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Chandigarh: बुढ़ापे से पहले मांसपेशियां कमजोर कर देगी अल्सरेटिव कोलाइटिस की अनदेखी, पीजीआई का शोध

Sat, 18 May 2024 01:47 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 18 May 2024 01:47 PM IST
सार

अल्सरेटिव कोलाइटिस को बड़ी आंत की एक क्रॉनिक बीमारी के रूप में भी जाना जाता है। इस बीमारी में बड़ी आंत की अंदरूनी परत में सूजन और जलन हो जाती है। इससे कई छोटे-छोटे छाले बनने लगते है। इन छालों में सूजन के कारण पेट में दर्द और पेट से संबंधित कई परेशानियां होने लगती हैं। अगर समय पर इस बीमारी का इलाज नहीं कराया जाए तो ये जानलेवा साबित होती है। ये बीमारी पाचन पर बुरी तरह असर डालती है।

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Ignoring ulcerative colitis can weaken muscles before old age, PGI research
चंडीगढ़ पीजीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अल्सरेटिव कोलाइटिस के जिन मरीजों में बीमारी नियंत्रित नहीं होती, उनमें बुढ़ापे से पहले मांसपेशियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं मांसपेशियों की कमजोरी के कारण मरीज की कार्य क्षमता कम होने लगती है। अगर स्थिति पर काबू न पाया गया तो मरीज सीवियर सार्कोपेनिया की स्थिति में चला जाता है, जिससे उसकी गेट स्पीड यानि चलने की क्षमता भी कम होने लगती है। 
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इसकी पुष्टि पीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के शोध में हुई है। इसमें बताया गया है कि सार्कोपेनिया अल्सरेटिव कोलाइटिस में स्थिति गंभीर होने पर मरीज की मौत होने के साथ ही हृदय रोग का भी खतरा बढ़ जाता है। विभाग के इस शोध को 2024 में इंटेस्टाइनल रिसर्च जनरल में प्रकाशित किया गया है।
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इस शोध के वरिष्ठ लेखक व विभाग के डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि शोध छात्रा डॉ. प्रधू नीलम ने उनके मार्गदर्शन में इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों पर शोध किया। इस शोध में गंभीर अल्सरेटिव कोलाइटिस के 114 मरीजों को शामिल किया गया था। इसमें पुरुषों की संख्या 64 और महिलाओं की संख्या 50 थी। मरीजों की औसत उम्र 37 साल थी। मरीजों में से 22 प्रतिशत में सार्कोपेनिया अल्सरेटिव कोलाइटिस की पुष्टि हुई।
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डॉ. विशाल ने बताया कि ये वे मरीज थे, जिनमें बीमारी नियंत्रित नहीं थी। इसके साथ ही जब उन मरीजों की गेट स्पीड चेक की गई तो चार मीटर के वॉक टेस्ट में 12 प्रतिशत को चलने में परेशानी आई। डॉ. विशाल ने कहा कि इस मर्ज के कारण मांसपेशियों का प्रभावित होना बेहद गंभीर बात है क्योंकि यह आमतौर पर वृद्धावस्था की समस्या होती है इसलिए इस बीमारी के इलाज में किसी तरह की अनदेखी न करें।


रोग प्रतिरोधक क्षमता ही बन जाती है खतरा
डॉ. विशाल ने बताया कि आंत की इस बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता ही खुद के आंत की दुश्मन बन जाती है। इस बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहर के कीटाणुओं पर हमला करने के बजाय बड़ी आंत पर हमला करना शुरू कर देती है। इसकी वजह से आंत में सूजन और जलन की परेशानी होती है। इस बीमारी के लक्षणों की समय पर पहचान कर ली जाए तो मलाशय और मलनाली के कैंसर होने के जोखिम से बचा जा सकता है।

लक्षणों पर करें गौर
- दस्त, अक्सर रक्त या मवाद के साथ
- मलाशय से रक्तस्राव होने लगता है। मल के साथ थोड़ी मात्रा में रक्त निकलता है
- पेट में दर्द और ऐंठन
- मलाशय में दर्द
- शौच करने की शीघ्रता
- अत्यावश्यकता के बावजूद शौच करने में असमर्थता
- वजन घटना
- थकान
- बुखार
- बच्चों में विकास न हो पाना

इनका रखें ध्यान
-खान-पान में बदलाव कर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है
- कोलाइटिस से जूझने वाले मरीज कुछ चीजों से परहेज करें। इस बीमारी में दूध और दूध से बने फूड्स का सेवन से बचें
- पूरे दिन में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं। एक बार भर पेट खाने से बचें। पानी अधिक पीएं
- तनाव से दूर रहें। तनाव आपकी बीमारी को बढ़ा सकता है
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