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‘है क्या गोम’ से दिखाई जम्मू-कश्मीर की सभ्यता
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चंडीगढ़। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र ने टैगोर थिएटर में जम्मू-कश्मीर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। शुरुआत मनोज मट्टू, विजय टिकू, विनीता कौल, मीनाक्षी धर, नादिर और राहुल द्वारा गाए गए कश्मीरी भाषा में एक भक्ति गीत हरमुख बारटाल से हुई।
इसे बाद लघु नाटक ‘है क्या गोम’ प्रस्तुत किया गया। नाटक एक कश्मीरी परिवार के बारे में था। जहां दादा-दादी पुराने पारंपरिक कश्मीरी परिधान पहनते हैं, जबकि उनकी पोती चाहती है कि वे आधुनिक परिधान पहनें। नाटक यह बताता है कि हमें अपनी परंपरा और मूल्यों पर लज्जित नहीं होना चाहिए। रोमेश पंडिता, विनीता कौल, जैसमीन, नैंसी और हरीश पंडित ने नाटक में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। अगली पेशकश कलाकार अंजलि जद रैना ने एकल गीत पर दी। इस गीत में निर्वासन में रह रहे कश्मीरी पंडितों के दर्द को दर्शाया गया है। कलाकार संजय कुमार और विनीता कौल ने एक कश्मीरी रिमिक्स पर फ्यूजन नृत्य प्रस्तुत किया। इसमें संतूर पर संगीतकार सूर्यकांत, तबले पर कृष्ण साई, हारमोनियम पर राहुल ने साथ निभाया।
जम्मू-कश्मीर की संस्कृति से जोड़ने की कोशिश
दिलचस्प बात यह है कि कलाकार कश्मीरी पंडितों के समुदाय से हैं जो 1990 के पलायन के बाद से ट्राइसिटी में रह रहे हैं। इस कार्यक्रम में अभिनेत्री बाशा सुंबली और हरियाणवी लोक गायक मनमोहन सोनी विशिष्ट अतिथि रहीं।
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इसे बाद लघु नाटक ‘है क्या गोम’ प्रस्तुत किया गया। नाटक एक कश्मीरी परिवार के बारे में था। जहां दादा-दादी पुराने पारंपरिक कश्मीरी परिधान पहनते हैं, जबकि उनकी पोती चाहती है कि वे आधुनिक परिधान पहनें। नाटक यह बताता है कि हमें अपनी परंपरा और मूल्यों पर लज्जित नहीं होना चाहिए। रोमेश पंडिता, विनीता कौल, जैसमीन, नैंसी और हरीश पंडित ने नाटक में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। अगली पेशकश कलाकार अंजलि जद रैना ने एकल गीत पर दी। इस गीत में निर्वासन में रह रहे कश्मीरी पंडितों के दर्द को दर्शाया गया है। कलाकार संजय कुमार और विनीता कौल ने एक कश्मीरी रिमिक्स पर फ्यूजन नृत्य प्रस्तुत किया। इसमें संतूर पर संगीतकार सूर्यकांत, तबले पर कृष्ण साई, हारमोनियम पर राहुल ने साथ निभाया।
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जम्मू-कश्मीर की संस्कृति से जोड़ने की कोशिश
दिलचस्प बात यह है कि कलाकार कश्मीरी पंडितों के समुदाय से हैं जो 1990 के पलायन के बाद से ट्राइसिटी में रह रहे हैं। इस कार्यक्रम में अभिनेत्री बाशा सुंबली और हरियाणवी लोक गायक मनमोहन सोनी विशिष्ट अतिथि रहीं।
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