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'दुश्मन देश' पाकिस्तान के लिए ऐसे जासूसी करता था सेना का जवान, किसी को भनक तक नहीं
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 19 Oct 2018 10:58 AM IST
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कंचन सिंह
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'दुश्मन देश' पाकिस्तान के लिए जासूसी का काम भारतीय सेना का जवान कंचन ऐसे शातिर तरीके से करता था कि किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लग पाई। मेरठ छावनी से 6 अक्तूबर को जासूसी के आरोप में पकड़ा गया उत्तराखंड स्थित बागेश्वर का रहने वाला जवान कंचन आर्मी के ही टेलीफोन एक्सचेंज से जासूसी का नेटवर्क चलाता था।
सिगनल रेजिमेंट से जुड़े इस जवान की तैनाती आर्मी के टेलीफोन एक्सचेंज में बतौर ऑपरेटर के रूप में थी और उसके लिए विभिन्न छावनियों की जानकारियां जुटाना मुश्किल नहीं था। अपनी इसी पोजिशन के बूते कंचन ने आर्मी के टेलीफोन एक्सचेंज को ही जासूसी का एक आसान नेटवर्क बना रखा था। सैन्य सूत्रों के अनुसार आर्मी एक्सचेंज में ड्यूटी करते हुए कंचन विभिन्न छावनियों के आर्मी एक्सचेंज में कॉल करता था।
लंबे समय से काम करने की वजह से दूसरी एक्सचेंजों में उसके कई साथी जानकार हो गए थे। कंचन ने उन्हीं लोगों से बढ़िया दोस्ताना व्यवहार बना रखा, जिसके बूते वह संबंधित छावनियों में यूनिटों की मूवमेंट व डिप्लॉयमेंट, आर्मीे कमांडरों की तैनाती व तबादलों की जानकारियां जुटाता और उसे व्हॉट्सएप के जरिए आगे भेजता था। दूसरी एक्सचेंजों से भी इस तरह की जानकारियां ऑफिशियल समझकर कंचन से शेयर कर दी जाती थी।
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सिगनल रेजिमेंट से जुड़े इस जवान की तैनाती आर्मी के टेलीफोन एक्सचेंज में बतौर ऑपरेटर के रूप में थी और उसके लिए विभिन्न छावनियों की जानकारियां जुटाना मुश्किल नहीं था। अपनी इसी पोजिशन के बूते कंचन ने आर्मी के टेलीफोन एक्सचेंज को ही जासूसी का एक आसान नेटवर्क बना रखा था। सैन्य सूत्रों के अनुसार आर्मी एक्सचेंज में ड्यूटी करते हुए कंचन विभिन्न छावनियों के आर्मी एक्सचेंज में कॉल करता था।
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लंबे समय से काम करने की वजह से दूसरी एक्सचेंजों में उसके कई साथी जानकार हो गए थे। कंचन ने उन्हीं लोगों से बढ़िया दोस्ताना व्यवहार बना रखा, जिसके बूते वह संबंधित छावनियों में यूनिटों की मूवमेंट व डिप्लॉयमेंट, आर्मीे कमांडरों की तैनाती व तबादलों की जानकारियां जुटाता और उसे व्हॉट्सएप के जरिए आगे भेजता था। दूसरी एक्सचेंजों से भी इस तरह की जानकारियां ऑफिशियल समझकर कंचन से शेयर कर दी जाती थी।
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जासूसी के किसी ओर इनपुट पर चल रहा था काम, फंस गया कंचन
pakistan isi
चंडीगढ़ की वेस्टर्न कमांड आईएसआई द्वारा उतर भारत में सेना की करवाई जा रही जासूसी के एक इनपुट पर काम कर रही थी। इसी इनपुट को खंगालते हुए कंचन तो अचानक वेस्टर्न कमांड के राडार पर आ गया। पहले तो काफी समय तक इस जवान की गतिविधियों को वॉच किया। लेकिन जब सेना को जब कंचन द्वारा जासूसी करने के पुख्ता सुबूत मिल गए तो वेस्टर्न कमांड ने इसकी सूचना मेरठ छावनी से साझा कर कंचन को काबू कर लिया।
आर्मी कमांडरों की कॉन्फ्रेंस पर गड़ी थीं पाक की नजरें
सैन्य सूत्रों के अनुसार 9 अक्टूबर से दिल्ली में शुरू हुई आर्मी कमांडरों की कॉन्फ्रेंस पर भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई नजरें गड़ाए हुए थी। लिहाजा इस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी जानकारियों की भी जासूसी की प्रबल संभावनाएं थी। इसी सर्तकर्ता को लेकर काम कर रही सेना के राडार में कंचन आ गया और सेना ने आर्मी कमांडरों की कॉन्फ्रेंस से पहले ही 6 अक्तूबर देरशाम को कंचन को जासूसी के आरोप में धर लिया गया था।
जवान की फेसबुक पर पाक के अलावा कई विदेशी दोस्त
सेना की प्रारंभिक पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि आरोपी कंचन की फेसबुक पर दो पाकिस्तानी दोस्तों के साथ-साथ कुछ और भी विदेशी मित्र हैं, जिनसे कंचन चैटिंग किया करता था। अभी तक की पूछताछ में कंचन के किसी हनी ट्रैप में फंसे होने की बात भी सामने नहीं आई है। इसलिए सेना इस बात को खंगाल रही है कि यदि मामला हनी ट्रैप नहीं था, तो इसके अलावा कंचन को जासूसी के लिए क्या प्रलोभन दिया गया।
आर्मी कमांडरों की कॉन्फ्रेंस पर गड़ी थीं पाक की नजरें
सैन्य सूत्रों के अनुसार 9 अक्टूबर से दिल्ली में शुरू हुई आर्मी कमांडरों की कॉन्फ्रेंस पर भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई नजरें गड़ाए हुए थी। लिहाजा इस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी जानकारियों की भी जासूसी की प्रबल संभावनाएं थी। इसी सर्तकर्ता को लेकर काम कर रही सेना के राडार में कंचन आ गया और सेना ने आर्मी कमांडरों की कॉन्फ्रेंस से पहले ही 6 अक्तूबर देरशाम को कंचन को जासूसी के आरोप में धर लिया गया था।
जवान की फेसबुक पर पाक के अलावा कई विदेशी दोस्त
सेना की प्रारंभिक पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि आरोपी कंचन की फेसबुक पर दो पाकिस्तानी दोस्तों के साथ-साथ कुछ और भी विदेशी मित्र हैं, जिनसे कंचन चैटिंग किया करता था। अभी तक की पूछताछ में कंचन के किसी हनी ट्रैप में फंसे होने की बात भी सामने नहीं आई है। इसलिए सेना इस बात को खंगाल रही है कि यदि मामला हनी ट्रैप नहीं था, तो इसके अलावा कंचन को जासूसी के लिए क्या प्रलोभन दिया गया।