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वेरका के साथ हुआ करार तो ठेके पर कैसे मिली दुकान, जांच शुरू
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में वेरका बूथ ठेकेदार की ओर से संचालित करने का मामला तूल पकड़ गया है। कर्मचारियों ने ठान ली है कि ठेकेदारी प्रथा यहां से खत्म करवाई जाए।
इसके लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। कर्मचारियों व शिक्षकों ने साफ कर दिया कि यदि वेरका यहां सीधे प्रोडक्ट बेचता तो सभी को सस्ते रेट में मिलते जो आज ठेकेदारी प्रथा से महंगे दामों में मिल रहे हैं। यह मामला मंगलवार को उजागर तब हुआ जब वेरका के बूथ पर राशन बेचा जा रहा था। कई कर्मचारियों ने इसकी कुंडली पूरी निकाली। अभिलेख भी खंगाले गए। साथ ही जांच में प्रथम दृष्टया यह साफ हुआ है कि पीयू ने दुकान नंबर 31 वेरका के लिए दी थी न कि किसी ठेकेदार को।
हालांकि जांच अब शुरू हो रही है। परत दर परत खुलेंगी। इसमें मोटा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। साथ ही दुकान भी निलंबित की जा सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वह प्रोडक्ट खरीद रहे हैं जबकि वेरका यहां बूथ सीधे संचालित करता तो सस्ते आइटम मिलते। उन्होंने विभाग के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। वहीं संचालक भी अपने बचाव को रास्ते तलाश रहे हैं।
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इसके लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। कर्मचारियों व शिक्षकों ने साफ कर दिया कि यदि वेरका यहां सीधे प्रोडक्ट बेचता तो सभी को सस्ते रेट में मिलते जो आज ठेकेदारी प्रथा से महंगे दामों में मिल रहे हैं। यह मामला मंगलवार को उजागर तब हुआ जब वेरका के बूथ पर राशन बेचा जा रहा था। कई कर्मचारियों ने इसकी कुंडली पूरी निकाली। अभिलेख भी खंगाले गए। साथ ही जांच में प्रथम दृष्टया यह साफ हुआ है कि पीयू ने दुकान नंबर 31 वेरका के लिए दी थी न कि किसी ठेकेदार को।
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हालांकि जांच अब शुरू हो रही है। परत दर परत खुलेंगी। इसमें मोटा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। साथ ही दुकान भी निलंबित की जा सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वह प्रोडक्ट खरीद रहे हैं जबकि वेरका यहां बूथ सीधे संचालित करता तो सस्ते आइटम मिलते। उन्होंने विभाग के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। वहीं संचालक भी अपने बचाव को रास्ते तलाश रहे हैं।
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