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गवाह से ट्रायल में तोते की तरह बयान दोहराने की उम्मीद रखना सही नहीं : हाईकोर्ट

Sun, 02 Jun 2024 02:27 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jun 2024 02:27 AM IST
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It is not right to expect the witness to repeat his statement like a parrot in the trial: High Court
-हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील को हाईकोर्ट ने किया खारिज
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-हिसार में जमीनी विवाद में गोली मारकर हत्या से जुड़ा हुआ है मामला

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। जब गवाह लंबे समय के बाद गवाही दे रहा हो तो सच्चे गवाह के बयान में भी विसंगतियां दिखाई दे सकती हैं, गवाहों से ट्रायल कोर्ट के समक्ष तोते की तरह बयान देने की उम्मीद नहीं की जा सकती। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम टिप्पणी करते हुए हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील को सिरे से खारिज कर दिया। ओम प्रकाश ने हत्या के मामले में 2002 में हिसार की अदालत द्वारा दोषी करार देने और उम्रकैद की सजा के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि घटना 05 अक्तूबर 1997 को हुई थी। 06 अक्तूबर को पुलिस ने पैलेट्स युक्त पार्सल को अपने कब्जे में ले लिया था जिसे डॉक्टर ने रमेश कुमार के शव से पोस्टमार्टम के समय निकाला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु का कारण चोटों के परिणामस्वरूप रक्तस्राव और सदमा था। सभी चोटें गोली लगने के कारण आई थी। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे यह पता चले कि गवाहों ने अपीलकर्ता के खिलाफ झूठी गवाही दी थी। न्यायालय ने अपीलकर्ता के वकील द्वारा उठाए गए इस तर्क को खारिज कर दिया कि दोनों गवाहों की गवाही असंगत थी। अदालत ने कहा कि दोनों गवाह ग्रामीण हैं और उन्हें घटना के कई महीनों बाद ट्रायल कोर्ट में पेश होने का मौका मिला था। वास्तव में जब गवाह इतने लंबे समय के बाद गवाही दे रहे थे, तो सच्चे गवाहों के बयानों में भी कुछ विसंगतियां दिखाई देंगी और गवाहों से ट्रायल कोर्ट के सामने तोते की तरह बयान देने की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
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