फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Highcourt reprimanded Haryana government Employee widow denied pension for 25 years

हरियाणा सरकार को फटकार: कर्मचारी की विधवा को 25 साल पेंशन से रखा वंचित, हाईकोर्ट ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

Thu, 06 Mar 2025 03:33 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 06 Mar 2025 03:33 PM IST
सार

हरियाणा पुलिस के कर्मचारी की फरवरी 2000 में माैत हो गई थी। उनकी दो पत्नियां थीं। विवाद के चलते सरकार ने किसी को भी पेंशन नहीं जारी की थी। 

विज्ञापन
Highcourt reprimanded Haryana government Employee widow denied pension for 25 years
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा पुलिस के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की विधवा को पारिवारिक पेंशन देने में 25 साल की देरी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया है। 
विज्ञापन


मृत कर्मचारी की दो पत्नियां थीं और विवाद के चलते सरकार ने किसी को भी पेंशन जारी नहीं की थी, विवाद 25 साल से चल रहा था।

गुरुग्राम निवासी मुन्नी बाई व अन्य ने साल 2000 में याचिका दायर कर पेंशन की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि उसके पति राम सहिन हरियाणा पुलिस से 1 अगस्त 1985 को सेवानिवृत्त हुए थे और 23 फरवरी 2000 को उनका निधन हो गया। चूंकि मृतक कर्मचारी की दो पत्नियां थीं, सरकार ने विवाद के चलते किसी को भी पेंशन जारी नहीं की। 
विज्ञापन


याचिकाकर्ता ने बताया कि पहली पत्नी का निधन 24 जुलाई 2006 को हो गया और अब परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं है। ऐसे में उसे पेंशन मिलनी चाहिए। सरकार की तरफ से कहा गया कि विभाग यह तय नहीं कर पाया कि याचिकाकर्ता मृतक की कानूनी रूप से वैध पत्नी हैं या नहीं, क्योंकि पेंशन दस्तावेजों में पहली पत्नी को कानूनी उत्तराधिकारी बताया गया था। अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी थी कि वह कानून के अनुसार पेंशन जारी करे, न कि पूरी राशि को रोक कर रखे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि याचिकाकर्ता मृतक कर्मचारी की कानूनी रूप से वैध पत्नी साबित होती हैं, तो पेंशन और बकाया राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दी जाए। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि यदि मृतक के परिवार का अन्य कोई भी व्यक्ति इस पेंशन पर दावा करता है, तो सरकार उसके दावे पर भी विचार कर सकती है। कोर्ट ने सरकार को दो महीने के भीतर सभी आवश्यक कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया और इस देरी को अन्यायपूर्ण करार दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 25 वर्षों से याचिकाकर्ता को उसका हक नहीं मिला और सरकार की निष्क्रियता के कारण पेंशन जारी नहीं हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed