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जाट आंदोलन हिंसाः एजी हरियाणा को हाईकोर्ट से फटकार

Sat, 23 Jul 2016 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Sat, 23 Jul 2016 11:50 PM IST
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jat reservation movement violence, punjab-haryana highcourt rebuke to AG haryana
जाट आंदोलन - फोटो : amar ujala
हरियाणा में इस साल फरवरी माह के दौरान जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान राज्य में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा, लूटपाट व आगजनी के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शनिवार को एक ओर जहां एडवोकेट जनरल हरियाणा को जमकर फटकार लगाई वहीं यह भी कहा कि हरियाणा सरकार इस पूरे मामले में नाकाम रही है।
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स्टिस एसएस सारों और जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई पर प्रकाश सिंह कमेटी और सभी जिलों से आई इलाका मजिस्ट्रेटों की रिपोर्ट पर अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने के आदेश जारी किए। शनिवार को इस मामले पर हाईकोर्ट में जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, एडवोकेट जनरल हरियाणा ने इलाका मजिस्ट्रेटों से आई रिपोर्ट पढ़ने के लिए और समय की मांग की।
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कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई कि राज्य के सभी जिलों के इलाका मजिस्ट्रेट द्वारा जो रिपोर्ट करीब 20 दिन पहले भेज दी थी, उसे अब तक एडवोकेट जनरल कार्यालय ने पढ़ा ही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब यह रिपोर्ट पढ़ी ही नहीं गई तो इस पर सरकार कार्रवाई कैसे करती। 
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दोषी अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?

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सुखपुरा चौक पर उपद्रवियों ने दंगे के दौरान जलाई थी दुकान
खंडपीठ ने जाट आंदोलन के दौरान कैप्टन अभिमन्यु का घर जलाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि जो सरकार अपने ही मंत्री को सुरक्षा देने में नाकाम रही है, वह आम लोगों को क्या सुरक्षा देगी। माननीय जजों ने हरियाणा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार ने अब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की।

उन्होंने कहा कि इलाका मजिस्ट्रेट ने जून की छुट्टियों के दौरान कड़ी मेहनत कर यह रिपोर्ट तैयार की है और सरकार व एडवोकेट जनरल आफिस अब तक भी आराम कर रहे हैं। बीस दिन बाद हाईकोर्ट से कहा जा रहा है कि उन्होंने अभी तक रिपोर्ट ही नहीं पढ़ी है और रिपोर्ट पढ़ने के लिए थोड़ा और समय दिया जाये। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है।

इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग कर रहे एमिक्स क्यूरे सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिस तरह अब तक प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट पर और इलाका मजिस्ट्रेटों की रिपोर्ट पर हरियाणा सरकार कार्रवाई कर रही है। उससे यही लगता है कि अगले एक दशक तक कोई कार्रवाई नहीं होने वाली।

गुप्ता ने इलाका मजिस्ट्रटों की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि आंदोलन के स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह पंगु हो गया था और प्रदेश का गृह विभाग भी नाकारा हो गया था।

कोई ओर देश होता तो अब तक बर्खास्त होते अफसर

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जाट आरक्षण
एमिक्स क्यूरे ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार दंगाईयों को वोट बैंक के चक्कर में बचा रही है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए क्योंकि सरकार के रवैये से साफ है कि वह कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती। गुप्ता ने हाईकोर्ट से आग्रह किया की इस मामले में हरियाणा के डीजीपी को कोर्ट में तलब कर जवाब मांगा जाए।

कोई ओर देश होता तो अब तक बर्खास्त होते अफसर
अनुपम गुप्ता ने हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार पर सीधे आरोप लगाया कि इस मामले में सरकार की कोशिश है कि किसी न किसी तरह तारीख पर तारीख लेकर मामले को देर तक लटकाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि जो अफसर जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दोषी पाए गए हैं, अगर कोई ओर देश होता तो इन्हें कब का बर्खास्त किया जा चुका होता।

उन्होंने इलाका मजिस्ट्रेटों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान दंगाईयों ने खुलकर लूटपाट की और दुकानों, संस्थानों को आग के हवाले कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि जब दंगाई लूटपाट और आगजनी कर रहे थे तो ऐसा नहीं लगता था कि उन्हें कोई जल्दी है। वे आराम से लूटपाट कर रहे थे। ऐसा लगता था कि उन्हें पहले ही पता था कि कोई उन्हें रोकने नहीं आएगा। 
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