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अफसरों-जवानों को अब तबादलों पर होगा टेंपरेरी स्टे का भुगतान, रजिस्टर्ड गेस्ट हाउस में रुक सकेंगे
Fri, 22 May 2020 10:42 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 22 May 2020 10:42 AM IST
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फाइल फोटो
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रक्षा मंत्रालय से हरी झंडी के बाद सैन्य प्रशासन ने सैन्यकर्मियों को एक और सुविधा का लाभ दिया है। जिसके तहत सभी सैन्य कर्मियों को अब उनके तबादलों पर टेंपरेरी स्टे करने की स्थिति में उसके लिए किए गए भुगतान का रीइंबर्समेंट (प्रतिपूर्ति) मिलेगा। मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस भी इस संदर्भ में अपनी क्लीयरेंस दे चुका है।
सैन्य प्रशासन ने इस बाबत दिशा निर्देश सभी कमांड, कोर व यूनिटों को भेज दिया है। सैन्य अफसरों और जवानों को तबादलों के दौरान सबसे बड़ी दिक्कत यह आती कि उन्हें तुरंत अपने नए स्टेशन पर पहुंचते ही क्वार्टर या आवास नहीं मिलता। परमानेंट रहने की व्यवस्था करने तक उन्हें विभिन्न जगह टेंपरेरी स्टे करना पड़ता था और इसके लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च भी करना पड़ता है।
इसी परेशानी को देखते हुए अब सैन्य प्रशासन ने यह व्यवस्था की है कि जो भी सैन्यकर्मी अपने नए स्टेशन पर ज्वाइन करता है, तो वह संबंधित राज्य के गेस्ट हाउस, केंद्र सरकार के अधीनस्थ गेस्ट हाउस, सरकारी विभागों के गेस्ट हाउस, यूटी गेस्ट हाउस या रजिस्टर्ड संस्था द्वारा संचालित गेस्ट हाउस में ठहरता है। तो उसका अदा किया गया रेंट सैन्य कर्मी को रीइंबर्स कर दिया जाएगा।
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सैन्य प्रशासन ने इस बाबत दिशा निर्देश सभी कमांड, कोर व यूनिटों को भेज दिया है। सैन्य अफसरों और जवानों को तबादलों के दौरान सबसे बड़ी दिक्कत यह आती कि उन्हें तुरंत अपने नए स्टेशन पर पहुंचते ही क्वार्टर या आवास नहीं मिलता। परमानेंट रहने की व्यवस्था करने तक उन्हें विभिन्न जगह टेंपरेरी स्टे करना पड़ता था और इसके लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च भी करना पड़ता है।
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इसी परेशानी को देखते हुए अब सैन्य प्रशासन ने यह व्यवस्था की है कि जो भी सैन्यकर्मी अपने नए स्टेशन पर ज्वाइन करता है, तो वह संबंधित राज्य के गेस्ट हाउस, केंद्र सरकार के अधीनस्थ गेस्ट हाउस, सरकारी विभागों के गेस्ट हाउस, यूटी गेस्ट हाउस या रजिस्टर्ड संस्था द्वारा संचालित गेस्ट हाउस में ठहरता है। तो उसका अदा किया गया रेंट सैन्य कर्मी को रीइंबर्स कर दिया जाएगा।
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जब तक गेस्ट हाउस में रहेंगे उतने समय का एचआरए नहीं मिलेगा
रीइंबर्समेंट की सुविधा का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें भी लागू रहेंगी। जब तक सैन्य कर्मी संबंधित गेस्ट हाउस में बतौर टेंपरेरी स्टे करेगा, उतने समय तक का उसे एचआरए नहीं मिलेगा। बकायदा सैन्यकर्मियों को इसके लिए एक सर्टिफिकेट देना पड़ेगा कि वह संबंधित समय का एचआरए क्लेम नहीं करेंगे। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए गेस्ट हाउस में टेंपरेरी स्टे छह महीने से अधिक नहीं होना चाहिए।
सैन्य कर्मी अपनी एंटाइटलमेंट के लिहाज से अप्लाई करेगा। लेकिन टेंपरेरी स्टे के लिए सिंगल अकोमेडेशन की अनुमति नहीं होगी। टेंपरेरी स्टे राज्य, केंद्र, यूटी या किसी रजिस्टर्ड संस्था के गेस्ट हाउस में ही होगा। गेस्ट हाउस छोड़ने के बाद वहां से रेंट रिसिप्ट लेनी होगी। जिसके आधार पर रीइंबर्समेंट होगा। प्राइवेट गेस्ट हाउस का रीइंबर्समेंट नहीं होगा। टेंपरेरी स्टे वाला गेस्ट हाउस भी वहीं होना चाहिए, जहां सैन्यकर्मी का तबादला हुआ।
फेक वीडियो से 1965 युद्ध की भ्रामक जानकारी फैला रहे असामाजिक तत्व
कुछ असामाजिक तत्व फेक वीडियो के जरिए सन 1965 में भारत-पाक युद्ध को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। सेना ने इस संदर्भ में साफ किया है कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया पर इस तरह की भ्रमित वीडियो चलाकर सेना के गौरवमयी इतिहास को धूमिल करना चाहते हैं। इसी तरह गलत तथ्यों का प्रचार किया जा रहा है। सेना ने अपील की है कि इस तरह की भ्रमित वीडियो से सभी को बचना चाहिए।
सैन्य कर्मी अपनी एंटाइटलमेंट के लिहाज से अप्लाई करेगा। लेकिन टेंपरेरी स्टे के लिए सिंगल अकोमेडेशन की अनुमति नहीं होगी। टेंपरेरी स्टे राज्य, केंद्र, यूटी या किसी रजिस्टर्ड संस्था के गेस्ट हाउस में ही होगा। गेस्ट हाउस छोड़ने के बाद वहां से रेंट रिसिप्ट लेनी होगी। जिसके आधार पर रीइंबर्समेंट होगा। प्राइवेट गेस्ट हाउस का रीइंबर्समेंट नहीं होगा। टेंपरेरी स्टे वाला गेस्ट हाउस भी वहीं होना चाहिए, जहां सैन्यकर्मी का तबादला हुआ।
फेक वीडियो से 1965 युद्ध की भ्रामक जानकारी फैला रहे असामाजिक तत्व
कुछ असामाजिक तत्व फेक वीडियो के जरिए सन 1965 में भारत-पाक युद्ध को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। सेना ने इस संदर्भ में साफ किया है कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया पर इस तरह की भ्रमित वीडियो चलाकर सेना के गौरवमयी इतिहास को धूमिल करना चाहते हैं। इसी तरह गलत तथ्यों का प्रचार किया जा रहा है। सेना ने अपील की है कि इस तरह की भ्रमित वीडियो से सभी को बचना चाहिए।