहा कि यूपी में जाट समाज के धरने चुनाव से एक दिन पहले तक भी जारी रहेंगे। साथ ही पूर्वी यूपी में जाकर जाट समाज के लोग भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी हकीकत समझ गए हैं, इसलिए मंगलवार को जाट नेताओं से बातचीत की, लेकिन समय तेजी से निकल रहा है। इससे पहले यूपी से मुजफ्फरनगर की जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष प्रमोद अहलावत, जाट नेता ऊधम सिंह, जयप्रकाश शास्त्री, रामकुमार फौजी, कंवर पाल, सतेंद्र कुमार व रमेश चंद्र भी जसिया पहुंचे।
मलिक ने साफ किया कि बातचीत के लिए गठित होने वाली कमेटी में हर धरने से चार-पांच लोग लिए जाएंगे। साथ ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सात या आठ व प्रदेश कार्यकारिणी के 10 प्रमुख पदाधिकार भी होंगे। सरकार की ओर से गठित कमेटी रोहतक या आसपास 40 किलोमीटर के दायरे में किसी भी जिले में आ जाए। दिल्ली या चंडीगढ़ में बातचीत नहीं होगी।
यूपी में चुनाव से एक दिन पहले तक चलेंगे धरने
मलिक ने मंच से कहा कि यूपी में जाट समाज के धरने चुनाव से एक दिन पहले तक भी जारी रहेंगे। साथ ही पूर्वी यूपी में जाकर जाट समाज के लोग भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी हकीकत समझ गए हैं, इसलिए मंगलवार को जाट नेताओं से बातचीत की, लेकिन समय तेजी से निकल रहा है। इससे पहले यूपी से मुजफ्फरनगर की जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष प्रमोद अहलावत, जाट नेता ऊधम सिंह, जयप्रकाश शास्त्री, रामकुमार फौजी, कंवर पाल, सतेंद्र कुमार व रमेश चंद्र भी जसिया पहुंचे।
मंच से प्रस्ताव पास
तीसरे दिन भी धरने पर डटे रहे जाट
- फोटो : अमर उजाला
मंच से प्रस्ताव पास
- सरकार खाप नेताओं और दूसरे संगठनों से पहले बात कर ले। समिति बाद में बात करेगी।
- सरकारी पक्ष जानने और अपना पक्ष बताने जाएंगे। आखिरी फैसला धरने पर लिया जाएगा।
- वार्ता चंडीगढ़ या दिल्ली में नहीं होगी, रोहतक या आसपास के जिले का चयन करे सरकार।
- बातचीत के समय केवल जाट आरक्षण समिति के पदाधिकारी और धरनों में शामिल नेता होंगे।
- आधिकारिक बुलावा आने पर ही जाट आरक्षण संघर्ष समिति बातचीत करने जाएगी।
- सरकार खाप नेताओं और दूसरे संगठनों से पहले बात कर ले। समिति बाद में बात करेगी।
- सरकारी पक्ष जानने और अपना पक्ष बताने जाएंगे। आखिरी फैसला धरने पर लिया जाएगा।
- वार्ता चंडीगढ़ या दिल्ली में नहीं होगी, रोहतक या आसपास के जिले का चयन करे सरकार।
- बातचीत के समय केवल जाट आरक्षण समिति के पदाधिकारी और धरनों में शामिल नेता होंगे।
- आधिकारिक बुलावा आने पर ही जाट आरक्षण संघर्ष समिति बातचीत करने जाएगी।