{"_id":"5f5eea018ebc3e51e140eafe","slug":"hindi-hain-hum-amar-ujala-international-webinar-on-hindi-diwas","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विशेषज्ञ बोले- यूरोप में हिंदी के विकास में सहायक हैं बाजार, अनुवाद के जरिए मिल रहा रोजगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विशेषज्ञ बोले- यूरोप में हिंदी के विकास में सहायक हैं बाजार, अनुवाद के जरिए मिल रहा रोजगार
Mon, 14 Sep 2020 09:30 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 14 Sep 2020 09:30 AM IST
सार
- अमर उजाला की ओर से आयोजित किया गया अंतरराष्ट्रीय वेबिनार
- विदेशी विशेषज्ञों ने ‘विदेशों में हिंदी’ विषय पर रखे अपने विचार
- कहा- उत्पादों पर तीन-तीन भाषाओं में जानकारी लिखी जा रही
- विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी सीखने के लिए बढ़ रहे हैं विद्यार्थी
- विदेशों में खुल रहे पाठशाला, प्रशिक्षण केंद्र भी हो रहे संचालित
विज्ञापन
हिंदी दिवस के मौके पर आयोजित वेबिनार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश ही नहीं अब विदेशों में हिंदी भाषा का डंका बजने लगा है। विश्वविद्यालयों में हिंदी के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। वहीं हिंदी की पाठशालाएं भी खुल रही हैं। साथ ही प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित हैं। यूरोप के बाजारों के कारण हिंदी का विकास हो रहा है। उत्पादों पर जानकारियां तीन-तीन भाषाओं में लिखी जा रही हैं। उनमें से एक भाषा हिंदी भी है।
रोजगार के लिए अनुवाद सबसे बड़ा माध्यम है। हिंदी साहित्य का अनुवाद तेजी के साथ हो रहा है। यह बात रविवार को आयोजित अमर उजाला के अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में विदेशी विशेषज्ञों ने कही। ‘विदेशों में हिंदी’ विषय पर आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि हिंदी साहित्य का अनुवाद तेजी से हो रहा है। साथ ही दूसरी भाषाओं के साहित्यों को भी हिंदी भाषा में मांग के मुताबिक अनुवाद किया जा रहा है।
प्यार की भाषा के रूप में जानी जाती है हिंदी
मेरे शहर में प्यार की भाषा के रूप में हिंदी को जाना जा रहा है। हिंदी भले ही नौकरी की भाषा पूरी तरह न बन पाई हो, लेकिन यह दिल में हमेशा रहेगी। लड़के और लड़कियों को हिंदी भी सिखाई जा रही है। विद्यार्थियों में इसके प्रति रुचि जागृत हो रही है। विश्वविद्यालयों में हिंदी के विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है। यह एक अच्छा संकेत है। हिंदी में लोग यहां बातचीत भी करने लगे हैं। अदालतों व जेलों में भी कई बार हिंदी के जानकारों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वहां बुलाया भी जाता है। इसके लिए बाकायदा मेहनताना भी मिलता है।
विज्ञापन
- डॉ. एकतेरीना कोस्तिना, प्राध्यापिका, सेंट पीटर्सबर्ग राजकीय विश्वविद्यालय, रूस
विज्ञापन
रोजगार के लिए अनुवाद सबसे बड़ा माध्यम है। हिंदी साहित्य का अनुवाद तेजी के साथ हो रहा है। यह बात रविवार को आयोजित अमर उजाला के अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में विदेशी विशेषज्ञों ने कही। ‘विदेशों में हिंदी’ विषय पर आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि हिंदी साहित्य का अनुवाद तेजी से हो रहा है। साथ ही दूसरी भाषाओं के साहित्यों को भी हिंदी भाषा में मांग के मुताबिक अनुवाद किया जा रहा है।
विज्ञापन
प्यार की भाषा के रूप में जानी जाती है हिंदी
मेरे शहर में प्यार की भाषा के रूप में हिंदी को जाना जा रहा है। हिंदी भले ही नौकरी की भाषा पूरी तरह न बन पाई हो, लेकिन यह दिल में हमेशा रहेगी। लड़के और लड़कियों को हिंदी भी सिखाई जा रही है। विद्यार्थियों में इसके प्रति रुचि जागृत हो रही है। विश्वविद्यालयों में हिंदी के विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है। यह एक अच्छा संकेत है। हिंदी में लोग यहां बातचीत भी करने लगे हैं। अदालतों व जेलों में भी कई बार हिंदी के जानकारों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वहां बुलाया भी जाता है। इसके लिए बाकायदा मेहनताना भी मिलता है।
विज्ञापन
- डॉ. एकतेरीना कोस्तिना, प्राध्यापिका, सेंट पीटर्सबर्ग राजकीय विश्वविद्यालय, रूस
हिंदी साहित्य के अनुवाद के जरिए रोजगार से जुड़ रहे लोग
हिंदी यहां विदेशी भाषा के तौर पर पढ़ाई जा रही है। भारतीय इतिहास, भारतीय लोकतंत्र, विश्व साहित्य आदि पढ़ाया जाता है। विश्वविद्यालयों में हिंदी के अलग से विभाग खुले हैं, जो विदेशी भाषा के रूप में हैं। हिंदी साहित्य के अनुवाद के जरिए लोग रोजगार से जुड़ रहे हैं। हिंदी की पाठशाला खुुली है। इसके अलावा खुशी के मौके जैसे शादी आदि जगहों पर भी परिवारों के बीच भाषाओं का मेल करवाया जाता है। हिंदी की उन्नति लगातार हो रही है। हिंदी भाषा के लिए विशेषज्ञों को एक मजबूत शब्दकोष बनाना होगा।
- डॉ. निलुफर खोजाएवा, विभागाध्यक्ष, ताशकंद राजकीय प्राच्य विश्वविद्यालय अनुवाद विज्ञान और पत्रकारिता विभाग, उज्बेकिस्तान
हर साल 400 से अधिक विद्यार्थी हिंदी विषय में होते हैं पासआउट
मैं 15 साल से हिंदी पढ़ा रही हूं। यहां के लोगों में हिंदी को लेकर क्रेज है। भारतीयों की तरह ही यहां भी हिंदी को प्यार किया जा रहा है। हिंदी के तमाम शब्द हमारी भाषा में आ गए हैं। यहां हर साल 400 से अधिक विद्यार्थी एमए, एमफिल, पीएचडी हिंदी में कर पासआउट होते हैं। यह संख्या हर साल बढ़ रही है। हिंदी का परिवार यहां बढ़ रहा है। पर्यटन के लिए भी यह भाषा काम आ रही है। गाइड आदि की नौकरियां भाषा के जरिए चल रही है। हिंदी गाने सुने जाते हैं। लोग भी हिंदी में बातचीत करने लगे हैं।
- डॉ. एलएम रिद्मा निशादिनी लंसकार, शैक्षिक एवं शोध अधिकारी, राष्ट्रभाषा शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान, राजभाषा मंत्रालय, श्रीलंका
- डॉ. निलुफर खोजाएवा, विभागाध्यक्ष, ताशकंद राजकीय प्राच्य विश्वविद्यालय अनुवाद विज्ञान और पत्रकारिता विभाग, उज्बेकिस्तान
हर साल 400 से अधिक विद्यार्थी हिंदी विषय में होते हैं पासआउट
मैं 15 साल से हिंदी पढ़ा रही हूं। यहां के लोगों में हिंदी को लेकर क्रेज है। भारतीयों की तरह ही यहां भी हिंदी को प्यार किया जा रहा है। हिंदी के तमाम शब्द हमारी भाषा में आ गए हैं। यहां हर साल 400 से अधिक विद्यार्थी एमए, एमफिल, पीएचडी हिंदी में कर पासआउट होते हैं। यह संख्या हर साल बढ़ रही है। हिंदी का परिवार यहां बढ़ रहा है। पर्यटन के लिए भी यह भाषा काम आ रही है। गाइड आदि की नौकरियां भाषा के जरिए चल रही है। हिंदी गाने सुने जाते हैं। लोग भी हिंदी में बातचीत करने लगे हैं।
- डॉ. एलएम रिद्मा निशादिनी लंसकार, शैक्षिक एवं शोध अधिकारी, राष्ट्रभाषा शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान, राजभाषा मंत्रालय, श्रीलंका
हिंदी की समृद्धि में अखबारों का बड़ा योगदान
हिंदी की समृद्धि में हिंदी के अखबारों का बड़ा योगदान है। इसलिए हिंदी का ही प्रयोग करना चाहिए और अंग्रेजी के चलन से बचना चाहिए। यहां हिंदी भाषा चीनी, जापानी की तुलना में तो पीछे है, लेकिन इसकी निरंतरता जारी है। रोजगार की भाषा के रूप में यह आगे बढ़ रही है। हिंदी के पढ़ने के लिए सामग्री बहुतायत में होनी चाहिए और उपलब्ध भी करवाई जा रही है। यहां के लोग भी तेजी से हिंदी सीख रहे हैं, क्योंकि कई परिवारों के रिश्तेदार मुंबई आदि जगहों पर हैं। ऐसे में वह हिंदी में बात करना पसंद करते हैं।
- प्रो. शिवकुमार सिंह, अध्यक्ष, भारतीय अध्ययन केंद्र, कला संकाय, लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल
हिंदी काफी मजबूत.. ऊपर बैठे लोग कर रहे कमजोर
यूरोप में बाजार के कारण हिंदी का विकास हुआ है। सामान जितने भी हैं उन पर तीन-तीन भाषाओं में जानकारी लिखी जा रही है। उसमें एक हिंदी भी है। हिंदी ने अपनी जगह गति के मुताबिक बना ली है। यहां मसालों के पैकेट पर भी यह प्रयोग हो रही है। यहां अनुवाद पर काम काफी हुआ है। 400 से अधिक रचनाओं का अनुवाद किया गया है। बॉलीवुड फिल्मों के जरिए भी हिंदी यहां बढ़ रही है। विश्वविद्यालयों में पीएचडी करने वालों की संख्या बढ़ रही है। इसके जरिए कहीं न कहीं नौकरी भी उन्हें मिल रही है। हिंदी मजबूत है पर ऊपर बैठे लोग इसे कमजोर करने पर लगे हैं।
- प्रो. आनंद वर्धन शर्मा, विजिटिंग प्रोफेसर, भारत विद्या विभाग, सोफिया विश्वविद्यालय, बल्गारिया
- प्रो. शिवकुमार सिंह, अध्यक्ष, भारतीय अध्ययन केंद्र, कला संकाय, लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल
हिंदी काफी मजबूत.. ऊपर बैठे लोग कर रहे कमजोर
यूरोप में बाजार के कारण हिंदी का विकास हुआ है। सामान जितने भी हैं उन पर तीन-तीन भाषाओं में जानकारी लिखी जा रही है। उसमें एक हिंदी भी है। हिंदी ने अपनी जगह गति के मुताबिक बना ली है। यहां मसालों के पैकेट पर भी यह प्रयोग हो रही है। यहां अनुवाद पर काम काफी हुआ है। 400 से अधिक रचनाओं का अनुवाद किया गया है। बॉलीवुड फिल्मों के जरिए भी हिंदी यहां बढ़ रही है। विश्वविद्यालयों में पीएचडी करने वालों की संख्या बढ़ रही है। इसके जरिए कहीं न कहीं नौकरी भी उन्हें मिल रही है। हिंदी मजबूत है पर ऊपर बैठे लोग इसे कमजोर करने पर लगे हैं।
- प्रो. आनंद वर्धन शर्मा, विजिटिंग प्रोफेसर, भारत विद्या विभाग, सोफिया विश्वविद्यालय, बल्गारिया
30 से अधिक देशों में सिखाई जा रही हिंदी
हर भाषा का अपना एक अलग महत्व है। सभी भाषाएं प्यार करना सिखाती हैं। हिंदी प्रेम की भाषा है जो दुनिया के 30 से अधिक देशों में अब सिखाई जा रही है। विश्वविद्यालयों में इसके केंद्र खुले हैं। अमेरिका में भी प्रशिक्षण केंद्र खुल गए हैं। लगातार हिंदी विश्व पटल पर आगे बढ़ रही है। रोजगार की भी कमी नहीं है। अनुवादकों की जरूरत हर देश को होती है। ऐसे में भाषा पर पकड़ होना जरूरी है। विश्व हिंदी सम्मेलनों में लगातार विदेशी प्रतिनिधियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
- डॉ. गुरमीत सिंह, हिंदी विभाग अध्यक्ष, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
- डॉ. गुरमीत सिंह, हिंदी विभाग अध्यक्ष, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़