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पंजाब के रिटायर्ड एडीजीपी भुल्लर को चेक बाउंस में छह माह कैद, ब्याज भी देना होगा
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 06 Jun 2018 04:30 PM IST
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चंडीगढ़ जिला अदालत ने चेक बाउंस के तीन अलग-अलग मामलों में पंजाब के पूर्व एडिशनल डीजीपी रहे गुरचरण सिंह भुल्लर को दोषी करार दिया है। अदालत ने रिटायर्ड एडीजीपी भुल्लर को एनआई एक्ट 138 के तहत तीनों केस में छह-छह महीने की सजा सुनाई है। उन्हें तीनों चेकों की राशि 7.10 लाख रुपये और इस पर चेक बाउंस की तारीख से फैसले की तारीख तक 6 फीसदी की दर से ब्याज देने के आदेश दिए हैं।
पूर्व एडीजीपी भुल्लर के खिलाफ सेक्टर-21 निवासी बृज भूषण ने अदालत में एनआई एक्ट 138 के तहत केस दायर किया था। केस के अनुसार, जून 2014 में भुल्लर ने बृज भूषण से पत्नी के घुटने के ऑपरेशन के नाम पर 8.10 लाख रुपये लिए थे। बृज भूषण उस वक्त मनाली में थे, जब भुल्लर ने उन्हें फोन कर पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने और उसका ऑपरेशन होने के नाम पर पैसे मांगे थे। बृज भूषण ने किसी तरह से उन्हें परिचित से पैसे लेकर दिए थे।
शिकायत के अनुसार भुल्लर ने उन्हें दो-तीन दिनों में पैसे लौटाने की बात कही थी, लेकिन इसके कई दिन बाद तक उन्होंने पैसे नहीं लौटाए। बृज भूषण को पता चला कि भुल्लर ने पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने की जो बात कही थी, वह भी झूठी थी। बृज भूषण ने जब अपने पैसे वापस मांगे तो वह छह महीने तक उसे एक दो दिन में पैसे देने की बात कहते हुए टालते रहे। मार्च 2015 में भुल्लर ने बृज भूषण को चार चेक दिए। ये चेक एक लाख, 1.60 लाख, 2.5 लाख और 3 लाख रुपये के थे। ये चेक पोस्टडेटेड थे।
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शिकायतकर्ता बृज भूषण के अनुसार एक लाख रुपये वाला चेक तो कैश हो गया, लेकिन बाकी तीनों चेक बाउंस हो गए। इसके बाद उन्होंने अदालत में जनवरी और अप्रैल 2016 में तीन चेक बाउंस के केस संबंधी शिकायत अदालत में दायर की। इन पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को चेक बाउंस संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए गठित स्पेशल कोर्ट की जज इरम हसन ने पूर्व एडीजीपी गुरचरण सिंह भुल्लर को तीनों मामलों में दोषी करार देते हुए उन्हें प्रत्येक मामले में छह-छह महीने की सजा सुनाई। साथ ही उसे तीनों चेक की रकम 1.60 लाख, 2.50 लाख और 3 लाख रुपये 6 फीसदी ब्याज के साथ चुकाने के आदेश दिए हैं।
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पूर्व एडीजीपी भुल्लर के खिलाफ सेक्टर-21 निवासी बृज भूषण ने अदालत में एनआई एक्ट 138 के तहत केस दायर किया था। केस के अनुसार, जून 2014 में भुल्लर ने बृज भूषण से पत्नी के घुटने के ऑपरेशन के नाम पर 8.10 लाख रुपये लिए थे। बृज भूषण उस वक्त मनाली में थे, जब भुल्लर ने उन्हें फोन कर पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने और उसका ऑपरेशन होने के नाम पर पैसे मांगे थे। बृज भूषण ने किसी तरह से उन्हें परिचित से पैसे लेकर दिए थे।
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शिकायत के अनुसार भुल्लर ने उन्हें दो-तीन दिनों में पैसे लौटाने की बात कही थी, लेकिन इसके कई दिन बाद तक उन्होंने पैसे नहीं लौटाए। बृज भूषण को पता चला कि भुल्लर ने पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने की जो बात कही थी, वह भी झूठी थी। बृज भूषण ने जब अपने पैसे वापस मांगे तो वह छह महीने तक उसे एक दो दिन में पैसे देने की बात कहते हुए टालते रहे। मार्च 2015 में भुल्लर ने बृज भूषण को चार चेक दिए। ये चेक एक लाख, 1.60 लाख, 2.5 लाख और 3 लाख रुपये के थे। ये चेक पोस्टडेटेड थे।
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शिकायतकर्ता बृज भूषण के अनुसार एक लाख रुपये वाला चेक तो कैश हो गया, लेकिन बाकी तीनों चेक बाउंस हो गए। इसके बाद उन्होंने अदालत में जनवरी और अप्रैल 2016 में तीन चेक बाउंस के केस संबंधी शिकायत अदालत में दायर की। इन पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को चेक बाउंस संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए गठित स्पेशल कोर्ट की जज इरम हसन ने पूर्व एडीजीपी गुरचरण सिंह भुल्लर को तीनों मामलों में दोषी करार देते हुए उन्हें प्रत्येक मामले में छह-छह महीने की सजा सुनाई। साथ ही उसे तीनों चेक की रकम 1.60 लाख, 2.50 लाख और 3 लाख रुपये 6 फीसदी ब्याज के साथ चुकाने के आदेश दिए हैं।