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निजी स्कूलों के मनमाने रवैये पर हाईकोर्ट सख्त, यूटी प्रशासन व अन्य को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 08 Mar 2017 09:22 AM IST
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- फोटो : File Photo
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निजी स्कूलों पर मनमाने तरीके से फीस वसूली और व्यावसायिक संस्थानों की तरह एकेडमी चलाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। पंजाब-हरियाण हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, यूटी प्रशासन, शिक्षा सचिव, सीबीएसई और इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन को 28 मार्च के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
एडवोकेट रितेश पांडेय ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि चंडीगढ़ में किसी फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी के अभाव में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर मनमाने तरीके से छात्रों की फीस में बढ़ोतरी करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया कि जिस तरह से स्कूलों में अभिभावकों की जेब काटी जा रही है, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि निजी स्कूल व्यावसायिक संस्थानों में तब्दील होते जा रहे हैं।
हाईकोर्ट को बताया गया कि ऐसे ही कई मामलों को लेकर हाईकोर्ट में वर्ष 2009 में कई याचिकाएं दायर हुई थी। हाईकोर्ट ने इन सभी याचिकायों का निपटारा करते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाये जाने वाली फीस को नियमित करने के लिए अपनी कमेटियों का गठन करने के निर्देश दिए थे।
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आदेश में यह भी कहा गया था कि एक मैकेनिज्म तैयार किया जाए, जिससे फीस को लेकर कोई धक्का न हो। हाईकोर्ट को बताया गया कि हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश पर हरियाणा स्कूल एजुकेशन रूल्स में संशोधन कर स्कूलों की फीस को निर्धारित करने के लिए डिवीजन स्तर पर डिविजनल कमिश्नर के अधीन एक कमेटी का गठन कर इसकी 28 जनवरी 2014 को नोटिफिकेशन भी कर दी थी।
ठीक इसी तर्ज पर पंजाब सरकार ने भी पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस इन एडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशनल एक्ट-2016 की गत वर्ष दिसंबर माह में नोटिफिकेशन कर दी है। बावजूद इसके अभी तक चंडीगढ़ प्रशासन ने अभी तक पंजाब की तर्ज पर ऐसी कोई कमेटी का गठन ही नहीं किया है, जो निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई जा रही फीस के खिलाफ शिकायतें सुन उनका निपटारा कर सके। हाईकोर्ट ने याचिका पर सभी प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
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एडवोकेट रितेश पांडेय ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि चंडीगढ़ में किसी फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी के अभाव में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर मनमाने तरीके से छात्रों की फीस में बढ़ोतरी करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया कि जिस तरह से स्कूलों में अभिभावकों की जेब काटी जा रही है, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि निजी स्कूल व्यावसायिक संस्थानों में तब्दील होते जा रहे हैं।
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हाईकोर्ट को बताया गया कि ऐसे ही कई मामलों को लेकर हाईकोर्ट में वर्ष 2009 में कई याचिकाएं दायर हुई थी। हाईकोर्ट ने इन सभी याचिकायों का निपटारा करते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाये जाने वाली फीस को नियमित करने के लिए अपनी कमेटियों का गठन करने के निर्देश दिए थे।
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आदेश में यह भी कहा गया था कि एक मैकेनिज्म तैयार किया जाए, जिससे फीस को लेकर कोई धक्का न हो। हाईकोर्ट को बताया गया कि हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश पर हरियाणा स्कूल एजुकेशन रूल्स में संशोधन कर स्कूलों की फीस को निर्धारित करने के लिए डिवीजन स्तर पर डिविजनल कमिश्नर के अधीन एक कमेटी का गठन कर इसकी 28 जनवरी 2014 को नोटिफिकेशन भी कर दी थी।
ठीक इसी तर्ज पर पंजाब सरकार ने भी पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस इन एडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशनल एक्ट-2016 की गत वर्ष दिसंबर माह में नोटिफिकेशन कर दी है। बावजूद इसके अभी तक चंडीगढ़ प्रशासन ने अभी तक पंजाब की तर्ज पर ऐसी कोई कमेटी का गठन ही नहीं किया है, जो निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई जा रही फीस के खिलाफ शिकायतें सुन उनका निपटारा कर सके। हाईकोर्ट ने याचिका पर सभी प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।