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Chandigarh News: पीजीआई में इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी मशीन ठप, कैंसर मरीज दूसरी मशीनों पर शिफ्ट

Sun, 30 Aug 2026 02:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 02:40 AM IST
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Image-guided radiation therapy machine at PGI out of order; cancer patients shifted to other machines
चंडीगढ़। पीजीआई के रेडियोथेरेपी विभाग में कैंसर मरीजों के लिए ट्यूमर पर बेहद सटीक तरीके से रेडिएशन पहुंचाने वाली इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (आईजीआरटी) मशीन खराब होने से इलाज का दबाव दूसरी मशीनों पर बढ़ गया है। करीब 13 साल पुरानी मशीन की हार्ड डिस्क खराब होने के कारण यह ठप पड़ी है। मशीन पर रोजाना इलाज करा रहे करीब 80 मरीजों को अब दो लिनियर एक्सीलरेटर और एक भाभाट्रॉन मशीन पर शिफ्ट कर रिप्लानिंग के बाद रेडिएशन दिया जा रहा है। वहीं, नए मरीजों को फिलहाल नजदीकी डेट नहीं मिल पा रही है।
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ट्यूमर की सटीक लोकेशन बताती है आईजीआरटी
विशेषज्ञों के अनुसार, रेडियोथेरेपी में इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी ऐसी तकनीक है, जिसमें रेडिएशन देने से पहले या उपचार के दौरान मरीज के शरीर के अंदर ट्यूमर की स्थिति की इमेजिंग की जाती है। इससे डॉक्टर ट्यूमर की सही लोकेशन और आसपास मौजूद स्वस्थ ऊतकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए रेडिएशन की दिशा और डोज अधिक सटीक तरीके से तय कर सकते हैं। खासकर ऐसे ट्यूमर में इसका महत्व अधिक है, जहां आसपास महत्वपूर्ण अंग मौजूद हों।
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हार्ड डिस्क कहां से लाएं, सोमवार तक स्थिति होगी स्पष्ट
रेडियोथेरेपी विभाग के प्रमुख प्रो. राकेश कपूर ने बताया कि बंद पड़ी मशीन की सीएमसी तीन साल के लिए बढ़ाई गई है और इसमें करीब डेढ़ साल का समय अभी बाकी है। यदि जरूरी हार्ड डिस्क उपलब्ध हो जाती है तो मशीन को दोबारा शुरू किया जा सकता है। विभाग के अनुसार मशीन का सर्वर काम नहीं कर रहा है। जिस कंपनी का सर्वर है, उसने इस मॉडल का निर्माण बंद कर दिया है। ऐसे में जरूरी पार्ट की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है। विभाग दूसरी कंपनी के इंजीनियरों से भी संपर्क कर रहा है। सोमवार तक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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नई मशीन के लिए टेंडर-बिड पूरी
पीजीआई में नई मशीन की खरीद के लिए टेंडर और बिड की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब एसएफसी से मंजूरी मिलने के बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विभाग के अनुसार, नई मशीन स्थापित होने में करीब पांच से छह महीने का समय लग सकता है।
इलाज बीच में रोकना नहीं चाहता विभाग
प्रो. राकेश कपूर ने बताया कि जिन मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है, उनका रेडिएशन रोकना उचित नहीं होगा। इसलिए उन्हें दूसरी मशीनों पर शिफ्ट किया जा रहा है। रोजाना करीब 80 मरीजों की रिप्लानिंग की जा रही है। इसके लिए रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। मरीजों का उपचार प्रभावित न हो, इसके लिए सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक शिफ्ट लगाकर दूसरी मशीनों की क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे विभाग की बाकी मशीनों पर अतिरिक्त भार बढ़ गया है।

नए मरीजों को डेट के लिए इंतजार
मशीन खराब होने का सबसे ज्यादा असर नए मरीजों पर पड़ रहा है। पुराने मरीजों को प्राथमिकता देते हुए दूसरी मशीनों पर शिफ्ट किया जा रहा है। ऐसे में नए मरीजों को फिलहाल नजदीकी डेट नहीं मिल रही। कैंसर उपचार में रेडियोथेरेपी निर्धारित समय पर शुरू होना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में डेट में देरी मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा रही है।
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