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आईएसबीटी 17/22 के अंडरपास की भी बदलेगी तस्वीर, लगेंगे एस्केलेटर
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चंडीगढ़। करीब 24 साल पुराने आईएसबीटी-17 और सेक्टर-22 के अंडरपास की तस्वीर बदलने जा रही है। यूटी प्रशासन इस अंडरपास में एस्केलेटर लगाने की तैयारी कर रहा है। आईएसबीटी की वजह से बहुत से लोग रोजाना इस अंडरपास का इस्तेमाल करते हैं।
रैंप की सुविधा मौजूद नहीं होने की वजह से बुजुर्गों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर शहर के विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन से शिकायत की थी। इस अंडरपास में एस्केलेटर लगाने के लिए आर्किटेक्ट विभाग डिजाइन तैयार कर रहा है, जिसे चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग को सौंपा जाएगा। एस्केलेटर लगाने के लिए प्रशासन ने ग्राउंड सर्वे का कार्य भी पूरा कर लिया है। जानकारी के अनुसार यह अंडरपास साल 1996 में बनाया गया था। इस अंडरपास में कई दुकानें भी हैं। हालांकि, अंडरपास के दुकानदारों की तरफ से हमेशा यह शिकायत की जाती रही है कि अंडरपास में नगर निगम की तरफ से साफ-सफाई नहीं की जाती है। इसकी वजह से यहां काफी गंदगी रहती है।
पीजीआई-पीयू अंडरपास का डिजाइन तैयार, जल्द काम होगा शुरू
पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच पैदल यात्री अंडरपास के ड्राइंग का काम पूरा कर लिया गया है। आर्किटेक्ट विभाग ने ड्राइंग को बना लिया है, इसके बाद इस अंडरपास पर काम शुरू करने के लिए इंजीनियरिंग विभाग को सौंपा जाएगा। 4 नवंबर 2019 को प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को लेकर प्रशासक को एक प्रेजेंटेशन दी थी और बताया था कि पीजीआई और पीयू आने-जाने वाले हजारों लोगों को गाड़ियों की आवाजाही के बीच रोजाना सड़क पार करना पड़ता है। इस बैठक में प्रशासक ने अंडरपास के लिए मंजूरी दे दी थी। पहले इंजीनियरिंग विभाग ने ड्राइंग बनाई, जिसमें आर्किटेक्ट विभाग ने कई संशोधन किए हैं। जानकारी के अनुसार, यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने सर्वे कर अंडरपास बनाने के लिए जगह को भी चिह्नित कर ली है। गौरतलब है कि ड्राइंग्स तय नहीं होने के चलते पिछले काफी समय से ये प्रोजेक्ट लटका हुआ था।
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रैंप की सुविधा मौजूद नहीं होने की वजह से बुजुर्गों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर शहर के विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन से शिकायत की थी। इस अंडरपास में एस्केलेटर लगाने के लिए आर्किटेक्ट विभाग डिजाइन तैयार कर रहा है, जिसे चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग को सौंपा जाएगा। एस्केलेटर लगाने के लिए प्रशासन ने ग्राउंड सर्वे का कार्य भी पूरा कर लिया है। जानकारी के अनुसार यह अंडरपास साल 1996 में बनाया गया था। इस अंडरपास में कई दुकानें भी हैं। हालांकि, अंडरपास के दुकानदारों की तरफ से हमेशा यह शिकायत की जाती रही है कि अंडरपास में नगर निगम की तरफ से साफ-सफाई नहीं की जाती है। इसकी वजह से यहां काफी गंदगी रहती है।
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पीजीआई-पीयू अंडरपास का डिजाइन तैयार, जल्द काम होगा शुरू
पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच पैदल यात्री अंडरपास के ड्राइंग का काम पूरा कर लिया गया है। आर्किटेक्ट विभाग ने ड्राइंग को बना लिया है, इसके बाद इस अंडरपास पर काम शुरू करने के लिए इंजीनियरिंग विभाग को सौंपा जाएगा। 4 नवंबर 2019 को प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को लेकर प्रशासक को एक प्रेजेंटेशन दी थी और बताया था कि पीजीआई और पीयू आने-जाने वाले हजारों लोगों को गाड़ियों की आवाजाही के बीच रोजाना सड़क पार करना पड़ता है। इस बैठक में प्रशासक ने अंडरपास के लिए मंजूरी दे दी थी। पहले इंजीनियरिंग विभाग ने ड्राइंग बनाई, जिसमें आर्किटेक्ट विभाग ने कई संशोधन किए हैं। जानकारी के अनुसार, यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने सर्वे कर अंडरपास बनाने के लिए जगह को भी चिह्नित कर ली है। गौरतलब है कि ड्राइंग्स तय नहीं होने के चलते पिछले काफी समय से ये प्रोजेक्ट लटका हुआ था।
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