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तथ्यों को छुपाने पर हाईकोर्ट का सख्त रवैया: न्याय के शुद्ध स्रोत को कलंकित हाथों से छूने वाला रहम का हकदार नही
Thu, 17 Apr 2025 01:32 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 17 Apr 2025 01:32 PM IST
सार
याची कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए करीब 4 करोड़ की कीमत के चेक बाउंस मामले में फरीदाबाद की अदालत द्वारा जारी समन आदेश को चुनौती दी थी। याची ने याचिका दाखिल करते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज होने की जानकारी छिपाई थी।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में शिकायत को खारिज करने की मांग वाली याचिका में तथ्यों को छिपाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए याची पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिका में यह तथ्य छिपाया गया समन आदेश को पुनरीक्षण में चुनौती दी गई थी और जिसे खारिज कर दिया गया था।
याची कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए करीब 4 करोड़ की कीमत के चेक बाउंस मामले में फरीदाबाद की अदालत द्वारा जारी समन आदेश को चुनौती दी थी। याची ने याचिका दाखिल करते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज होने की जानकारी छिपाई थी। जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु ने कहा कि अब यह स्थापित कानून है कि जो न्याय की धारा को प्रदूषित करने का प्रयास करता है या जो न्याय के शुद्ध
स्रोत को कलंकित हाथों से छूता है वह किसी भी राहत का हकदार नहीं है।
न्यायालय से महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाना वास्तव में न्यायालय के साथ धोखाधड़ी करना है। लैटिन कहावत है सुप्रेसियो वेरी, एक्सप्रेसियो फाल्सी यानी सत्य को दबाना झूठ की अभिव्यक्ति के बराबर है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही की शुद्धता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। जो कोई भी इसे प्रदूषित करने का प्रयास करेगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे।
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एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दायर शिकायत को रद्द करने और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के समक्ष लंबित उसकी पूरी कार्यवाही को रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया तथा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी कल्याण संघ के पास एक लाख रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया।
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याची कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए करीब 4 करोड़ की कीमत के चेक बाउंस मामले में फरीदाबाद की अदालत द्वारा जारी समन आदेश को चुनौती दी थी। याची ने याचिका दाखिल करते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज होने की जानकारी छिपाई थी। जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु ने कहा कि अब यह स्थापित कानून है कि जो न्याय की धारा को प्रदूषित करने का प्रयास करता है या जो न्याय के शुद्ध
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स्रोत को कलंकित हाथों से छूता है वह किसी भी राहत का हकदार नहीं है।
न्यायालय से महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाना वास्तव में न्यायालय के साथ धोखाधड़ी करना है। लैटिन कहावत है सुप्रेसियो वेरी, एक्सप्रेसियो फाल्सी यानी सत्य को दबाना झूठ की अभिव्यक्ति के बराबर है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही की शुद्धता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। जो कोई भी इसे प्रदूषित करने का प्रयास करेगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे।
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एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दायर शिकायत को रद्द करने और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के समक्ष लंबित उसकी पूरी कार्यवाही को रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया तथा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी कल्याण संघ के पास एक लाख रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया।