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हिंदी हैं हमः गुरु-शिष्य के बीच अनोखी डोर, ले जाती है नए भविष्य की ओर...पढ़ें दिलचस्प रचनाएं

Mon, 07 Sep 2020 11:59 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 07 Sep 2020 11:59 AM IST
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hindi hain hum amar ujala, Poems on Teacher Student Relation
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत रचनाओं का आना लगातार जारी है। रचनाएं लिखने में पाठक काफी मेहनत कर रहे हैं। ज्यादातर लोग कविताएं ही भेज रहे हैं। कविताओं के अलावा आप कुछ विषय लेख भी भेज सकते हैं। लेकिन लेख लिखते के वक्त शब्द सीमा का ध्यान जरूर रखें।
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अब भी कई पाठक 100 शब्दों से कई गुना बढ़े लेख भेज रहे हैं। जगह की कमी के कारण इससे बड़ा लेख या रचनाएं प्रकाशित करने में असमर्थ हैं। कई लोगों ने शब्द सीमा के दायरे में बहुत ही अच्छी व उम्दा कविताएं व लेख लिखे हैं। आपके पास अब भी मौका है। देर मत कीजिए। मेल के साथ अपनी फोटो भी भेजें।
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शिक्षक... अवगुणी से गुणी बनाते हैं

अवगुणी से गुणी बनाते हैं, जो पूछो वो बतलाते हैं
नैतिक शिक्षा सिखाते हैं और शिक्षक कहलाते हैं
विज्ञान, भूगोल, हिंदी, अंग्रेजी आदि विषय पढ़ाते हैं
अगर कुछ आए ना समझ हमें तो सब दोबारा समझाते हैं
गिरकर उठना सिखाते हैं, अंधेरे में भी रोशनी दिखाते हैं
हमें इस जग में जीवन जीना सिखाते हैं और शिक्षक कहलाते हैं
कभी प्यार से तो कभी डांट से, सही राह पर चलना सिखाते हैं
- प्रगति, छात्रा मोहाली

मैं हिंदी हूं..

मैं हिंदी हूं, हिंद की पहचान
बड़े-बड़े लेखकों ने बढ़ाई मेरी शान
मैं हिंदी हूं, हिंद की पहचान
जैसी लिखी, वैसी ही बोली जाती हूं
बेमतलब में नए नहीं, कोई नियम कानून बनाती हूं
देवभाषा संस्कृत की हूं, मैं तो संतान
लेकिन न जाने, आजकल क्यों मुझे कमतर आंका जाता है
मेरा अपना बच्चा भी मुझसे नजर चुराता है
वो समझता है अंग्रेजी बोलने में अपना सम्मान
और कुछ नेताओं की स्वार्थजनित नेतागिरी मार गई
दिया जो सम्मान मुझे किसी सत्ताधीश ने, लोकतंत्र की जैसे हार हुई
विदेशी भाषा की गुलामी में करते,  नित मेरा अपमान
- रजनी राणा, गृहिणी मौली पिंड
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कब तक सोचोगे....

किस्मत जरूरी जीत के लिए
सुंदरता जरूरी प्यार के लिए
झुकी नजरें संस्कार के लिए
कब तक सोचोगे?
लकीरें जरूरी विश्वास के लिए
शाबाशी सिर्फ कामयाब के लिए
पंख जरूरी उड़ान के लिए
पर ये कब सोचोगे?
विद्या जरूरी हर इंसान के लिए
मौके जरूरी हर इंसान के लिए
खुले पिंजरे अब हर इंसान के लिए
- चारू, विद्यार्थी डेराबस्सी

गुरु ही तो आधार है

गुरु ही तो आधार है
गुरु और शिष्य के बीच है एक अनोखी डोर
जो ले जाती है नए भविष्य की ओर
गुरु ज्ञान का सागर है
दीपक की ज्योति को जलाए
खुले आसमान में, परिंदे की उड़ान को पर दे जाए
हर पक्ष की गहराई, बिन गुरु समझ न आए
गुरु ही तो आधार है, जिसका स्वप्न शिष्य सफल कर जाए
- डॉ. ऋचा, चंडीगढ़

नया भारत

आज एक नया भारत दिख रहा है
उदास सा वक्त है भी तो कट रहा है
नई तकनीक नई ऊर्जा के साथ
आज एक नया भारत दिख रहा है
कोरोना है भी तो क्या, दृढ़ शक्ति के साथ
आज एक नया भारत दिख रहा है
राफेल, चीनूक से भी भारत सज रहा है।
आज एक नया भारत दिख रहा है।
क्यों न हमें गर्व हो अपने अपने वीर जवानों पर
उनकी वजह से ही तो नया भारत दिख रहा है
- नेहा साहोता कालका

जिंदगी है एक अवसर, एक चुनौती जिंदगी

जिंदगी है एक अवसर, एक चुनौती जिंदगी
जिसका जो अनुभव रहा, वैसी ही जानी जिंदगी
मिलन है, कहीं जिंदगी, मिल के बिछड़ना, जिंदगी।
हमनें तरुणाई में देखी, पिघलती सी जिंदगी
धूप में है जिंदगी, कहीं छांव में है जिंदगी
बस गई कुछ शहर में, कुछ गांव में है जिंदगी।
हांफती देखी कहीं, कहीं मौज में थी जिंदगी
साफ सुथरी सी कहीं, कहीं गंदगी में जिंदगी।
दौड़ती है रेल सी, ठहरी हुई कभी जिंदगी।
सदा देती थी कहीं, कहीं सजा देती जिंदगी।
समझ पाया न तुझे, तू एक पहले जिंदगी।
जितना सुलझाया तुझे, उतनी ही उलझी जिंदगी।
- डॉ. योगेंद्र अग्निहोत्री, अवकाश प्राप्त प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर पंचकूला
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