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Punjab: जेल से लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू बेहद गंभीर विषय, 7 माह बाद जांच पूरी नहीं, हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

Thu, 09 Nov 2023 09:24 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 09 Nov 2023 09:24 PM IST
सार

इंटरव्यू को लेकर जांच के लिए सरकार ने एसटीएफ के स्पेशल डीजीपी और एडीजीपी जेल की दो सदस्यों वाली कमेटी गठित की थी। इस मामले में अभी जांच विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि इतना गंभीर मामला होने के बावजूद सात माह में जांच तक पूरी नहीं हुई है।

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High Court summoned report from ADGP Jail in interview of Lawrence Bishnoi from jail
लॉरेंस बिश्नोई। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के आरोपी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के मार्च 2023 में जारी इंटरव्यू को बेहद गंभीर विषय बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को सात माह बीत जाने पर भी जांच पूरी न होने पर हैरानी जताई है। हाईकोर्ट ने एडीजीपी जेल को दो सप्ताह में इस मामले में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही जेलों में कैदियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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मामला संगरूर की जेल से जुड़ा है, जहां पर पॉक्सो एक्ट में विचाराधीन कैदी निर्मिंदरजीत द्वारा पीड़िता को मोबाइल से जेल का वीडियो भेजने की अदालत को जानकारी दी गई थी। सिंगल बेंच के समक्ष कैदी की नियमित जमानत याचिका विचाराधीन थी। जेल में कैदियों के मोबाइल इस्तेमाल को बेहद गंभीर मामला बताते हुए सिंगल बेंच ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था। हाईकोर्ट ने मामले में जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई शुरू की तो इस दौरान लॉरेंस बिश्नोई के जेल से हुए इंटरव्यू का मुद्दा उठा और हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब करते हुए उन्हें गुरुवार दोपहर दो बजे तक स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया।
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दोपहर दो बजे सुनवाई आरंभ हुई तो पंजाब सरकार ने बताया कि इंटरव्यू मार्च माह में जारी किया गया था और उस समय लॉरेंस बठिंडा की जेल में मौजूद था। इंटरव्यू को लेकर जांच के लिए सरकार ने एसटीएफ के स्पेशल डीजीपी और एडीजीपी जेल की दो सदस्यों वाली कमेटी गठित की थी। इस मामले में अभी जांच विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि इतना गंभीर मामला होने के बावजूद सात माह में जांच तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में एडीजीपी जेल को इस बारे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है।

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जेल में फोन पहुंचने पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने जेल में फोन पहुंचने पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऊंची दीवारें और वॉचटावर के बावजूद लोग जेल के बाहर से फोन अंदर पहुंचा रहे हैं और कैदियों को ये मिल रहे हैं। यह चिंता का विषय है। इस प्रकार यदि फोन पर अपराधी जेल में रहते हुए अपने मंसूबों को पूरा करते रहेंगे तो इसके गंभीर परिणाम भविष्य में दिखाई देंगे। इसे रोकने के लिए प्रभावी प्रणाली को अपनाना बेहद जरूरी है।

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