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Highcourt: टूट चुके रिश्ते को दिखावे के लिए जिंदा रखना अन्याय, तलाक के मामले में हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी

Sat, 08 Jun 2024 11:57 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 08 Jun 2024 11:57 AM IST
सार

महिला की अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि एक पति या पत्नी द्वारा दूसरे के खिलाफ दहेज की मांग या घरेलू हिंसा के निराधार/अपुष्ट आरोप किसी के लिए भी कष्टकारी होंगे।

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Highcourt important comment on Case of Divorce
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विवाह जो पूरी तरह से टूट चुका है, उसे समाप्त करते हुए तलाक का आदेश पारित न करना दोनों पक्षों के लिए क्रूरता है। ऐसे रिश्ते में प्रत्येक पक्ष एक-दूसरे के साथ क्रूरता से पेश आता है। टूटी हुई शादी के दिखावे को जिंदा रखना दोनों पक्षों के साथ अन्याय होगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तलाक के एक आदेश पर मोहर लगाते हुए यह अहम टिप्पणी की है। साथ ही इस मामले में बिल्डर को गुजारे भत्ते के तौर पर पत्नी को 8 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश भी जारी किया है।

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बिल्डर की पत्नी ने हिसार की फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पति की याचिका को मंजूर करते हुए तलाक को मंजूर किया गया। पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि उसका विवाह 1995 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था और उनके दो बच्चे हुए। पत्नी शुरुआत से ही असभ्य, झगड़ालू व क्रूर थी। पत्नी ने दावा किया था कि वह उसके साथ रहना चाहती है और इसी के चलते उसने कर्ज लेकर हिसार में एक घर खरीदा। उस घर में आज भी पत्नी रह रही है। 
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पत्नी बीएएमएस (बैचलर आफ आयुर्वेद, मेडिसिन एंड सर्जरी) डॉक्टर थी और अच्छी कमाई कर रही थी। उसने अपने बच्चों की शिक्षा या पालन-पोषण पर पैसा खर्च नहीं किया। तीन साल तक उससे शारीरिक संबंध बनाने से मना कर दिया, जिससे उसे मानसिक यातना झेलनी पड़ीं। महिला ने इन आरोपों से इनकार किया। पत्नी ने कहा कि पति ने उससे जानबूझ कर बुरा व्यवहार किया ताकि वह दूसरा विवाह कर सके। उसने बच्चों पर पैसा खर्च किया है और कभी भी पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इन्कार नहीं किया।
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इस पर हिसार की फैमिली कोर्ट ने 2018 में तलाक की मांग को स्वीकार कर लिया। इसके खिलाफ महिला की अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि एक पति या पत्नी द्वारा दूसरे के खिलाफ दहेज की मांग या घरेलू हिंसा के निराधार/अपुष्ट आरोप किसी के लिए भी कष्टकारी होंगे। फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पति याची को नियमित 5 लाख रुपये महीना गुजारा भत्ता दे रहा है। पति की कंपनी का टर्नओवर लगभग 2,500 करोड़ रुपये है, ऐसे में वह 8 करोड़ रुपये पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के लिए दे, ताकि पत्नी उसी जीवन स्तर को बनाए रख सके जिससे वह अपने पति के साथ रहना जारी रखती।

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