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तारा ने अदालत को सौंपा 6 पेज का कबूलनामा, कहा- कोई अफसोस नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 26 Jan 2018 10:06 AM IST
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जगतार सिंह तारा
- फोटो : File Photo
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पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड में बुड़ैल जेल में चल रहे ट्रायल के दौरान जगतार सिंह तारा ने एक बार फिर से बेअंत सिंह की हत्या करवाने की बात कबूल की है। साथ ही कहा कि ऐसा करने के लिए उसे कोई अफसोस नहीं है। वहीं तारा ने अदालत में छह पेज का कबूलनामा भी सौंपा। तारा के शेष बयान अगली सुनवाई 7 फरवरी को होंगे।
वीरवार को तारा की सीआरपीसी की धारा 313 के तहत शेष बयान दर्ज किए गए। इससे पहले हुए बयान में भी उसने पूर्व सीएम की हत्या करवाने की बात कबूली थी। वीरवार को तारा ने एक बार फिर वारदात को कबूला साथ ही इस हत्याकांड के पीछे के औचित्य और तर्क भी बताए।
तारा के वकील के अनुसार उसने वारदात को अंजाम देने की बात कबूल ली है। साथ ही उसने अदालत को जो छह पेज का पत्र सौंपा है, उसमें कहा है कि इस कदम से पहले उसने सिख इतिहास और परंपरा से प्रेरणा ली थी। इसमें यह भी कहा गया है कि सिख इतिहास ने उन्हें सिखाया कि वह अन्याय नहीं सहे और उस समय परिस्थितियां असहिष्णु थी, जब बड़े पैमाने पर निर्दोष युवा मारे गए थे। सत्ता में आने के बाद बेअंत सिंह ने अपराधियों को दंडित नहीं किया था। पत्र में कहा है कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद बेअंत सिंह ने इन अधिकारियों को पदोन्नति देकर राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए उनके नाम का उल्लेख करते हुए पुरस्कृत किया था।
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वीरवार को तारा की सीआरपीसी की धारा 313 के तहत शेष बयान दर्ज किए गए। इससे पहले हुए बयान में भी उसने पूर्व सीएम की हत्या करवाने की बात कबूली थी। वीरवार को तारा ने एक बार फिर वारदात को कबूला साथ ही इस हत्याकांड के पीछे के औचित्य और तर्क भी बताए।
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तारा के वकील के अनुसार उसने वारदात को अंजाम देने की बात कबूल ली है। साथ ही उसने अदालत को जो छह पेज का पत्र सौंपा है, उसमें कहा है कि इस कदम से पहले उसने सिख इतिहास और परंपरा से प्रेरणा ली थी। इसमें यह भी कहा गया है कि सिख इतिहास ने उन्हें सिखाया कि वह अन्याय नहीं सहे और उस समय परिस्थितियां असहिष्णु थी, जब बड़े पैमाने पर निर्दोष युवा मारे गए थे। सत्ता में आने के बाद बेअंत सिंह ने अपराधियों को दंडित नहीं किया था। पत्र में कहा है कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद बेअंत सिंह ने इन अधिकारियों को पदोन्नति देकर राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए उनके नाम का उल्लेख करते हुए पुरस्कृत किया था।
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यह है मामला
जगतार सिंह तारा
- फोटो : file photo
पत्र में कहा गया है कि उसे विद्रोही या देशद्रोही कहे जाने का डर नहीं है क्योंकि उसका मकसद सही था। इसके अलावा पत्र में कहा गया है कि जिस तरह से ऊधमसिंह ने जलियांवाला बाग का बदला लिया और ब्रिटिश सरकार ने उसे आतंकवादी कहा और जिस तरह से मुगलों ने सिख साम्राज्य को विद्रोही करार दिया, वैसे ही उसने सभी अन्याय का बदला लेने का प्रयास किया था। उसे बेअंत सिंह की हत्या के लिए कोई पछतावा नहीं था।
यह है मामला
31 अगस्त, 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा के खिलाफ पटियाला जेल में 31 मार्च, 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
यह है मामला
31 अगस्त, 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा के खिलाफ पटियाला जेल में 31 मार्च, 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।