गिरफ्तार होंगे करौंथा आश्रम के मुखी संत रामपाल
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संत रामपाल और रामकंवर ढाका के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर सोमवार को पेश करने का निर्देश दिए थे।
सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल और राष्ट्रीय समाज सेवक समिति (आरएसएसएस) मुखी रामकंवर ढाका को गत बुधवार को हाईकोर्ट में पेश होना था, लेकिन एक बार फिर बीमारी का बहाना बनाकर संत रामपाल पेश नहीं हुए। रामपाल का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. हुड्डा बुधवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। रामपाल के वकील ने कहा कि वह अस्वस्थ हैं।
इस वजह से अदालत में पेश नहीं हो सकते। ढाका के वकील ने बताया कि वह आ रहे थे, लेकिन समर्थकों ने रास्ते में रोक लिया। इस वजह से अदालत में पेश नहीं हो सके। बेंच ने सख्ती बरतते हुए रामपाल और ढाका के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।
रामपाल का पेशी पर न आने का मतलब अवमानना
एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने बेंच को राय दी कि रामपाल का पेशी पर न आना एक सुनियोजित और जानबूझ कर की गई अवमानना है। लिहाजा, रामपाल की जमानत रद्द की जानी चाहिए।
संत रामपाल के खिलाफ रोहतक अदालत में हत्या का केस चल रहा है। इसी मामले में उन्हें हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। गुप्ता ने कहा कि जमानत का मतलब है कि अभियुक्त ट्रायल और केस से जुड़ी अन्य पेशियों पर पेश हो, लेकिन रामपाल पेश नहीं हो रहे। हाईकोर्ट ने रामपाल की जमानत के केस का रिकार्ड भी तलब कर लिया है।
जेल में डालने पर मांगी राय
बेंच ने एमिक्स क्यूरी से पूछा, क्या हाईकोर्ट रामपाल को सीधे जेल में डाल सकती है। अनुपम गुप्ता ने बेंच को बताया कि एक्ट के मुताबिक कोर्ट अवमानना कार्रवाई के दौरान किसी अभियुक्त को जेल में नहीं डाल सकती। सिर्फ उसकी मौजूदगी सुनिश्चित बनाने के लिए सख्त से सख्त कदम उठा सकती है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस से मिला प्रतिनिधिमंडल
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेशी मुकम्मल होने के बाद पांच श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल एक्टिंग चीफ जस्टिस से मिला। उनसे मिलकर बाहर आने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि एक्टिंग चीफ जस्टिस से कहा गया है कि अवमानना कार्रवाई शुरू करना सही नहीं था।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 14 जुलाई को हिसार अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान अदालत में आए एक एडवोकेट ने संत रामपाल से बदतमीजी की, जिससे श्रद्धालु भड़क उठे। प्रतिनिधिमंडल में शामिल श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि उक्त वकील ने हिसार बार एसोसिएशन को एकत्र किया और हरियाणा में हड़ताल की।
इसके बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के माध्यम से तत्कालीन चीफ जस्टिस से मिले। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि संत रामपाल का पक्ष सुने बिना हाईकोर्ट में अवमानना कार्रवाई चलाई गई। श्रद्धालुओं ने बताया कि एसीजे ने कहा कि यह बात वह बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान रखें। फिलहाल, तुरंत चंडीगढ़ छोड़ दें।