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इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए मकान तोड़ना शुरू, सेक्टर- 17 स्थित पुलिस क्वार्टर को तोड़कर बनेगा सेंटर
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चंडीगढ़। इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए बेल ने सेक्टर-17 स्थित पुलिस क्वार्टर को तोड़ना शुरू करा दिया है। इन क्वार्टर को तोड़ने के बाद भूमि के समतलीकरण का कार्य शुरू होगा। हालांकि कोरोना महामारी के कारण काम शुरू होने में थोड़ी देरी हो गई है। 199 करोड़ रुपये के कुल बजट से बनने वाले इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए प्रारंभिक बजट 14 करोड़ रुपये है।
जानकारी के अनुसार सेक्टर-17 में जब इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि चिन्हित हुई तो पंजाब पुलिस के कर्मियों ने घर खाली करने से इनकार कर दिया। उनके विरोध के बीच जबरन घर खाली कराए गए। उसके बाद जैसे ही काम शुरू हुआ तो कोरोना ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए। अब कंपनी ने फिर से काम शुरू कर दिया। वहीं इस प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग विभागों से डाटा भी इकट्ठा किया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी के जीएम एनपी शर्मा का कहना है कि वैसे तो एक साल में इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर बनकर तैयार होना था लेकिन अब थोड़ा समय लगेगा। यह देश का अत्याधुनिक सुविधा से युक्त पहला इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर होगा। इसमें पुलिस और आम जनजीवन से जुड़ी समस्याओं को लेकर 16 हेल्पलाइन सेंटर होंगे। इसके तहत विभिन्न स्थानों पर कुल 943 कैमरे लगाए जाने हैं जिनमें सरकारी स्कूल, अस्पताल, पार्क, सामुदायिक केंद्र आदि शामिल हैं। इसके अलावा शहर में 40 अलग-अलग स्थानों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर), रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी) और ओवर स्पीड डिटेक्शन सिस्टम (ओएसडीएस) कैमरे भी लगाए जाएंगे।
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जानकारी के अनुसार सेक्टर-17 में जब इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि चिन्हित हुई तो पंजाब पुलिस के कर्मियों ने घर खाली करने से इनकार कर दिया। उनके विरोध के बीच जबरन घर खाली कराए गए। उसके बाद जैसे ही काम शुरू हुआ तो कोरोना ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए। अब कंपनी ने फिर से काम शुरू कर दिया। वहीं इस प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग विभागों से डाटा भी इकट्ठा किया जा रहा है।
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स्मार्ट सिटी के जीएम एनपी शर्मा का कहना है कि वैसे तो एक साल में इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर बनकर तैयार होना था लेकिन अब थोड़ा समय लगेगा। यह देश का अत्याधुनिक सुविधा से युक्त पहला इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर होगा। इसमें पुलिस और आम जनजीवन से जुड़ी समस्याओं को लेकर 16 हेल्पलाइन सेंटर होंगे। इसके तहत विभिन्न स्थानों पर कुल 943 कैमरे लगाए जाने हैं जिनमें सरकारी स्कूल, अस्पताल, पार्क, सामुदायिक केंद्र आदि शामिल हैं। इसके अलावा शहर में 40 अलग-अलग स्थानों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर), रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी) और ओवर स्पीड डिटेक्शन सिस्टम (ओएसडीएस) कैमरे भी लगाए जाएंगे।
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