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377 शिकायतों के बाद भी केवल एक एफआईआर कैसे वैध, बताएं डीजीपी: हाईकोर्ट
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विदेश भेजने के नाम पर छात्रों से ठगी मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। छात्रों को विदेश भेजने के नाम पर ठगी मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन सहित अन्य से जवाब तलब किया है। साथ ही डीजीपी से पूछा है कि इस मामले में आई 377 शिकायतों में केवल एक एफआईआर दर्ज करना कहां तक वैध है।
याचिका दाखिल करते हुए ज्योति ठाकुर ने इस मामले में नियमित जमानत देने की मांग की है। याचिका में बताया गया कि छात्रों को विदेश भेजने के नाम पर उन से ठगी करने के आरोप में चंडीगढ़ पुलिस ने उसके व सह आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में याची ने अपनी भूमिका से इन्कार करते हुए नियमित जमानत देने की अपील की थी। याचिका का विरोध करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से बताया गया कि इस मामले में कुल 377 शिकायतें प्राप्त हुई हैं और ऐसे में याची को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इसपर पूछा कि कितने मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है जिसके जवाब में बताया गया कि केवल एक एफआईआर दर्ज की गई है। हाईकोर्ट ने इतनी अधिक शिकायतें होने के बावजूद केवल एक एफआईआर दर्ज होने को लेकर हैरानी जताई। अब हाईकोर्ट ने इस मामले को डीजीपी को अपने स्तर पर देखने का आदेश दिया है और उनसे पूछा है कि क्या इतनी शिकायतों के बाद केवल एक एफआईआर दर्ज करना वैध है। अगली सुनवाई पर डीजीपी को इस बारे में हलफनामा दाखिल करने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। छात्रों को विदेश भेजने के नाम पर ठगी मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन सहित अन्य से जवाब तलब किया है। साथ ही डीजीपी से पूछा है कि इस मामले में आई 377 शिकायतों में केवल एक एफआईआर दर्ज करना कहां तक वैध है।
याचिका दाखिल करते हुए ज्योति ठाकुर ने इस मामले में नियमित जमानत देने की मांग की है। याचिका में बताया गया कि छात्रों को विदेश भेजने के नाम पर उन से ठगी करने के आरोप में चंडीगढ़ पुलिस ने उसके व सह आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में याची ने अपनी भूमिका से इन्कार करते हुए नियमित जमानत देने की अपील की थी। याचिका का विरोध करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से बताया गया कि इस मामले में कुल 377 शिकायतें प्राप्त हुई हैं और ऐसे में याची को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इसपर पूछा कि कितने मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है जिसके जवाब में बताया गया कि केवल एक एफआईआर दर्ज की गई है। हाईकोर्ट ने इतनी अधिक शिकायतें होने के बावजूद केवल एक एफआईआर दर्ज होने को लेकर हैरानी जताई। अब हाईकोर्ट ने इस मामले को डीजीपी को अपने स्तर पर देखने का आदेश दिया है और उनसे पूछा है कि क्या इतनी शिकायतों के बाद केवल एक एफआईआर दर्ज करना वैध है। अगली सुनवाई पर डीजीपी को इस बारे में हलफनामा दाखिल करने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है।
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