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जाट आरक्षण आंदोलनः रोहतक सेशन जज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Apr 2016 04:02 PM IST
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कोर्ट
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव और हिंसा को लेकर जारी रोहतक सेशन जज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ। इसमें कहा गया कि जजों को अपने घरों के नुकसान की आशंका से न केवल बाहर आना पड़ा, बल्कि वह ऐसा महसूस कर रहे थे कि मानो बंटवारा हो रहा हो।
सबसे बड़ी बात यह है कि जब एसएसपी से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया तो उत्तर मिला हर कोई अपनी सुरक्षा स्वयं करे। रोहतक की रेवेन्यू अफसर कालोनी में रह रहे जिले के अधिकांश जजों को भय से उबारने के लिए दिल्ली में बैठे उनके साथी जजों ने मदद की।
दिल्ली से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस (एसीजे) एसजे वजीफदार को स्थिति से अवगत कराया गया और एसीजे के हस्तक्षेप के बाद ही सेना और रैपिड एक्शन फोर्स कालोनी में पहुंची। तभी जजों की सांस में सांस आई। जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच के निर्देश पर सेशन जज ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजी है।
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सेशन जज ने 19 फरवरी के बाद से बने माहौल को प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हुए कहा कि रोहतक जिला अदालत के वकील प्रदर्शन कर रहे थे और व्यापारियों से टकराव के बाद ही ऐसा माहौल बना।
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सबसे बड़ी बात यह है कि जब एसएसपी से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया तो उत्तर मिला हर कोई अपनी सुरक्षा स्वयं करे। रोहतक की रेवेन्यू अफसर कालोनी में रह रहे जिले के अधिकांश जजों को भय से उबारने के लिए दिल्ली में बैठे उनके साथी जजों ने मदद की।
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दिल्ली से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस (एसीजे) एसजे वजीफदार को स्थिति से अवगत कराया गया और एसीजे के हस्तक्षेप के बाद ही सेना और रैपिड एक्शन फोर्स कालोनी में पहुंची। तभी जजों की सांस में सांस आई। जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच के निर्देश पर सेशन जज ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजी है।
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सेशन जज ने 19 फरवरी के बाद से बने माहौल को प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हुए कहा कि रोहतक जिला अदालत के वकील प्रदर्शन कर रहे थे और व्यापारियों से टकराव के बाद ही ऐसा माहौल बना।
उपद्रव के दौरान एसएसपी का जवाब, अपनी सुरक्षा स्वयं करो
जाट आरक्षण के लिए आंदोलन
- फोटो : amar ujala
रिपोर्ट में कहा गया है कि उपद्रवियों ने गाड़ियों के कई शोरूम, वाहनों, माल, निजी स्कूलों और अस्पतालों को आग की भेंट चढ़ा दिया। बाद में माहौल और बिगड़ गया। यहां तक कि सेना भी रोहतक नहीं पहुंच पाई और हवाई मार्ग से सेना उतारनी पड़ी। सेना के फ्लैग मार्च और कर्फ्यू के बावजूद उपद्रवी काबू में नहीं आए। ऐसे माहौल में जजों के रास्तों को अवरुद्ध कर दिया गया।
माहौल इतना बिगड़ गया कि रेवेन्यू कालोनी में न्यायिक अधिकारियों की रिहायशों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की खबरें आने लगीं, जिसकी पुष्टि एक जज की ओर से पूछने पर एक डीएसपी ने की। कालोनी के सुरक्षागार्ड तक भाग गए और उपद्रवियों ने सुरक्षा पोस्ट पर कब्जा कर लिया।
ऐसे माहौल में एडिशनल सेशन जज संदीप दुग्गल ने एसएसपी सौरभ सिंह को फोन कर सुरक्षा सुनिश्चित बनाने को कहा तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए जवाब दिया कि हर कोई अपनी सुरक्षा स्वयं करे। ऐसा ही जवाब डीसी डीके बेहड़ा से भी मिला। उपद्रवियों के खौफ से जजों ने अपने घरों के बाहर से नेम प्लेट तक उतार दी थी।
माहौल इतना बिगड़ गया कि रेवेन्यू कालोनी में न्यायिक अधिकारियों की रिहायशों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की खबरें आने लगीं, जिसकी पुष्टि एक जज की ओर से पूछने पर एक डीएसपी ने की। कालोनी के सुरक्षागार्ड तक भाग गए और उपद्रवियों ने सुरक्षा पोस्ट पर कब्जा कर लिया।
ऐसे माहौल में एडिशनल सेशन जज संदीप दुग्गल ने एसएसपी सौरभ सिंह को फोन कर सुरक्षा सुनिश्चित बनाने को कहा तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए जवाब दिया कि हर कोई अपनी सुरक्षा स्वयं करे। ऐसा ही जवाब डीसी डीके बेहड़ा से भी मिला। उपद्रवियों के खौफ से जजों ने अपने घरों के बाहर से नेम प्लेट तक उतार दी थी।
‘ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा’
मीटिंग में जाट नेता
- फोटो : amar ujala
सेशन जज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रेवेन्यू कालोनी में रहने वाले जजों ने उन्हें पत्र भेज कर स्थिति से अवगत कराया। रिहायश पर हमले की आशंका से एक जज अपने छोटे बच्चों को लेकर पार्क में रात गुजारने को मजबूर हुए। यहां तक कि वह सर्दियों के कपड़े तक भी निकाल नहीं पाए। एक जज ने तो नौकरों के लिए बनी अलग इमारत में अपने परिवार समेत पनाह ली। एक जज ने तो यहां तक कहा कि मानो बंटवारे के दिन चल रहे हों।
जजों को अपने परिवार दिल्ली भेजने पड़े। ऐसी स्थिति के मद्देनजर सेशन जज ने एसीजे से बात की। एसीजे के हस्तक्षेप के चलते ही सेना और रैपिड एक्शन फोर्स पहुंची। सेशन जज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखने को मिला, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आम लोगों की जानमाल की सुरक्षा को प्रतिबद्ध सरकार कहीं है ही नहीं। सेशन जज ने रोहतक केजजों की सुरक्षा को किए प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।
जजों को अपने परिवार दिल्ली भेजने पड़े। ऐसी स्थिति के मद्देनजर सेशन जज ने एसीजे से बात की। एसीजे के हस्तक्षेप के चलते ही सेना और रैपिड एक्शन फोर्स पहुंची। सेशन जज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखने को मिला, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आम लोगों की जानमाल की सुरक्षा को प्रतिबद्ध सरकार कहीं है ही नहीं। सेशन जज ने रोहतक केजजों की सुरक्षा को किए प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।