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हरियाणा में क्रीमीलेयर पर अधिसूचना की प्रति पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 24 Aug 2016 08:44 PM IST
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हरियाणा में जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत दिए गए आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशानुसार हरियाणा सरकार ने बुधवार को आरक्षण के बारे में जारी क्रीमीलेयर अधिसूचना हाईकोर्ट में सौंप दी।
इस मामले पर हाईकोर्ट में पिछली दो सुनवाई के दौरान क्रीमीलेयर का मुद्दा उठने पर हाईकोर्ट ने आरक्षण को सही ठहरा रहे प्रतिवादियों को हरियाणा सरकार की क्रीमीलेयर अधिसूचना की प्रति कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए थे। हरियाणा सरकार ने पिछले सप्ताह इस मामले में अधिसूचना जारी करने के बाद बुधवार को इसकी प्रति हाईकोर्ट में सौंप दी। जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने इस अधिसूचना को रिकार्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई शनिवार तक टाल दी।
हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में सौंपी अधिसूचना में बताया है कि सरकार ने पिछड़े वर्ग में शामिल जाटों समेत छह जातियों के उन लोगों को क्रीमीलेयर की श्रेणी में रखा है, जिनकी वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक है। ऐसे लोगों को राज्य सरकार की ओर से पिछड़े वर्ग के तहत दिए दस फीसदी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
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सबसे पहले तीन लाख रुपये तक की सकल वार्षिक आय वाले व्यक्तियों के बच्चे नौकरी और शैक्षणिक संस्थाओं में दाखिला लेने में आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इसके बाद बाकी बचे कोटे का लाभ पिछड़े वर्गों के उस वर्ग को दिया जाएगा, जिसकी आय प्रति वर्ष 3 लाख रुपये से अधिक और 6 लाख रुपये से कम है। हर साल 6 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले पिछड़े वर्गों के लोगों को क्रीमीलेयर की श्रेणी में रखा गया है और उनके बच्चों को अधिनियम की धारा 5 के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
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इस मामले पर हाईकोर्ट में पिछली दो सुनवाई के दौरान क्रीमीलेयर का मुद्दा उठने पर हाईकोर्ट ने आरक्षण को सही ठहरा रहे प्रतिवादियों को हरियाणा सरकार की क्रीमीलेयर अधिसूचना की प्रति कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए थे। हरियाणा सरकार ने पिछले सप्ताह इस मामले में अधिसूचना जारी करने के बाद बुधवार को इसकी प्रति हाईकोर्ट में सौंप दी। जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने इस अधिसूचना को रिकार्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई शनिवार तक टाल दी।
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हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में सौंपी अधिसूचना में बताया है कि सरकार ने पिछड़े वर्ग में शामिल जाटों समेत छह जातियों के उन लोगों को क्रीमीलेयर की श्रेणी में रखा है, जिनकी वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक है। ऐसे लोगों को राज्य सरकार की ओर से पिछड़े वर्ग के तहत दिए दस फीसदी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
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सबसे पहले तीन लाख रुपये तक की सकल वार्षिक आय वाले व्यक्तियों के बच्चे नौकरी और शैक्षणिक संस्थाओं में दाखिला लेने में आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इसके बाद बाकी बचे कोटे का लाभ पिछड़े वर्गों के उस वर्ग को दिया जाएगा, जिसकी आय प्रति वर्ष 3 लाख रुपये से अधिक और 6 लाख रुपये से कम है। हर साल 6 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले पिछड़े वर्गों के लोगों को क्रीमीलेयर की श्रेणी में रखा गया है और उनके बच्चों को अधिनियम की धारा 5 के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।