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'कुवैत मत जाना, न वेतन मिलेगा न भरपेट खाना', वतन लौटे युवकों ने कुछ ऐसे बयां की आपबीती
Tue, 28 May 2019 11:36 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 28 May 2019 11:36 AM IST
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कुवैत में फंसे युवक
- फोटो : अमर उजाला
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कुवैत में फंसे तीन युवक एक समाजसेवी संस्था के सहयोग से अपने देश में वापस लौटे और यहां आकर उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई तो सभी हैरान रह गए। मोहाली की एक प्राइवेट संस्था की संचालक अमनजोत कौर रामूवालिया के प्रयासों से यह संभव हो पाया है।
सोमवार को संस्था की प्रमुख अमनजोत कौर रामूवालिया ने बताया कि कंवल कुमार गुरदासपुर जिले का रहने वाला है। वहीं, गांव कोटला गुरदासपुर के जतिंदर सिंह व संगरूर निवासी जतिंदर कुमार नाम के नौजवान के साथ वह काम करने कुवैत गया था, लेकिन वहां पर उन तीनों से फ्री में काम करवाया गया। वहां पर पांच महीने में उन्हें कोई सैलरी तक नहीं दी गई और न ही खाना दिया गया।
इन नौजवानों ने उक्त संस्था से संपर्क किया। वहीं, कंवल कुमार के रिश्तेदार जसविंदर सिंह ने चंडीगढ़ में संस्था के दफ्तर में आकर लोगों को पूरी जानकारी दी। इसके बाद संस्था की तरफ से कुवैत में भारतीय दूतावास से संपर्क किया गया। जिसके बाद नौजवान कंवल सिंह सकुशल लौटा है।
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सोमवार को संस्था की प्रमुख अमनजोत कौर रामूवालिया ने बताया कि कंवल कुमार गुरदासपुर जिले का रहने वाला है। वहीं, गांव कोटला गुरदासपुर के जतिंदर सिंह व संगरूर निवासी जतिंदर कुमार नाम के नौजवान के साथ वह काम करने कुवैत गया था, लेकिन वहां पर उन तीनों से फ्री में काम करवाया गया। वहां पर पांच महीने में उन्हें कोई सैलरी तक नहीं दी गई और न ही खाना दिया गया।
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इन नौजवानों ने उक्त संस्था से संपर्क किया। वहीं, कंवल कुमार के रिश्तेदार जसविंदर सिंह ने चंडीगढ़ में संस्था के दफ्तर में आकर लोगों को पूरी जानकारी दी। इसके बाद संस्था की तरफ से कुवैत में भारतीय दूतावास से संपर्क किया गया। जिसके बाद नौजवान कंवल सिंह सकुशल लौटा है।
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एजेंटों ने प्रति व्यक्ति लिए थे दो लाख
पीड़ित नौजवानों ने बताया कि एजेंटों ने कुवैत भेजने के लिए प्रति व्यक्ति दो लाख रुपये लिए थे। साथ ही विश्वास दिलाया था कि काम के बदले कंपनी समय से वेतन देगी। वहां जाकर ऐसा नहीं हुआ। उनसे दिन रात काम करवाया, लेकिन कोई सुविधा नहीं दी गई। फिर वह काम छोड़कर किसी और जगह पर काम करने लग पड़े। उन्हें पासपोर्ट तक नहीं दिए गए।
ऐसे बनाए नए सिरे से पासपोर्ट
वहां से काम छोड़ने के बाद उन्होंने एक साल किसी दूसरी कंपनी में काम किया। साथ ही पैसे इकट्ठे करके एजेंटों को पासपोर्ट बनाने के लिए एक लाख रुपये दिए। अमनजोत कौर रामूवालिया ने बताया कि एजेंटों की ठगी रोकने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे।
ऐसे बनाए नए सिरे से पासपोर्ट
वहां से काम छोड़ने के बाद उन्होंने एक साल किसी दूसरी कंपनी में काम किया। साथ ही पैसे इकट्ठे करके एजेंटों को पासपोर्ट बनाने के लिए एक लाख रुपये दिए। अमनजोत कौर रामूवालिया ने बताया कि एजेंटों की ठगी रोकने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे।