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आंदोलनः जाटों ने दी बुरा परिणाम भुगताने की चेतावनी, BJP सरकार की मुश्किलें बढ़ीं
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sun, 05 Mar 2017 03:27 PM IST
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तीसरे दिन भी धरने पर डटे रहे जाट
- फोटो : अमर उजाला
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आरक्षण के लिए और अपनी मांगें मनवाने के लिए आंदोलन कर रहे जाट उग्र हो गए है। उन्होंने सरकार को बुरा परिणाम भुगतने की चेतावनी दे दी है।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेतृत्व में जसिया में जाट समाज का चल रहा धरना 35वें दिन भी शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा। शनिवार को मंच से सरकार को चेताया गया कि वे गांवों में बिजली का बिल लेने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को न भेजे, नहीं तो इसके परिणाम बुरे होंगे।
जसिया धरना स्थल पर 35वें दिन भी काफी संख्या में लोग जुटे। धरना स्थल पर सुबह हुड्डा खाप के प्रधान ओम प्रकाश हुड्डा के नेतृत्व में बैठक हुई। जिसमें कमेटी ने कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी पर समाज में जहर घोलने के आरोप लगाए।
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेतृत्व में जसिया में जाट समाज का चल रहा धरना 35वें दिन भी शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा। शनिवार को मंच से सरकार को चेताया गया कि वे गांवों में बिजली का बिल लेने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को न भेजे, नहीं तो इसके परिणाम बुरे होंगे।
जसिया धरना स्थल पर 35वें दिन भी काफी संख्या में लोग जुटे। धरना स्थल पर सुबह हुड्डा खाप के प्रधान ओम प्रकाश हुड्डा के नेतृत्व में बैठक हुई। जिसमें कमेटी ने कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी पर समाज में जहर घोलने के आरोप लगाए।
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राजकुमार सैनी को भी दी कड़ी चेतावनी
हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन
जाटों ने कहा कि सैनी ने फिर से अपनी चोंच खोलनी शुरू कर दी है। अगर सरकार चाहती है कि सब ठीक रहे तो अपने तोते सैनी द्वारा समाज में जहर घोलने का काम तुरंत बंद करें, इसके ठीक परिणाम नहीं होंगे।
कमेटी ने कहा कि एक मार्च से उनका असहयोग आंदोलन चल रहा है। उनके द्वारे दी गई चेतावनी के बाद भी अधिकारी और कर्मचारी गांवों में बिजली के बिल लेने के लिए जा रहे हैं। सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसा करने से रोके।
धरने पर वक्ताओं ने कहा कि 20 मार्च को संसद पर होने वाले घेराव के लिए रणनीति तैयार कर ली गई है। सरकार चाहे जितना भी प्रबंध कर ले, वे संसद भवन तक जरूर जाकर रहेंगे। अब की बार संसद पर ही पड़ाव डाला जाएगा।
कमेटी ने कहा कि एक मार्च से उनका असहयोग आंदोलन चल रहा है। उनके द्वारे दी गई चेतावनी के बाद भी अधिकारी और कर्मचारी गांवों में बिजली के बिल लेने के लिए जा रहे हैं। सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसा करने से रोके।
धरने पर वक्ताओं ने कहा कि 20 मार्च को संसद पर होने वाले घेराव के लिए रणनीति तैयार कर ली गई है। सरकार चाहे जितना भी प्रबंध कर ले, वे संसद भवन तक जरूर जाकर रहेंगे। अब की बार संसद पर ही पड़ाव डाला जाएगा।