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Hindi News ›   Chandigarh ›   Home Secretary summoned over delay in land clearance for additional building of High Court

Chandigarh: हाईकोर्ट की अतिरिक्त इमारत के लिए भूमि मंजूरी में देरी, गृह सचिव तलब, सारंगपुर में होना है निर्माण

Tue, 12 Dec 2023 09:41 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 12 Dec 2023 09:41 AM IST
सार

नवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आगे की योजना का ब्योरा नहीं सौंपा गया और न ही भूमि की पहचान करने को लेकर कोई जानकारी दी गई। ऐसे में हाईकोर्ट ने सुनवाई को स्थगित करते हुए अगली सुनवाई पर गृह सचिव को खुद अदालत में हाजिर होकर जवाब देने का आदेश दिया है।

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Home Secretary summoned over delay in land clearance for additional building of High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट की इमारत पर बढ़ते स्टाफ व दस्तावेजों के बोझ को आपातकाल जैसी स्थिति बताते हुए की गई टिप्पणी के बाद अब अतिरिक्त भवन के लिए भूमि की पहचान में देरी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई पर गृह सचिव को अदालत में खुद हाजिर रहने का आदेश दिया है।

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पिछली सुनवाई पर प्रशासन ने बताया था कि सेक्टर-17 में मौजूद कोर्ट की इमारत में प्रशासन हाईकोर्ट के लिए 3500 स्क्वेयर फीट स्थान को विकसित करेगा। इस स्थान पर हाईकोर्ट की ब्रांच और स्टाफ को लाया जा सकता है। इसके साथ ही भविष्य की योजना की जानकारी देते हुए बताया गया था कि सारंगपुर में हाईकोर्ट के लिए एक अतिरिक्त इमारत को तैयार किया जाएगा। वहां पर निर्माण होने और रिकार्ड के ट्रांसफर होने के बाद हाईकोर्ट की इस इमारत से काफी हद तक बोझ कम हो सकेगा।
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सोमवार को सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आगे की योजना का ब्योरा नहीं सौंपा गया और न ही भूमि की पहचान करने को लेकर कोई जानकारी दी गई। ऐसे में हाईकोर्ट ने सुनवाई को स्थगित करते हुए अगली सुनवाई पर गृह सचिव को खुद अदालत में हाजिर होकर जवाब देने का आदेश दिया है।

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क्या है याचिका में

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के सचिव विनोद धाटरवाल व अन्य ने याचिका में बताया था कि रोज करीब 10000 वकील, 3300 कर्मचारी, वकीलों के 3000 क्लर्क हरियाणा और पंजाब के एजी कार्यालय के कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, याचिकाकर्ताओं व अन्य लोगों का बोझ हाईकोर्ट परिसर पर होता है। 



10000 कार और हजारों दोपहिया वाहनों के बोझ को हाईकोर्ट का मौजूदा परिसर सहन करने में सक्षम नहीं है। हाईकोर्ट में लंबित पांच लाख से अधिक याचिकाओं को समायोजित करने के लिए शायद ही कोई जगह है। सुरक्षा और आपातकाल की नजर से देखें तो एक छोटी सी घटना के कारण भगदड़ मच सकती है जिसके अकल्पनीय नुकसान हो सकते हैं। 2012 में हाईकोर्ट की इमारत का विस्तार हुआ था लेकिन समय के साथ बोझ बढ़ता जा रहा है और परिसर विस्तार समय की जरूरत हो गया है।

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