फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   investigation of Punjab Vigilance in corruption case against former Forest Minister reached Mining Department

Punjab Vigilance: वन विभाग की जमीन नीलाम कर खनन करवाने का खुलासा, अब खनन विभाग में फाइलें खंगालेगा विजिलेंस

Fri, 22 Jul 2022 10:01 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 22 Jul 2022 10:01 AM IST
सार

भ्रष्टाचार का मामला सिर्फ वन विभाग तक ही सीमित नहीं है। जांच के दौरान अवैध खनन को बढ़ावा देने में कुछ खनन अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। इस खुलासे के बाद अब खनन और वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं।

विज्ञापन
investigation of Punjab Vigilance in corruption case against former Forest Minister reached Mining Department
पंजाब विजिलेंस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां मामले में पंजाब विजिलेंस की जांच खनन विभाग तक पहुंच गई है। जांच में खनन अधिकारियों ने नीलामी प्रक्रिया में वनभूमि के खसरा नंबर शामिल कर 40 करोड़ रुपये का घोटाला कर डाला। इस खुलासे के बाद विजिलेंस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब खनन विभाग तक कर दिया है।

विज्ञापन


पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां मामले में जांच के दौरान विजिलेंस ने हाल ही में जिंदापुर गांव में 25 एकड़ वन भूमि पर अवैध खनन का पता लगाया था। जांच में पता चला कि करीब 50 फुट गहरे गड्ढे खोदे गए और करीब 40 करोड़ रुपये का अवैध खनन किया गया। इस मामले में पुलिस ने पिछले साल जिंदापुर में अवैध खनन के आरोप में पूर्व सरपंच इकबाल सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इकबाल का नाम तब आया था जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उसके घर आए थे और अपनी मां के साथ लंच किया था।
विज्ञापन


इस खुलासे के बाद दोनों पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में खनन विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। नतीजतन विजिलेंस ब्यूरो ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। ब्यूरो के अनुसार भ्रष्टाचार का यह मामला सिर्फ वन विभाग तक ही सीमित नहीं है। जांच के दौरान अवैध खनन को बढ़ावा देने में कुछ खनन अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। इस खुलासे के बाद अब खनन और वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

वन भूमि और सतलुज से हुआ खनन

विजिलेंस जांच में पता चला है कि नीलाम किए गए खनन पट्टों की आड़ में वन भूमि और सतलुज नदी के किनारों पर अवैध खनन किया गया। अवैध खनन की यह प्रक्रिया 2018 से 2021 के बीच तक जारी रही।

खनन पट्टे की यह आवंटन प्रक्रिया

खनन पट्टे की नीलामी प्रक्रिया में उपायुक्त के अधीन गठित एक जिला खनन समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं, जिन्हें नीलामी अधिसूचना में खसरा नंबर शामिल करना सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है। फिलहाल विजिलेंस अधिकारी इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं कि खनन विभाग की नीलामी अधिसूचना में वनभूमि का खसरा नंबर कैसे शामिल किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed