फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Hindihainhum: Readers sending their poems for Hindi hain hum campaign

#हिंदी हैं हम: हमारी प्यारी मीठी भाषा है हिंदी, मातृ भाषा का ताज है हिंदी

Sun, 13 Sep 2020 11:41 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 13 Sep 2020 11:41 AM IST
विज्ञापन
Hindihainhum: Readers sending their poems for Hindi hain hum campaign
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala

अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान को पाठकों का लगातार समर्थन मिल रहा है। पाठक लगातार हिंदी में स्वरचित अपनी रचनाएं हमें ई-मेल से भेज रहे हैं। अभियान के तहत रोजाना 25 से 30 ई-मेल प्राप्त हो रही हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं और सीनियर सिटीजन भी। महिलाओं की ओर से भी बड़ी संख्या में कविताएं व लेख हमें प्राप्त हो रहे हैं। प्रकाशन में उन लेख व कविताओं को प्राथमिकता दी गई है, जिन्होंने पहली बार रचनाएं भेजीं और अधिकतम 100 शब्दों में अपने विचार रखे।

विज्ञापन


गजल
दिल भी अब दिल लगाने से डरता है
फिर भी जमाना हम पे जुल्म करता है
दास्तां सुनी है जब से उनकी
दास्तां अपनी सुनाने में डर लगता है
हम जाएं तो किधर जाएं
दर्द-ए-जमाना अब तो अपना सा लगता है
कभी पाकर हमने खोया था तुमको
अब तुम्हारे मिलने का डर सा लगता है
-संदीप गुप्ता, चंडीगढ़

या खुदा
आसमान से आई एक अनोखी लहर
जिसने बरपाया मासूमों पे कहर
या खुदा ये कैसी है नियति तुम्हारी
उजाड़ दी इक पल में हंसती खेलती दुनिया सारी
मगर इंसान वो जो कभी न छोड़े खुद को खुदा के सहारे
तूफानी मौजों में भी ढूंढ ले किनारे
और वो ऊपर बैठा उसकी हिम्मत से हारे
तभी जन्नत से आए आवाज
वाह रे! वाह रे!
-किशोर कुमार शर्मा ‘विद्रोही’ जीरकपुर

हिंदी हैं हम
हमारी प्यारी मीठी भाषा है हिंदी, मातृ भाषा का ताज है हिंदी
जन-जन का गौरव है हिंदी, तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी हैं हम
जन भाषा की कलम की ताकत है हिंदी, हर दिल में खास है हिंदी
हिंद देश की पहचान है हिंदी.. तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी है हम
अब तो विदेशों में भी अपना लोहा मनवा रही है हिंदी
क्योंकि हर नमस्ते का जवाब है हिंदी, तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी हैं हम
यूं तो भावों को व्यक्त करने की कोई एक भाषा नहीं होती
फिर भी इसे व्यक्त करने का सबसे खूबसूरत माध्यम है हिंदी
तो फिर गर्व से क्यूं ना कहें.. हिंदी हैं हम
- मिनाक्षी खुराना, शिक्षिका, पंचकूला

दहशत है हर मासूम के चेहरे पर
मनुष्य था प्रसन्न, अपने कार्यों से
अहम से भरा, अपने ही सवालों से
प्रकृति ने कहा भी रुक! सोच कहां चला है तू
देख स्वयं को और किए गए अपने पापों को तू 
पर न रुका, ना सुन सका वो 
प्रकृति के इशारों को ना समझ सका वो
परिणाम, शायद उन कर्मों का ही दिख रहा है
त्राहि माम-त्राहि माम अब स्वयं ही कर रहा है
दहशत है हर मासूम के चेहरे पर
और सहमा-सहमा सा है हर हिंदुस्तानी
अपने ही घर पर
-सीमा अग्निहोत्री, अध्यापक, सेक्टर-14 पंचकूला

सूरज की लाली
लाती जीवन में खुशहाली
संघर्ष में भी हौसला बढ़ाती
हिम्मत देती कोई स्वार्थ न रखना
अपने मन में सब के प्रति प्यार रखना
जब सूरज की किरणें फूलों पर पड़तीं
खिलते फूल सबको लुभाते
शाम को जब छुप जाते सबके मन को भाते हो
अगले दिन जब आते हो
तो स्वागत करें हम सब तुम्हारा
इतना कुछ दिया जीवन को उसके लिए प्रणाम हमारा
-रोशनी, रायपुर खुर्द, चंडीगढ़

भारत गान
चांद-सितारों से भी बढ़कर जिसका गौरव गान है,
कोई और नहीं है यह अपना भारतवर्ष महान है
बहती पावन धारा जिसमें गंगा-यमुना-सरस्वती की
जिसमें रचना हुई सर्वप्रथम कोटि ग्रंथों-उपनिषदों की
ऊंच-नीच का भेद नहीं, यहां जाति-धर्म का मेल नहीं
कबीर, नानक और कलाम-सा विश्व में कोई और नहीं
जिसमें ऋतुओं का विविध अद्भुत सा प्रावधान है
कोई और नहीं है यह अपना ही भारतवर्ष महान है
आज तिरंगा लहराता है अपनी पूरी शान से
हम ने हासिल की आजादी वीरों के बलिदान से
जिस उत्तम और उत्कृष्ट देश का यह सारा गुणगान है
कोई और नहीं है यह अपना ही भारतवर्ष महान है
अमनदीप कौर, चंडीगढ़

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed