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एबीवीपी से राजनीति शुरू करने वाले रविकांत बने चंडीगढ़ के मेयर, अब विकास कार्यों को पूरा करवाना प्राथमिकता 

Sat, 09 Jan 2021 02:26 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 09 Jan 2021 02:26 AM IST
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New mayor of chandigarh wants to complete work of his predecessors 
चंडीगढ़ के मेयर रविकांत शर्मा। - फोटो : अमर उजाला

भारतीय जनता पार्टी के रविकांत शर्मा चंडीगढ़ के नए मेयर बन गए हैं। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले रविकांत शर्मा एक-एक सीढ़ी चढ़कर मेयर की कुर्सी तक पहुंचे हैं। मेयर बनने के बाद रविकांत शर्मा ने कहा कि मुझसे पहले भाजपा के चार मेयर ने जो काम शुरू कराए हैं, उन्हें पूरा करना मेरा पहला लक्ष्य है। रही बात वित्तीय संकट की तो सांसद किरन खेर और प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद की मदद से इस मामले को केंद्र सरकार के सामने रखकर वह समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।

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रविकांत शर्मा ने कहा कि 1995 में जब मैं चंडीगढ़ आया था तो मेरी प्राथमिकता संगठन के माध्यम से समाज में विकास कार्य कराना था। संगठन ने विश्वास जताया तो जिम्मेदारियां मिलती गईं। उन जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया तो संगठन ने मेयर पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में चुना। अब मेयर की जिम्मेदारी भी पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा।
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वित्तीय समस्या के सवाल पर मेयर रविकांत शर्मा ने कहा कि निगम के प्रत्येक विकास कार्य के लिए एक निश्चित राशि होती है इसलिए वित्त की समस्या वहां आती है, जहां नए और बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करना होता है। मेयर ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में ही निगम 170 से 325 करोड़ तक राजस्व पैदा करने वाला विभाग बना है।
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पार्षदों और अफसरों के बीच की कड़ी का काम करता है मेयर
निगम में अफसरों और पार्षदों के बीच हमेशा एक मनमुटाव रहता है। इस सवाल पर रविकांत शर्मा ने कहा कि अफसर ही शहर में हर कार्य को करते हैं। मेयर अथवा पार्षद उन्हें दिशा बताते हैं कि किस क्षेत्र में कौन सा कार्य को करना है। इसलिए मेयर अफसर और पार्षदों के बीच की कड़ी होता है। जब यह दोनों मिलकर बेहतर तरीके से काम करते हैं तो शहर में विकास के नए आयाम जुड़ते हैं।

एबीवीपी से शुरू हुई राजनीति, छह साल रहे जिला अध्यक्ष

मूल रूप से हिमाचल के ऊना निवासी रविकांत शर्मा ने 1983 में भाजपा की सदस्यता ली थी। उसके बाद ऊना में ही कॉलेज की पढ़ाई करते हुए अखिल भरतीय विद्यार्थी परिषद के साथ जुड़े। संगठन क कार्यों के साथ युवाओं में जोश भरने का कार्य किया। 1995 में वे चंडीगढ़ की राजनीति में आए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान भाजपा हिमाचल सह प्रभारी संजय टंडन के मार्गदर्शन में सक्रिय राजनीति में जुड़े। 

रविकांत शर्मा ने बूथ स्तरीय कार्यकर्ता से अपने राजनीतिक करिअर की शुरुआत की। 2006 में सबसे पहले रविकांत शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी मिली। उन्हें मंडल अध्यक्ष बनाया गया। 2009 तक यह जिम्मेदारी संभालने के बाद 2012 में जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। लगातार छह साल तक रविकांत शर्मा ने जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

15 साल था कांग्रेस का कब्जा, भाजपा को दिलाई जीत
जिला अध्यक्ष रहते हुए रविकांत शर्मा के कार्यकाल को देखकर 2016 में उन्हें वार्ड तीन से पार्षद का टिकट दिया गया। इस वार्ड में पिछले 15 साल से कांग्रेस का कब्जा था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा की पत्नी लगातार इस सीट पर जीत हासिल कर रहीं थीं। रविकांत शर्मा ने चुनौती स्वीकार की और भाजपा को अप्रत्याशित जीत दिलाई। यही जीत उनकी सफलता में मील का पत्थर साबित हुई।
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